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सौगात कई मिलीं, पर अधूरे हैं महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट

Thu, 18 Mar 2021 11:02 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 18 Mar 2021 11:02 PM IST
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Saugat found many, but incomplete projects are incomplete
सहारनपुर। प्रदेश में भाजपा की सरकार बने चार साल पूरे हो गए। इन चार वर्षों में सहारनपुर में बहुत कुछ बदला, कई सौगात जिले को मिली, लेकिन कई महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट अधूरे रह गए। इनको लेकर पूर्व में की गई घोषणाओं पर अमल नहीं हो सका। बिजली आपूर्ति की स्थिति बेहतर हुई, मगर स्मार्ट मीटरों की गड़बड़ी ने उपभोक्ताओं की नाक में दम कर दिया। सड़कों की स्थिति में सुधार हुआ, लेकिन शहर में सीवर लाइन, पेयजल पाइपलाइन और गैस पाइपलाइन डालने से हुई खोदाई के बाद बेतरतीब छोड़ दी गईं सड़कों पर आवागमन मुश्किल हो गया है। बाईपास बनने से शहर में लगने वाले ट्रैफिक जाम की समस्या काफी हद तक कम हुई। पेश है चार वर्ष में सहारनपुर की स्थिति पर रिपोर्ट...
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अधूरी हैं यह घोषणाएं
-- सिविल टर्मिनल: जिले से हवाई यात्रा शुरू कराने के लिए सिविल टर्मिनल बनाए जाने की घोषणा पूर्व में हुई। इसके लिए 65 एकड़ जमीन सरसावा क्षेत्र में खरीदी गई और एयरपोर्ट प्राधिकरण को हस्तांतरित भी हो गई, लेकिन सिविल टर्मिनल का निर्माण शुरू नहीं हो सका है।
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-- प्लाइवुड इंडस्ट्री: जिले से बड़े पैमाने पर पोपलर की लकड़ी यमुनानगर की मंडी में भेजी जाती है। प्लाइवुड इंडस्ट्री स्थापना की घोषणा पर कोई काम नहीं हो सका।
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-- स्पोर्ट्स कॉलेज: बेहट क्षेत्र में स्पोर्ट्स कॉलेज का निर्माण चल रहा है। कई साल से यह अधूरा है, कभी तकनीकी कारण से काम रुक जाता है तो कभी बजट के अभाव में। स्पोर्ट्स स्टेडियम में सिंथेटिक ट्रैक का निर्माण बजट के अभाव में अधूरा है।
-- पर्यटक स्थल: मां शाकंभरी देवी मंदिर को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जाना है। इसका प्रस्ताव भी शासन भेजा, लेकिन अमल नहीं हुआ।
-- गन्ना मूल्य: 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 14 दिन के भीतर गन्ना मूल्य भुगतान किसानों को दिलाने का वादा किया था, पर ऐसा हो नहीं सका। वर्तमान पेराई सत्र का 271 करोड़ रुपये भुगतान हुआ, जबकि 586 करोड़ रुपये बकाया हैं।
इनमें है सुधार की दरकार
-- एंटी रोमियो स्क्वॉड: 2017 में सरकार बनने पर एंटी रोमियो स्क्वॉड का गठन हुआ। शुरूआत में चेकिंग भी खूब होती थीं, लेकिन अब खानापूर्ति हो रही है।
-- स्वास्थ्य सेवाएं: राजकीय मेडिकल कॉलेज में सुविधाओं का अभाव है, गंभीर मरीजों को पीजीआई चंडीगढ़ अथवा देहरादून रेफर कर दिया जाता है। अस्पतालों में 60 प्रतिशत चिकित्सकों का अभाव है।
-- गोवंश: आवारा गोवंशों के संरक्षण के लिए गोशाला और गोआश्रय स्थलों के निर्माण हुए, लेकिन अब भी शहर और देहात क्षेत्र में आवारा गोवंश खूब घूमते हैं। फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। इसमें और सुधार की दरकार है।
यह मिली सौगात
-- यमुनानगर से गागलहेड़ी तक राष्ट्रीय राजमार्ग 344 का निर्माण हुआ और देहरादून मार्ग फोरलेन का निर्माण पूरा हुआ। इसी प्रोजेक्ट में सहारनपुर बाईपास का निर्माण पूरा होने पर संचालन हुआ। हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश आदि राज्यों के भारी वाहन शहर से बाहर ही निकलने लगे, इस मार्ग पर सफर सुगम हुआ।
-- दिल्ली-सहारनपुर हाईवे के निर्माण का रास्ता साफ हुआ और जनपद की सीमा में नानौता तथा रामपुर मनिहारान के बीच सड़क बनकर तैयार हो गई। अप्रैल 2022 तक निर्माण पूर्ण होगा।
-- राज्य विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए 10 करोड़ रुपये जारी हुए। पुंवारका राजकीय महाविद्यालय भवन को विश्वविद्यालय परिसर में शामिल करने का फैसला हुआ। विश्वविद्यालय के लिए जमीन की खरीद पूरी हुई।

-- पिलखनी औद्योगिक क्षेत्र में वुड सिटी स्थापना के लिए जमीन खरीद हुई और कॉमन फैसिलिटी सेंटर का निर्माण शुरू हुआ। करीब 10 करोड़ रुपये की धनराशि इसके लिए जारी हुई। बांस निर्मित उत्पादों के लिए बेहट में सीएफसी का निर्माण हुआ।
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