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भा रही स्ट्राबेरी की खेती, किसान पा रहे अच्छा मुनाफा
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पॉली हाऊस में स्ट्राबेरी की खेती
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। बढ़िया भाव और अच्छे उत्पादन के चलते जनपद के किसानों को स्ट्राबेरी की खेती भा रही है। फसल और रेट सही रहे तो किसान को एक एकड़ स्ट्राबेरी से चार से छह लाख रुपये की आमदनी प्राप्त हो सकती है। जिले के आधा दर्जन से अधिक किसान स्ट्राबेरी की खेती कर रहे हैं। इसकी खेती पॉली हाउस के साथ ही खुले खेत में भी हो रही है।
स्ट्राबेरी की पौध अगस्त से सितंबर महीने तक रोपी जाती है। एक बीघा खेत में इसके पांच हजार पौधे लग जाते हैँ। इस फसल की अवधि चार माह है। इसे लगाने के डेढ़ महीने बाद से इससे फल मिलना शुरू हो जाता है। प्रति पौधा एक से डेढ़ किलो तक स्ट्राबेरी प्राप्त हो जाती है। स्ट्राबेरी का बाजार में भाव 60 से 150 रुपये रहता है। इससे किसान को चार से छह लाख रुपये तक प्रति एकड़ की आमदनी प्राप्त हो जाती है। स्थानीय बाजार के साथ ही यहां से स्ट्राबेरी दिल्ली, चंडीगढ़ और देहरादून आदि में भी जाती है।
स्ट्राबेरी की प्रजातियां
जनपद में किसान स्ट्राबेरी की कई प्रजातियों की खेती कर रहे हैं। इनमें रेनकोट, चांडलर, पेजेरो, ज्योलीकोट, सेल्वा, फ्लोरिडा आदि प्रमुख हैं। ह्दय के आकार के इस फल को दिल की बीमारियों में फायदेमंद बताया गया है। ब्लडप्रेशर को कंट्रोल रखने में भी यह सहायक रहती है।
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किसानों की बात --
गांव लोदीपुर में डेढ़ एकड़ के पॉली हाउस में स्ट्राबेरी की खेती कर रहे प्रगतिशील किसान अश्वनी सैनी कहते हैं कि स्ट्राबेरी की खेती काफी लाभकारी है। चार से पांच माह की यह फसल चार से छह लाख रुपये प्रति एकड़ तक हो जाती है। किसानों के लिए यह नकदी फसल है। बाजार में इसका औसत भाव 100 रुपये प्रति किलो तक रहता है।
गांव थापुल इस्माइलपुर में करीब चार बीघा में स्ट्राबेरी की खेती करने वाली मीना गौतम के पॉलीहाउस से हालांकि स्ट्राबेरी की तुड़ाई अभी तक शुरू नहीं हुई है। उनका कहना है कि स्ट्राबेरी का बाजार में भाव 60 से 150 रुपये प्रति किलो तक मिल जाता है। उन्होंने अपने पॉलीहाउस में स्ट्राबेरी के 20 हजार पौधे लगा रखे हैं। इसकी खेती काफी फायदेमंद है।
स्ट्राबेरी की खेती किसानों के लिए काफी फायदेमंद है। एक एकड़ से चार पांच महीने में ही चार से छह लाख रुपये तक की आय प्राप्त होती है। अब जनपद में इसकी खेती की ओर किसानों का रुझान बढ़ रहा है। इसे पॉली हाउस के अलावा खुले खेत में भी उगाया जा सकता है। -- अरुण कुमार, जिला उद्यान अधिकारी।
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स्ट्राबेरी की पौध अगस्त से सितंबर महीने तक रोपी जाती है। एक बीघा खेत में इसके पांच हजार पौधे लग जाते हैँ। इस फसल की अवधि चार माह है। इसे लगाने के डेढ़ महीने बाद से इससे फल मिलना शुरू हो जाता है। प्रति पौधा एक से डेढ़ किलो तक स्ट्राबेरी प्राप्त हो जाती है। स्ट्राबेरी का बाजार में भाव 60 से 150 रुपये रहता है। इससे किसान को चार से छह लाख रुपये तक प्रति एकड़ की आमदनी प्राप्त हो जाती है। स्थानीय बाजार के साथ ही यहां से स्ट्राबेरी दिल्ली, चंडीगढ़ और देहरादून आदि में भी जाती है।
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स्ट्राबेरी की प्रजातियां
जनपद में किसान स्ट्राबेरी की कई प्रजातियों की खेती कर रहे हैं। इनमें रेनकोट, चांडलर, पेजेरो, ज्योलीकोट, सेल्वा, फ्लोरिडा आदि प्रमुख हैं। ह्दय के आकार के इस फल को दिल की बीमारियों में फायदेमंद बताया गया है। ब्लडप्रेशर को कंट्रोल रखने में भी यह सहायक रहती है।
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किसानों की बात --
गांव लोदीपुर में डेढ़ एकड़ के पॉली हाउस में स्ट्राबेरी की खेती कर रहे प्रगतिशील किसान अश्वनी सैनी कहते हैं कि स्ट्राबेरी की खेती काफी लाभकारी है। चार से पांच माह की यह फसल चार से छह लाख रुपये प्रति एकड़ तक हो जाती है। किसानों के लिए यह नकदी फसल है। बाजार में इसका औसत भाव 100 रुपये प्रति किलो तक रहता है।
गांव थापुल इस्माइलपुर में करीब चार बीघा में स्ट्राबेरी की खेती करने वाली मीना गौतम के पॉलीहाउस से हालांकि स्ट्राबेरी की तुड़ाई अभी तक शुरू नहीं हुई है। उनका कहना है कि स्ट्राबेरी का बाजार में भाव 60 से 150 रुपये प्रति किलो तक मिल जाता है। उन्होंने अपने पॉलीहाउस में स्ट्राबेरी के 20 हजार पौधे लगा रखे हैं। इसकी खेती काफी फायदेमंद है।
स्ट्राबेरी की खेती किसानों के लिए काफी फायदेमंद है। एक एकड़ से चार पांच महीने में ही चार से छह लाख रुपये तक की आय प्राप्त होती है। अब जनपद में इसकी खेती की ओर किसानों का रुझान बढ़ रहा है। इसे पॉली हाउस के अलावा खुले खेत में भी उगाया जा सकता है। -- अरुण कुमार, जिला उद्यान अधिकारी।

अश्वनी सैनी- फोटो : SAHARANPUR

मीना गौतम- फोटो : SAHARANPUR