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गन्ने को कई लाइलाज रोगों से बचाता है बीज शोधन
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सहारनपुर। गन्ने को कई प्रकार की बीमारियों से बचाने के लिए गन्ना विभाग से लेकर कृषि वैज्ञानिक तक बुवाई से पहले बीज शोधन करने पर जोर दे रहे हैं। उनका कहना है कि बीज जनित रोग गन्ने के उत्पादन पर 20 से 25 प्रतिशत तक असर डालते हैं। बीज शोधन कर इस पर अंकुश लगाया जा सकता है। किसानों को गोष्ठियों के माध्यम से जागरूक किया जा रहा है।
गन्ने की कई बीमारियां बीज जनित होती हैं। रेडरॉट, बिल्ट, ग्राशी शूट आदि बीमारियां गन्ने की उत्पादकता पर विपरीत असर डालती हैं। इन बीमारियों पर अंकुश लगाने के लिए बीज शोधन जरूरी है। इसके लिए किसानों को गोष्ठियों के माध्यम से जागरूक किया जा रहा है। जिला गन्ना अधिकारी कृष्ण मोहन मणि त्रिपाठी ने बताया कि सिर्फ बीज शोधन करके ही किसान गन्ने का कई लाइलाज बीमारियों से बचाव कर सकता है। बीज शोधन के लिए दो ग्राम कार्बेंडिजियम और एक ग्राम थायामिथाक्सम का प्रति लीटर पानी में मिलाकर घोल बना लेना चाहिए। इस घोल में गन्ने के बीज को कम से कम दो घंटे तक तक डुबाकर रखना चाहिए। इसके अलावा एमएचएटी (मॉस्चर हॉट एयर ट्रीटमेंट) मशीन में 54 डिग्री सेल्सियस तापमान पर उपचारित कराना भी फायदेमंद रहता है। जनपद की छह चीनी मिलों में नौ एचएमएटी प्लांट क्रियाशील हैं।
बुवाई से पहले भूमि शोधन भी जरूरी
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी और फसल सुरक्षा विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर आईके कुशवाहा ने बताया कि गन्ने का बढ़िया उत्पादन लेने के लिए बीज के साथ ही भूमि शोधन करना भी जरूरी है। इसके लिए मेटाराइजियम, सूडोमोनाज और ट्राइकोडर्मा जैसे जैव नियंत्रकों को गोबर की पकी हुई खाद में मिलाकर बुवाई से पहले खेत में डालना चाहिए। इसे डालते समय खेत में नमी होनी चाहिए।
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एक नजर में एमएचएटी प्लांट
मिल प्लांट
देवबंद 02
गांगनौली 02
शेरमऊ 02
गागलहेड़ी 01
नानौता 01
सरसावा 01
नोट: गन्ना विभाग के आंकड़ों के अनुसार।
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गन्ने की कई बीमारियां बीज जनित होती हैं। रेडरॉट, बिल्ट, ग्राशी शूट आदि बीमारियां गन्ने की उत्पादकता पर विपरीत असर डालती हैं। इन बीमारियों पर अंकुश लगाने के लिए बीज शोधन जरूरी है। इसके लिए किसानों को गोष्ठियों के माध्यम से जागरूक किया जा रहा है। जिला गन्ना अधिकारी कृष्ण मोहन मणि त्रिपाठी ने बताया कि सिर्फ बीज शोधन करके ही किसान गन्ने का कई लाइलाज बीमारियों से बचाव कर सकता है। बीज शोधन के लिए दो ग्राम कार्बेंडिजियम और एक ग्राम थायामिथाक्सम का प्रति लीटर पानी में मिलाकर घोल बना लेना चाहिए। इस घोल में गन्ने के बीज को कम से कम दो घंटे तक तक डुबाकर रखना चाहिए। इसके अलावा एमएचएटी (मॉस्चर हॉट एयर ट्रीटमेंट) मशीन में 54 डिग्री सेल्सियस तापमान पर उपचारित कराना भी फायदेमंद रहता है। जनपद की छह चीनी मिलों में नौ एचएमएटी प्लांट क्रियाशील हैं।
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बुवाई से पहले भूमि शोधन भी जरूरी
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी और फसल सुरक्षा विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर आईके कुशवाहा ने बताया कि गन्ने का बढ़िया उत्पादन लेने के लिए बीज के साथ ही भूमि शोधन करना भी जरूरी है। इसके लिए मेटाराइजियम, सूडोमोनाज और ट्राइकोडर्मा जैसे जैव नियंत्रकों को गोबर की पकी हुई खाद में मिलाकर बुवाई से पहले खेत में डालना चाहिए। इसे डालते समय खेत में नमी होनी चाहिए।
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देवबंद 02
गांगनौली 02
शेरमऊ 02
गागलहेड़ी 01
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सरसावा 01
नोट: गन्ना विभाग के आंकड़ों के अनुसार।