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परिवारों को विघटन से बचाने में सामाजिक योगदान अहम: जिला जज
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वृहद लोक अदालत में 29 पारिवारिक वादों का निपटारा
सहारनपुर। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की तरफ से रविवार को सिविल कोर्ट परिसर में पारिवारिक वादों की वृहद लोक अदालत का आयोजन हुआ। साथ ही संगोष्ठी में नारी सम्मान और सशक्तीकरण पर जोर दिया। वहीं, परिवारों को विघटन से बचाने के लिए सामाजिक जिम्मेदारी का अहसास कराया।
जिला जज सर्वेश कुमार एवं प्रधान न्यायाधीश (परिवार न्यायालय) नरेंद्र कुमार ने मां सरस्वती की मूर्ति पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित करके शुभारंभ किया। इसके पश्चात जनपद न्यायाधीश सर्वेश कुमार ने कहा कि महिलाओं के कार्य का दायरा काफी बढ़ गया है। उनका सभी जगह प्रतिनिधित्व है। उनके प्रति समाज की सोच अच्छी रहनी चाहिए। नारी के प्रति अपराध अक्षम्य है। उन्होंने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या का भी विरोध करना चाहिए। वहीं, परिवार को विघटन से बचाने एवं महिलाओं को न्याय दिलाने में परिवार न्यायालय की अहम भूमिका है।
प्रधान न्यायाधीश (परिवार न्यायालय) नरेंद्र कुमार ने कहा कि पुरुष एवं नारी में कोई भिन्नता नहीं है। दोनों ही अपने दायित्वों का निर्वहन बखूबी कर रहे हैं। शादी भगवान का तोहफा है। उसे टूटने से बचाया जाए। उन्होंने कहा कि न्यायालय के साथ समाज की भी जिम्मेदारी है कि परिवारों को विघटन से बचाएं। इससे ही समाज बचेगा और देश का विकास होगा।
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सिविल जज जेडी/एफटीसी जीनत परवीन एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम गीतिका गर्ग एवं पैनल अधिवक्ता बेबी बीना ने भी विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन सचिव/न्यायिक अधिकारी सुमिता ने किया। पारिवारिक वृहद लोक अदालत में प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय से 22, अतिरिक्त परिवार न्यायाधीश के न्यायालय से पांच, पारिवारिक वाद एवं मध्यस्थता केंद्र से दो वादों का निस्तारण हुआ। इस दौरान सुरेश चंद्र भारती, अहसान हुसैन, ललिता गुप्ता, अनामिका चौहान, कल्पना पांडेय, रामगोपाल, श्वेता नैन, निशा अली, हुमा, शिल्पा जैन, प्रियंका सरन आदि मौजूद रहे।
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सहारनपुर। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की तरफ से रविवार को सिविल कोर्ट परिसर में पारिवारिक वादों की वृहद लोक अदालत का आयोजन हुआ। साथ ही संगोष्ठी में नारी सम्मान और सशक्तीकरण पर जोर दिया। वहीं, परिवारों को विघटन से बचाने के लिए सामाजिक जिम्मेदारी का अहसास कराया।
जिला जज सर्वेश कुमार एवं प्रधान न्यायाधीश (परिवार न्यायालय) नरेंद्र कुमार ने मां सरस्वती की मूर्ति पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित करके शुभारंभ किया। इसके पश्चात जनपद न्यायाधीश सर्वेश कुमार ने कहा कि महिलाओं के कार्य का दायरा काफी बढ़ गया है। उनका सभी जगह प्रतिनिधित्व है। उनके प्रति समाज की सोच अच्छी रहनी चाहिए। नारी के प्रति अपराध अक्षम्य है। उन्होंने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या का भी विरोध करना चाहिए। वहीं, परिवार को विघटन से बचाने एवं महिलाओं को न्याय दिलाने में परिवार न्यायालय की अहम भूमिका है।
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प्रधान न्यायाधीश (परिवार न्यायालय) नरेंद्र कुमार ने कहा कि पुरुष एवं नारी में कोई भिन्नता नहीं है। दोनों ही अपने दायित्वों का निर्वहन बखूबी कर रहे हैं। शादी भगवान का तोहफा है। उसे टूटने से बचाया जाए। उन्होंने कहा कि न्यायालय के साथ समाज की भी जिम्मेदारी है कि परिवारों को विघटन से बचाएं। इससे ही समाज बचेगा और देश का विकास होगा।
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सिविल जज जेडी/एफटीसी जीनत परवीन एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम गीतिका गर्ग एवं पैनल अधिवक्ता बेबी बीना ने भी विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन सचिव/न्यायिक अधिकारी सुमिता ने किया। पारिवारिक वृहद लोक अदालत में प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय से 22, अतिरिक्त परिवार न्यायाधीश के न्यायालय से पांच, पारिवारिक वाद एवं मध्यस्थता केंद्र से दो वादों का निस्तारण हुआ। इस दौरान सुरेश चंद्र भारती, अहसान हुसैन, ललिता गुप्ता, अनामिका चौहान, कल्पना पांडेय, रामगोपाल, श्वेता नैन, निशा अली, हुमा, शिल्पा जैन, प्रियंका सरन आदि मौजूद रहे।