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Saharanpur News: जीवांश कार्बन की कमी से बिगड रहा भूमि का स्वास्थ्य

Mon, 30 Oct 2023 12:37 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 30 Oct 2023 12:37 AM IST
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Soil health is deteriorating due to lack of organic carbon
सहारनपुर। भूमि के लगातार दोहन करने और फसल चक्र नहीं अपनाने का मृदा के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ रहा है। इसके चलते भूमि में न सिर्फ जीवांश कार्बन की कमी आ रही है बल्कि नाईट्रोजन, पोटाश और फॉस्फोरस आदि पोषक तत्वों की मात्रा भी घट रही है। इससे जहां फसल की उत्पादकता प्रभावित हो रही है, वहीं उत्पादन लागत में भी वृद्धि हो रही है।
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अच्छी फसल के लिए मृदा को पोषक तत्वों से भरपूर होना चाहिए। लगातार हो रहे दोहन के चलते मृदा में जीवांश कार्बन से लेकर अन्य पोषक तत्वों की कमी आ रही है। इसका असर फसल के उत्पादन पर भी पड़ रहा है। इन पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने के लिए किसानों को अधिक लागत लगानी पड़ रही है। क्षेत्रीय मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में आने वाले मिट्टी के नमूनों की जांच में विभिन्न पोषक तत्वों के साथ ही जीवांश कार्बन की मात्रा में कमी भी पाई गई है। सामान्य स्थिति में भूमि में जीवांश कार्बन की मात्रा 0.8 होनी चाहिए। मृदा परीक्षण में यह मात्रा 0.3 से 0.5 आ रही है। मृदा में नाइट्रोजन, पोटाश और फॉस्फोरस जैसे मुख्य पोषक तत्वों की भी कमी है। इसके चलते भूमि के साथ ही फसलों के उत्पादन पर भी इसका असर पड़ रहा है। कृषि विभाग किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन पर जोर दे रहा है। फसल अवशेषों को मृदा में डी-कंपोज करने से भूमि में जीवांश कार्बन की मात्रा में इजाफा होता है।
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- इससे सुधरेगा भूमि का स्वास्थ्य

- उचित फसल चक्र अपनाएं, दलहनी फसलों को इसमें शामिल करें

- खेत में हरी खाद, कंपोस्ट और गोबर की खाद की पर्याप्त और नियमित प्रयोग करें
- खेत में ही विभिन्न फसल अवशेषों को डी-कंपोज करें
- मृदा परीक्षण की रिपोर्ट के अाधार पर उर्वरकों का प्रयोग करें

- वर्जन
मिट्टी के 75 प्रतिशत नमूनों में मृदा में पोषक तत्वों के साथ ही जीवांश कार्बन की कमी पाई जा रही है। जिससे भूमि का स्वास्थ्य खराब हो रहा है।
इस कमी को पूरा करने के लिए किसानों को फसल चक्र अपनाना चाहिए। साथ ही हरी खाद, कंपोस्ट और गोबर की खाद का नियमित प्रयोग करें। किसान फसल अवशेषों को खेत में ही डी-कंपोज कर मृदा में जीवांश कार्बन की मात्रा को बढ़ा सकते हैं। - रणवीर सिंह, प्रभारी, क्षेत्रीय भूमि परीक्षण प्रयोगशाला।
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