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Saharanpur News: केंचुए से जैविक खाद बना लिखी आत्मनिर्भरता की कहानी
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छुटमलपुर। गांव चांडी निवासी लघु किसान विनोद सैनी की दो बेटियां मीनाक्षी और काजल केंचुए से जैविक खाद बनाकर आत्मनिर्भरता की कहानी लिख रही हैं। उन्होंने परिवार को तो आर्थिक रूप से सबल बनाया ही अपने फार्म पर ग्रामीणों को रोजगार भी दिया। इतना ही नहीं साल में पचास से ज्यादा लोगों को निशुल्क प्रशिक्षण देकर उन्हें भी आत्मनिर्भर बना रही हैं।
मुजफ्फराबाद ब्लाॅक के अति पिछड़े क्षेत्र के गांव चांडी की मीनाक्षी बताती हैं कि पिता के हिस्से में मात्र पांच बीघा जमीन आती है। इससे घर की गुजर बसर मुश्किल से हो पाती थी। तीन भाई बहनों में परिवार की बड़ी संतान होने के नाते उसने इंटर के बाद पिता की आर्थिक ताकत बनने की सोची। वर्ष 2012 में उन्होंने केंचुए से खाद बनाने का काम शुरू किया। शुरुआती दौर में काफी संघर्ष करना पड़ा। ग्रामीण परिवेश के नाते लोगों के ताने भी सुने, लेकिन हिम्मत नहीं हारी।
काम चलने पर वर्ष 2015 में सच ग्रामोदय संस्थान के नाम से संस्था पंजीकृत कराई। पिछले 12 सालों में आज वह अपनी छोटी बहन काजल के साथ इस कारोबार से अच्छा खासा मुनाफा कमा रही है। उनके खाद की सप्लाई पश्चिमी यूपी के साथ ही हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड तक के पाली हाउस में होती है। उन्हें कृषि विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में भी प्रशिक्षण के लिए बुलाया जाता है। खास बात यह है कि इन्होंने कारोबार के साथ अपनी शिक्षा भी जारी रखी। मीनाक्षी जहां एमए हैं वहीं काजल बीएससी और बीएड है।
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मुजफ्फराबाद ब्लाॅक के अति पिछड़े क्षेत्र के गांव चांडी की मीनाक्षी बताती हैं कि पिता के हिस्से में मात्र पांच बीघा जमीन आती है। इससे घर की गुजर बसर मुश्किल से हो पाती थी। तीन भाई बहनों में परिवार की बड़ी संतान होने के नाते उसने इंटर के बाद पिता की आर्थिक ताकत बनने की सोची। वर्ष 2012 में उन्होंने केंचुए से खाद बनाने का काम शुरू किया। शुरुआती दौर में काफी संघर्ष करना पड़ा। ग्रामीण परिवेश के नाते लोगों के ताने भी सुने, लेकिन हिम्मत नहीं हारी।
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काम चलने पर वर्ष 2015 में सच ग्रामोदय संस्थान के नाम से संस्था पंजीकृत कराई। पिछले 12 सालों में आज वह अपनी छोटी बहन काजल के साथ इस कारोबार से अच्छा खासा मुनाफा कमा रही है। उनके खाद की सप्लाई पश्चिमी यूपी के साथ ही हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड तक के पाली हाउस में होती है। उन्हें कृषि विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में भी प्रशिक्षण के लिए बुलाया जाता है। खास बात यह है कि इन्होंने कारोबार के साथ अपनी शिक्षा भी जारी रखी। मीनाक्षी जहां एमए हैं वहीं काजल बीएससी और बीएड है।
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