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कहीं लटके ताले तो कहीं निर्माण ही अधूरा
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सहारनपुर। स्वच्छ भारत मिशन के तीसरे चरण में ग्राम पंचायतों बनाए गए सामुदायिक शौचालयों पर कहीं ताला लटका है तो कहीं कार्य ही अधर में लटका हैं। यह स्थिति तब बनी है, जब 884 ग्राम पंचायतों से 823 में शौचालय बनकर तैयार हैं। इनमें से 600 स्वयं सहायता समूहों को सौंपे हैं। इसके बाद भी शौचालयों का इस्तेमाल नहीं हो रहा हैं। इस कार्य पर 37 करोड़ रुपये खर्च आया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छ भारत मिशन के तहत जनपद के 11 विकास खंडों की 884 ग्राम पंचायतों में एक वर्ष पूर्व सामुदायिक शौचालयों निर्माण कार्य शुरू हुआ। प्रत्येक शौचालय पर करीब चार लाख रुपये का खर्च आया। सामुदायिक शौचालय बनाने के पीछे शासन की मंशा है कि कोई भी व्यक्ति खुले में शौच न जाए। इस कार्यों पूरा करने के लिए भी समय निर्धारित किया था, इसके बाद भी 61 शौचालय निर्माणाधीन है। पहले ग्राम पंचायतों में कई जगहों पर विभाग को जमीन नहीं मिल पाई थी, लेकिन अब लगभग सभी जगहों पर भूमि उपलब्ध होने के बाद भी शौचालयों कार्य अधर में है, जो शौचालय बन गए हैं, इनमें से ज्यादातर बंद पड़े हैं। ऐसे में योजना पूरी तरह परवान नहीं चढ़ पा रही है।
ग्रामीण बोले, नहीं खुले दरवाजे, बरती लापरवाही
विकास खंड़ साढ़ौली कदीम की ग्राम पंचायत इस्माइलपुर निवासी रजत कुमार ने कहा शौचालय बनाने के कार्य में लापरवाही बरती जा रही है, इस कारण शौचालय का कार्य पूरा नहीं हुआ। नागल निवासी रविंद्र कश्यप ने कहा उनके यहां काफी समय पूर्व सामुदायिक शौचालय बनकर तैयार है, लेकिन उस पर ताला लगा है। गांव रसूलपुर निवासी विकास कुमार ने कहा शौचालय का आज तक दरवाजा ही नहीं खुला है। इसे लेकर संबंधित विभाग के अधिकारियों से बात कर चुके हैं, लेकिन शौचालय नहीं खोला।
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स्वयं सहायता समूहों को करनी है देखरेख
सामुदायिक शौचालय की देखरेख व सफाई व्यवस्था स्वयं सहायता समूहों के सदस्य करेंगे। शासन के निर्देशानुसार 600 शौचालय स्वयं सहायता समूहों को सौंपे हैं। रखरखाव और सफाई के लिए उनको पैसा भी मिल चुका हैं, फिर भी बड़ी संख्या में शौचालयों का प्रयोग नहीं हो रहा है।
वर्जन
खुलते हैं शौचालय, उपयोग में लाए जाएंगे सभी
जिन शौचालयों को स्वयं सहायता समूहों को सौंपा है, वह रोजाना खुलते हैं। यदि कहीं शौचालय बंद है तो उसे भी इसी सप्ताह शुरू कराया जाएगा। ग्रामीणों को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। निर्माणाधीन शौचालयों कार्य भी जल्द पूरा होगा। - आलोक कुमार शर्मा, जिला पंचायत राज अधिकारी।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छ भारत मिशन के तहत जनपद के 11 विकास खंडों की 884 ग्राम पंचायतों में एक वर्ष पूर्व सामुदायिक शौचालयों निर्माण कार्य शुरू हुआ। प्रत्येक शौचालय पर करीब चार लाख रुपये का खर्च आया। सामुदायिक शौचालय बनाने के पीछे शासन की मंशा है कि कोई भी व्यक्ति खुले में शौच न जाए। इस कार्यों पूरा करने के लिए भी समय निर्धारित किया था, इसके बाद भी 61 शौचालय निर्माणाधीन है। पहले ग्राम पंचायतों में कई जगहों पर विभाग को जमीन नहीं मिल पाई थी, लेकिन अब लगभग सभी जगहों पर भूमि उपलब्ध होने के बाद भी शौचालयों कार्य अधर में है, जो शौचालय बन गए हैं, इनमें से ज्यादातर बंद पड़े हैं। ऐसे में योजना पूरी तरह परवान नहीं चढ़ पा रही है।
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ग्रामीण बोले, नहीं खुले दरवाजे, बरती लापरवाही
विकास खंड़ साढ़ौली कदीम की ग्राम पंचायत इस्माइलपुर निवासी रजत कुमार ने कहा शौचालय बनाने के कार्य में लापरवाही बरती जा रही है, इस कारण शौचालय का कार्य पूरा नहीं हुआ। नागल निवासी रविंद्र कश्यप ने कहा उनके यहां काफी समय पूर्व सामुदायिक शौचालय बनकर तैयार है, लेकिन उस पर ताला लगा है। गांव रसूलपुर निवासी विकास कुमार ने कहा शौचालय का आज तक दरवाजा ही नहीं खुला है। इसे लेकर संबंधित विभाग के अधिकारियों से बात कर चुके हैं, लेकिन शौचालय नहीं खोला।
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स्वयं सहायता समूहों को करनी है देखरेख
सामुदायिक शौचालय की देखरेख व सफाई व्यवस्था स्वयं सहायता समूहों के सदस्य करेंगे। शासन के निर्देशानुसार 600 शौचालय स्वयं सहायता समूहों को सौंपे हैं। रखरखाव और सफाई के लिए उनको पैसा भी मिल चुका हैं, फिर भी बड़ी संख्या में शौचालयों का प्रयोग नहीं हो रहा है।
वर्जन
खुलते हैं शौचालय, उपयोग में लाए जाएंगे सभी
जिन शौचालयों को स्वयं सहायता समूहों को सौंपा है, वह रोजाना खुलते हैं। यदि कहीं शौचालय बंद है तो उसे भी इसी सप्ताह शुरू कराया जाएगा। ग्रामीणों को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। निर्माणाधीन शौचालयों कार्य भी जल्द पूरा होगा। - आलोक कुमार शर्मा, जिला पंचायत राज अधिकारी।