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सुप्रीम कोर्ट का आदेश न्यायप्रिय लोगों के लिए निराशाजनक : मदनी
Wed, 18 Feb 2026 12:45 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Wed, 18 Feb 2026 12:45 AM IST
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मौलाना महमूद मदनी।
- फोटो : कैंची के हमले में घायल युवक।
देवबंद। जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के भड़काऊ भाषण और कृत्य के मामले में दायर की गई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से हाईकोर्ट जाने के निर्देश दिए जाने और टिप्पणी पर गहरी चिंता जताई है।
मौलाना महमूद मदनी की ओर से मंगलवार को जारी बयान में दायर की गई याचिकाओं पर सुनवाई को लेकर कहा कि यह न्यायप्रिय लोगों के लिए निराशाजनक रवैया है। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 32 को डॉ. बीआर आंबेडकर ने संविधान का दिल और आत्मा बताया था। यह नागरिकों को अपने मूलभूत अधिकारों की सुरक्षा के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट से संपर्क करने का अधिकार देता है। कहा कि ऐसे मामले जिनका संबंध हेट स्पीच, सांप्रदायिकता और किसी वर्ग के जीवन के अधिकार से हो उनमें सुप्रीम कोर्ट से कठोर और स्पष्ट कदम उठाने बल्कि स्वयं संज्ञान लेने (सुओ-मोटो) की कार्रवाई की भी उम्मीद की जाती है।
उन्होंने कहा कि ऐसी भावना न केवल निराशा को बढ़ावा देती है बल्कि न्यायालय के सार्वजनिक सम्मान और उसकी प्रतिष्ठा पर भी प्रभाव डालती है। मदनी ने कहा कि जमीयत न्यायपालिका के सम्मान में विश्वास रखती है, लेकिन साथ ही यह भी समझती है कि हेट स्पीच और सांप्रदायिकता उकसावे के मामलों में गंभीरता, निष्पक्षता और त्वरित न्याय अत्यंत जरूरी है। कहा कि वह हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
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मौलाना महमूद मदनी की ओर से मंगलवार को जारी बयान में दायर की गई याचिकाओं पर सुनवाई को लेकर कहा कि यह न्यायप्रिय लोगों के लिए निराशाजनक रवैया है। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 32 को डॉ. बीआर आंबेडकर ने संविधान का दिल और आत्मा बताया था। यह नागरिकों को अपने मूलभूत अधिकारों की सुरक्षा के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट से संपर्क करने का अधिकार देता है। कहा कि ऐसे मामले जिनका संबंध हेट स्पीच, सांप्रदायिकता और किसी वर्ग के जीवन के अधिकार से हो उनमें सुप्रीम कोर्ट से कठोर और स्पष्ट कदम उठाने बल्कि स्वयं संज्ञान लेने (सुओ-मोटो) की कार्रवाई की भी उम्मीद की जाती है।
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उन्होंने कहा कि ऐसी भावना न केवल निराशा को बढ़ावा देती है बल्कि न्यायालय के सार्वजनिक सम्मान और उसकी प्रतिष्ठा पर भी प्रभाव डालती है। मदनी ने कहा कि जमीयत न्यायपालिका के सम्मान में विश्वास रखती है, लेकिन साथ ही यह भी समझती है कि हेट स्पीच और सांप्रदायिकता उकसावे के मामलों में गंभीरता, निष्पक्षता और त्वरित न्याय अत्यंत जरूरी है। कहा कि वह हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
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