{"_id":"5e45884e8ebc3ee59f2290f0","slug":"silently-opposed-the-medicine-bill-saharanpur-news-mrt4688113144","type":"story","status":"publish","title_hn":"मौन रख किया मेडिसिन बिल का विरोध","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मौन रख किया मेडिसिन बिल का विरोध
विज्ञापन
मौन रख किया मेडिसिन बिल का विरोध
गंगोह। नेशनल कमीशन ऑफ इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन बिल 2019 में योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति को शामिल करवाने को लेकर छात्र-छात्रों एवं शिक्षकों ने उपवास रख मौन धारण कर प्रदर्शन किया।
केंद्र सरकार के आयुष मंत्रालय की ओर से भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को वैधानिक स्वरूप देने के लिए नेशनल कमीशन ऑफ इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन बिल 2019 बिल तैयार किया गया है। लेकिन इसमें योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति को शामिल नहीं किया गया है। इसके विरोध में छात्र-छात्राओं ने प्रदर्शन किया। कुंवर शेखर विजेंद्र मेडिकल कॉलेज ऑफ नेचुरोपैथी एंड यौगिक साइंस के फैकल्टी एवं इंचार्ज डॉ. कपिल मोहन उपाध्याय ने बताया कि योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति पूर्ण तया वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धति है। इस बिल में योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति को शामिल नहीं करने से देश के हजारों विद्यार्थी जोकि बीएनवाईएस का अध्ययन कर रहे हैं उनका भविष्य अंधकार मय हो जाएगा।
विज्ञापन
गंगोह। नेशनल कमीशन ऑफ इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन बिल 2019 में योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति को शामिल करवाने को लेकर छात्र-छात्रों एवं शिक्षकों ने उपवास रख मौन धारण कर प्रदर्शन किया।
केंद्र सरकार के आयुष मंत्रालय की ओर से भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को वैधानिक स्वरूप देने के लिए नेशनल कमीशन ऑफ इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन बिल 2019 बिल तैयार किया गया है। लेकिन इसमें योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति को शामिल नहीं किया गया है। इसके विरोध में छात्र-छात्राओं ने प्रदर्शन किया। कुंवर शेखर विजेंद्र मेडिकल कॉलेज ऑफ नेचुरोपैथी एंड यौगिक साइंस के फैकल्टी एवं इंचार्ज डॉ. कपिल मोहन उपाध्याय ने बताया कि योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति पूर्ण तया वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धति है। इस बिल में योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति को शामिल नहीं करने से देश के हजारों विद्यार्थी जोकि बीएनवाईएस का अध्ययन कर रहे हैं उनका भविष्य अंधकार मय हो जाएगा।
विज्ञापन