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Saharanpur News: फीस वृद्धि में स्कूलों की मनमानी, समितियों में झोल
Wed, 02 Apr 2025 12:07 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Wed, 02 Apr 2025 12:07 AM IST
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सहारनपुर। नए सत्र के साथ कई अभिभावकों की टेंशन भी बढ़ गई है। दरअसल, हमेशा की तरह कई स्कूलों ने अपनी फीस में पांच से दस फीसदी तक की वृद्धि कर दी है, जबकि बिना अभिभावकों को सहमत किए स्कूल फीस नहीं बढ़ा सकते हैं।
महानगर के एक प्रतिष्ठित स्कूल ने इस बार आठ से दस फीसदी की वृद्धि अपनी फीस में की है। शिक्षा का अधिकार कानून में स्पष्ट है कि प्रत्येक स्कूल अपने यहां स्कूल प्रबंध समिति बनाएगा, जिसमें अभिभावकों के अलावा, शिक्षक और अन्य लोग शामिल रहेंगे। समिति को गठित करने का मकसद यह है कि स्कूल जो भी निर्णय लेगा उसे पहले समिति के समक्ष रखेगा। उसके बाद उसे लागू किया जाएगा।
समिति का कार्य स्कूल के कामकाज की निगरानी करना, स्कूल विकास योजना तैयार करना, अनुदानों के इस्तेमाल की निगरानी करना, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना भी शामिल है। फीस निर्धारण भी इनमें से एक है। यानी स्कूल यदि फीस में वृद्धि करना चाहते हैं तो उसे समिति के समक्ष रखेंगे। वह समिति को फीस वृद्धि का तर्कपूर्ण कारण बताएंगे। अभिभावकों की सहमति के बाद ही फीस वृद्धि करेंगे, लेकिन अनेक स्कूल प्रबंध समिति में अपने फेवर के अभिभावकों को रखकर उनकी सहमति ले लेते हैं। इसके बाद फीस वृद्धि लागू कर देते हैं, जो सभी अभिभावकों पर लागू होती है।
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लड़ी जाएगी अभिभावकों की लड़ाई
संयुक्त अभिभावक संघ के जिलाध्यक्ष जयवीर राणा का आरोप है कि स्कूल समिति में अपने पक्ष के अभिभावकों को शामिल कर फीस वृद्धि में मनमानी करते आ रहे हैं। मध्यम वर्ग के लिए अपने बच्चों को अच्छे स्कूलों में पढ़ाना मुश्किल हो रहा है। अभिभावक बच्चे को स्कूल से निकाल दिए जाने के डर से विरोध नहीं कर पाते हैं, लेकिन संघ अभिभावकों की लड़ाई लड़ेगा। जल्द ही जिलाधिकारी से मिलकर समस्या रखी जाएगी।
महानगर के एक प्रतिष्ठित स्कूल ने इस बार आठ से दस फीसदी की वृद्धि अपनी फीस में की है। शिक्षा का अधिकार कानून में स्पष्ट है कि प्रत्येक स्कूल अपने यहां स्कूल प्रबंध समिति बनाएगा, जिसमें अभिभावकों के अलावा, शिक्षक और अन्य लोग शामिल रहेंगे। समिति को गठित करने का मकसद यह है कि स्कूल जो भी निर्णय लेगा उसे पहले समिति के समक्ष रखेगा। उसके बाद उसे लागू किया जाएगा।
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समिति का कार्य स्कूल के कामकाज की निगरानी करना, स्कूल विकास योजना तैयार करना, अनुदानों के इस्तेमाल की निगरानी करना, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना भी शामिल है। फीस निर्धारण भी इनमें से एक है। यानी स्कूल यदि फीस में वृद्धि करना चाहते हैं तो उसे समिति के समक्ष रखेंगे। वह समिति को फीस वृद्धि का तर्कपूर्ण कारण बताएंगे। अभिभावकों की सहमति के बाद ही फीस वृद्धि करेंगे, लेकिन अनेक स्कूल प्रबंध समिति में अपने फेवर के अभिभावकों को रखकर उनकी सहमति ले लेते हैं। इसके बाद फीस वृद्धि लागू कर देते हैं, जो सभी अभिभावकों पर लागू होती है।
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लड़ी जाएगी अभिभावकों की लड़ाई
संयुक्त अभिभावक संघ के जिलाध्यक्ष जयवीर राणा का आरोप है कि स्कूल समिति में अपने पक्ष के अभिभावकों को शामिल कर फीस वृद्धि में मनमानी करते आ रहे हैं। मध्यम वर्ग के लिए अपने बच्चों को अच्छे स्कूलों में पढ़ाना मुश्किल हो रहा है। अभिभावक बच्चे को स्कूल से निकाल दिए जाने के डर से विरोध नहीं कर पाते हैं, लेकिन संघ अभिभावकों की लड़ाई लड़ेगा। जल्द ही जिलाधिकारी से मिलकर समस्या रखी जाएगी।