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पांच हजार हेक्टेयर में उन्नतशील प्रजाति की बुआई
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गन्ने की फसल
- फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। रेडरॉट सहित अन्य बीमारियों का प्रकोप बढ़ने पर गन्ना विभाग गन्ना अगेती प्रजाति सीओ-0238 को अन्य उन्नतशील प्रजातियों से बदलने में जुटा है। जनपद में 5223 हेक्टेयर क्षेत्रफल में कोलक 14201 और कोशा 13235 जैसी नई प्रजातियों की शरद कालीन गन्ने की बुआई कराई गई है। इसके अलावा अन्य उन्नतशील प्रजातियों की बुआई को भी बढ़ावा दिया है।
जनपद के अधिकांश किसान गन्ने की सीओ 0238 प्रजाति की खेती करते हैं। जिले में इस प्रजाति का रकबा 98 प्रतिशत है। पिछले कुछ समय से इस प्रजाति में रेड रॉट सहित अन्य बीमारियां बढ़ने लगी हैं। जिससे किसानों का कीटनाशकों का खर्च बढ़ गया है। इसको देखते हुए विभाग से लेकर किसान तक गन्ने के प्रजाति के बदलाव में जुट गए हैं।
गांव बड़गांव निवासी किसान समर सिंह का कहना है कि कोशा-0238 में रेडरॉट का प्रकोप ज्यादा दिखाई दे रहा है। इसके चलते इस बार उसके स्थान पर उन्होंने कोशा- 0118, कोशा-13235 प्रजाति की बुआई की है।
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गांव औरंगाबाद निवासी किसान वेदपाल का कहना है कि वे पहले अधिकांश गन्ना सीओ- 0238 की खेती ही करते थे। इस बार अन्य उन्नतशील प्रजातियों को प्रायोगिक तौर पर बोया है। इनमें सीओजे-14 प्रजाति आदि शामिल हैं।
सीओ-0238 प्रजाति में बढ़ते रडरॉट सहित अन्य रोगों के चलते गन्ने की अन्य उन्नतशील प्रजातियों की बुआई कराई गई है। जिले में 5223 हेक्टेयर क्षेत्रफल में शरद कालीन गन्ना बुआई हुई है। इसमें कोलक-14201,कोशा 13235, कोशा 15023 आदि प्रजातियां शामिल हैं। - कृष्ण मोहन मणि त्रिपाठी।
लाल सड़न रोग से प्रभावित होने के कारण मिल क्षेत्र के 250 से अधिक किसानों ने सीओ- 0238 के स्थान पर सीओ-15023 प्रजाति की बुआई की है। किसान नई प्रजातियों की बुआई करते समय भी ट्राइकोडर्मा का प्रयोग अवश्य करें। - डॉ. बीएस तोमर, उप महाप्रबंधक त्रिवेणी शुगर मिल देवबंद।
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जनपद के अधिकांश किसान गन्ने की सीओ 0238 प्रजाति की खेती करते हैं। जिले में इस प्रजाति का रकबा 98 प्रतिशत है। पिछले कुछ समय से इस प्रजाति में रेड रॉट सहित अन्य बीमारियां बढ़ने लगी हैं। जिससे किसानों का कीटनाशकों का खर्च बढ़ गया है। इसको देखते हुए विभाग से लेकर किसान तक गन्ने के प्रजाति के बदलाव में जुट गए हैं।
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गांव बड़गांव निवासी किसान समर सिंह का कहना है कि कोशा-0238 में रेडरॉट का प्रकोप ज्यादा दिखाई दे रहा है। इसके चलते इस बार उसके स्थान पर उन्होंने कोशा- 0118, कोशा-13235 प्रजाति की बुआई की है।
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गांव औरंगाबाद निवासी किसान वेदपाल का कहना है कि वे पहले अधिकांश गन्ना सीओ- 0238 की खेती ही करते थे। इस बार अन्य उन्नतशील प्रजातियों को प्रायोगिक तौर पर बोया है। इनमें सीओजे-14 प्रजाति आदि शामिल हैं।
सीओ-0238 प्रजाति में बढ़ते रडरॉट सहित अन्य रोगों के चलते गन्ने की अन्य उन्नतशील प्रजातियों की बुआई कराई गई है। जिले में 5223 हेक्टेयर क्षेत्रफल में शरद कालीन गन्ना बुआई हुई है। इसमें कोलक-14201,कोशा 13235, कोशा 15023 आदि प्रजातियां शामिल हैं। - कृष्ण मोहन मणि त्रिपाठी।
लाल सड़न रोग से प्रभावित होने के कारण मिल क्षेत्र के 250 से अधिक किसानों ने सीओ- 0238 के स्थान पर सीओ-15023 प्रजाति की बुआई की है। किसान नई प्रजातियों की बुआई करते समय भी ट्राइकोडर्मा का प्रयोग अवश्य करें। - डॉ. बीएस तोमर, उप महाप्रबंधक त्रिवेणी शुगर मिल देवबंद।

किसान समर सिंह- फोटो : SAHARANPUR

किसान वेदपाल- फोटो : SAHARANPUR