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Saharanpur News: जनपद के किसानों को भा रही स्ट्राॅबेरी की खेती
Wed, 01 Mar 2023 12:16 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Wed, 01 Mar 2023 12:16 AM IST
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स्ट्राबेरी की खेती
सहारनपुर। पोषक तत्वों से भरपूर स्ट्राॅबेरी जहां स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, वहीं बढि़या भाव मिलने से इसकी खेती भी लाभकारी साबित हो रही है। करीब पांच वर्ष पहले जिले में जहां मात्र दो हेक्टेयर में स्ट्रॉबेरी की खेती होती थी, इस बार इसका रकबा बढ़कर 12 हेक्टेयर से अधिक हो गया है।
दिल जैसी बनावट वाला स्ट्राॅबेरी का फल जितना स्वादिष्ट होता है, उतना ही सेहत के लिए गुणकारी भी है। इसका खट्टा मीठा स्वाद लोगों को बेहद पसंद आता है। सितंबर-अक्तूबर में इसकी रोपाई होती है। इसके फल जनवरी के आखिर से लेकर अप्रैल तक लगते हैं। एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में स्ट्राॅबेरी के 60 से 65 हजार पौधे तक लगते हैं। एक पौधे पर 300 से लेकर 500 ग्राम तक फल प्राप्त होते हैं।
जनपद में विंटर डाउन और कैमरोजा प्रजाति को अधिक पसंद किया जाता है। किसान स्ट्राॅबेरी की पौध महाराष्ट्र के पूना और हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब आदि से लाकर लगाते हैं। जिला उद्यान अधिकारी अरुण कुमार के अनुसार एक हेक्टेयर में इसकी खेती पर करीब चार लाख रुपये का खर्च आता है और नौ लाख रुपये की आय प्राप्त होती है। इससे किसान को करीब पांच लाख रुपये तक की बचत होती है। स्ट्राॅबेरी का फल पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसका सेवन हृदय रोगों, कैंसर, आंखों की रोशनी, मधुमेह आदि रोगों को दूर करने में सहायक होता है।
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बोले किसान
स्ट्राॅबेरी की पौध महाराष्ट्र के पूना से लाकर लगाई गई है। इसकी विंटर डाउन प्रजाति को सितंबर में रोपा गया। एक पौधे से 300 से 500 ग्राम स्ट्राॅबेरी प्राप्त हो जाती है। अच्छा भाव रहने से स्ट्राॅबेरी की खेती किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही है।-- - डॉ. कर्ण सिंह सैनी, स्ट्राॅबेरी उत्पादक।
करीब एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में स्ट्राॅबेरी की खेती की जा रही है। इसे दिल्ली और देहरादून की मंडियों में करीब 100 रुपये प्रति किलो तक का भाव मिल रहा है। अन्य फसलों की तुलना में स्ट्राॅबेरी की खेती अधिक फायदेमंद है।-- अजय चौहान, स्ट्राॅबेरी उत्पादक, ग्राम कोठड़ी बहलोलपुर।
जनपद में स्ट्राॅबेरी की खेती के प्रति किसानों का रुझान बढ़ रहा है। इस बार 12 हेक्टेयर में इसकी खेती हो रही है। इसकी खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को 50 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान दिया जाता है।-- अरुण कुमार, जिला उद्यान अधिकारी।
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दिल जैसी बनावट वाला स्ट्राॅबेरी का फल जितना स्वादिष्ट होता है, उतना ही सेहत के लिए गुणकारी भी है। इसका खट्टा मीठा स्वाद लोगों को बेहद पसंद आता है। सितंबर-अक्तूबर में इसकी रोपाई होती है। इसके फल जनवरी के आखिर से लेकर अप्रैल तक लगते हैं। एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में स्ट्राॅबेरी के 60 से 65 हजार पौधे तक लगते हैं। एक पौधे पर 300 से लेकर 500 ग्राम तक फल प्राप्त होते हैं।
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जनपद में विंटर डाउन और कैमरोजा प्रजाति को अधिक पसंद किया जाता है। किसान स्ट्राॅबेरी की पौध महाराष्ट्र के पूना और हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब आदि से लाकर लगाते हैं। जिला उद्यान अधिकारी अरुण कुमार के अनुसार एक हेक्टेयर में इसकी खेती पर करीब चार लाख रुपये का खर्च आता है और नौ लाख रुपये की आय प्राप्त होती है। इससे किसान को करीब पांच लाख रुपये तक की बचत होती है। स्ट्राॅबेरी का फल पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसका सेवन हृदय रोगों, कैंसर, आंखों की रोशनी, मधुमेह आदि रोगों को दूर करने में सहायक होता है।
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बोले किसान
स्ट्राॅबेरी की पौध महाराष्ट्र के पूना से लाकर लगाई गई है। इसकी विंटर डाउन प्रजाति को सितंबर में रोपा गया। एक पौधे से 300 से 500 ग्राम स्ट्राॅबेरी प्राप्त हो जाती है। अच्छा भाव रहने से स्ट्राॅबेरी की खेती किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही है।
करीब एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में स्ट्राॅबेरी की खेती की जा रही है। इसे दिल्ली और देहरादून की मंडियों में करीब 100 रुपये प्रति किलो तक का भाव मिल रहा है। अन्य फसलों की तुलना में स्ट्राॅबेरी की खेती अधिक फायदेमंद है।
जनपद में स्ट्राॅबेरी की खेती के प्रति किसानों का रुझान बढ़ रहा है। इस बार 12 हेक्टेयर में इसकी खेती हो रही है। इसकी खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को 50 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान दिया जाता है।

स्ट्राबेरी की खेती

स्ट्राबेरी की खेती