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धान के मृदा जनित रोगों पर अंकुश लगाएगी सोलेराइजेशन तकनीक

Mon, 25 Apr 2022 11:15 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 25 Apr 2022 11:15 PM IST
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Soil solar treatment will curb the diseases of paddy
धान नर्सरी की मृदासौर उपचार विधि - फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। धान की फसल को मृदा जनित रोगों से बचाने में मृदा सौर उपचार (सोलेराइजेशन) तकनीक कारगर साबित होगी। इसमें धान की नर्सरी को तैयार करने से पहले उस जमीन को चार से छह सप्ताह तक पॉलिथीन की चादर से ढककर रखा जाता है। जिससे मृदा में मौजूद कई प्रकार के रोगों के विषाणु समाप्त हो जाते हैं। इस भूमि में बनाई जाने वाली नर्सरी में तैयार पौध मृदा जनित रोगों के प्रभाव से मुक्त होती है।
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धान की फसल में मृदा जनित रोगों के चलते 10 से 30 प्रतिशत तक उत्पादन प्रभावित होता है। मृदा सौर उपचार विधि से मृदा जनित रोगों पर धान की नर्सरी में अंकुश लगाया जा सकता है। इस तकनीकी से मृदा में मौजूद विभिन्न बीमारियों के विषाणुओं पर अंकुश लगाया जा सकता है। इस विधि से भूमि को उपचारित करने के बाद इसमें धान की नर्सरी तैयार की जाती है। इस विधि से तैयार नर्सरी की पौध में बीमारियां भी कम लगती है। जिससे कीटनाशकों पर होने वाले खर्च में 20 फीसदी तक कमी आ जाती है।
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मृदा सौर उपचार तकनीक
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी ने बताया कि मृदा सौर उपचार तकनीक से बनाई गई नर्सरी में स्वस्थ पौध तैयार होती है। यह पौध मृदा जनित बीमारियों से लगभग मुक्त होती है। इस तकनीक में धान की नर्सरी बनाए जाने वाले खेत की पहले सिंचाई करते हैं, फिर ओट आने पर इसकी जुताई कर इसे समतल कर दिया जाता है। इसके बाद नर्सरी वाले पूरे खेत को चार से छह सप्ताह तक पॉलिथीन से ढककर उसे किनारों से दबा दिया जाता है। जिससे पॉलिथीन के अंदर की गर्मी बाहर ना निकल सके। इस गर्मी से धान में लगने वाले पौध गलन, निमेटोड, बकानी, झुलसा आदि रोगों के विषाणु समाप्त हो जाते हैं। इसके बाद इसमें नर्सरी तैयार की जाती है।
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धान की नर्सरी तैयार करने की मृदा सौर उपचार विधि मृदा जनित बीमारियों पर नियंत्रण पाने अच्छा तरीका है। कृषि वैज्ञानिक किसानों को इसके प्रति जागरूक कर रहे हैं। इस विधि से धान की फसल में कीटनाशकों के खर्च में भी 20 प्रतिशत तक की कमी आ जाती है। - डॉ. आईके कुशवाहा, प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र
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