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Saharanpur News: पहाड़ों पर बर्फबारी, हथिनीकुंड में घटा जलस्तर
Fri, 02 Jan 2026 12:56 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Fri, 02 Jan 2026 12:56 AM IST
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हथिनीकुंड बैराज
सहारनपुर। उत्तर प्रदेश और हरियाणा सीमा पर स्थित हथिनीकुंड बैराज पर पानी का संकट गहरा रहा है। करीब एक सप्ताह से बैराज का जलस्तर लगातार घट रहा है, जिससे हरियाणा सहित अन्य राज्यों में सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता प्रभावित हो गई है। हालांकि दिल्ली को अभी पीने के लिए समझौते के अनुसार पूरा पानी दिया जा रहा है।
दरअसल, हथिनीकुंड बैराज से हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान को पेयजल व सिंचाई के लिए पानी की आपूर्ति की जाती है। पांचों राज्यों के लिए प्रति वर्ष पानी की अलग-अलग मात्रा निर्धारित है। इस पानी का इस्तेमाल दिल्ली में पीने के लिए और सिंचाई के लिए, जबकि बाकी राज्यों में केवल सिंचाई की जाती है। हथिनीकुंड बैराज में आने वाला अधिकांश पानी हिमाचल और उत्तराखंड की पहाड़ियों से निकलने वाली नदियों से आता है। हिमाचल और उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी के कारण नदियों में अपेक्षित मात्रा में पानी नहीं पहुंच पा रहा है। इस वजह से बैराज में पानी का संकट हो गया है।
दिल्ली-हरियाणा को हर दिन जरूरत 6000 क्यूसेक, मिल रहा 1870 क्यूसेक
पश्चिमी यमुना नहर के माध्यम से हरियाणा के यमुनानगर, करनाल और पानीपत को पानी मिलता है, जो आगे दिल्ली और राजस्थान तक पहुंचता है, जबकि पूर्वी यमुना नहर से सहारनपुर, शामली और बागपत जैसे जिलों को पानी मिलता है। हथिनीकुंड बैराज के गेज रीडर शेरसिंह ने बताया कि
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हरियाणा और दिल्ली को प्रतिदिन करीब 6000 क्यूसेक पानी की आवश्यकता है, वहां वर्तमान में मात्र 1870 क्यूसेक पानी ही उपलब्ध कराया जा रहा है। हालांकि पानी घटता-बढ़ता रहता है। इसके अलावा विद्युत परियोजनाओं के लिए जहां करीब 5400 क्यूसेक पानी की जरूरत होती है, वहां भी कम पानी मिल रहा है। समझौते के अनुसार, दिल्ली को पूरा पानी देना पड़ता है। ऐसे में हरियाणा में पानी की कमी हो रही है।
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इस तरह होता है पानी का बंटवारा
राज्य मात्रा
हिमाचल प्रदेश 9.378
उत्तर प्रदेश 4.032
हरियाणा 5.73
राजस्थान 1.119
दिल्ली 0.724
नोट : पानी की मात्रा बीसीएम (बिलियन क्यूसेक मीटर) में है।
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अक्सर सर्दी के दिनों में जलस्तर घट जाता है। मार्च-अप्रैल तक जैसे ही मौसम में सुधार होगा तो जलस्तर बढ़ जाएगा। हालांकि पानी के कंट्रोल की जिम्मेदारी हरियाणा सिंचाई विभाग की है। अभी हमारे यहां शामली में पुल निर्माण का कार्य चल रहा है, जिसके चलते हमारे यहां पर पूर्वी यमुना नहर में पानी बंद कराया गया है।
- प्रवीण जोशिया, अधिशासी अभियंता अपर खंड पूर्वी यमुना नहर
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दरअसल, हथिनीकुंड बैराज से हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान को पेयजल व सिंचाई के लिए पानी की आपूर्ति की जाती है। पांचों राज्यों के लिए प्रति वर्ष पानी की अलग-अलग मात्रा निर्धारित है। इस पानी का इस्तेमाल दिल्ली में पीने के लिए और सिंचाई के लिए, जबकि बाकी राज्यों में केवल सिंचाई की जाती है। हथिनीकुंड बैराज में आने वाला अधिकांश पानी हिमाचल और उत्तराखंड की पहाड़ियों से निकलने वाली नदियों से आता है। हिमाचल और उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी के कारण नदियों में अपेक्षित मात्रा में पानी नहीं पहुंच पा रहा है। इस वजह से बैराज में पानी का संकट हो गया है।
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दिल्ली-हरियाणा को हर दिन जरूरत 6000 क्यूसेक, मिल रहा 1870 क्यूसेक
पश्चिमी यमुना नहर के माध्यम से हरियाणा के यमुनानगर, करनाल और पानीपत को पानी मिलता है, जो आगे दिल्ली और राजस्थान तक पहुंचता है, जबकि पूर्वी यमुना नहर से सहारनपुर, शामली और बागपत जैसे जिलों को पानी मिलता है। हथिनीकुंड बैराज के गेज रीडर शेरसिंह ने बताया कि
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हरियाणा और दिल्ली को प्रतिदिन करीब 6000 क्यूसेक पानी की आवश्यकता है, वहां वर्तमान में मात्र 1870 क्यूसेक पानी ही उपलब्ध कराया जा रहा है। हालांकि पानी घटता-बढ़ता रहता है। इसके अलावा विद्युत परियोजनाओं के लिए जहां करीब 5400 क्यूसेक पानी की जरूरत होती है, वहां भी कम पानी मिल रहा है। समझौते के अनुसार, दिल्ली को पूरा पानी देना पड़ता है। ऐसे में हरियाणा में पानी की कमी हो रही है।
इस तरह होता है पानी का बंटवारा
राज्य मात्रा
हिमाचल प्रदेश 9.378
उत्तर प्रदेश 4.032
हरियाणा 5.73
राजस्थान 1.119
दिल्ली 0.724
नोट : पानी की मात्रा बीसीएम (बिलियन क्यूसेक मीटर) में है।
अक्सर सर्दी के दिनों में जलस्तर घट जाता है। मार्च-अप्रैल तक जैसे ही मौसम में सुधार होगा तो जलस्तर बढ़ जाएगा। हालांकि पानी के कंट्रोल की जिम्मेदारी हरियाणा सिंचाई विभाग की है। अभी हमारे यहां शामली में पुल निर्माण का कार्य चल रहा है, जिसके चलते हमारे यहां पर पूर्वी यमुना नहर में पानी बंद कराया गया है।
- प्रवीण जोशिया, अधिशासी अभियंता अपर खंड पूर्वी यमुना नहर