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हकीकतनगर के एस ब्लॉक में नहीं पहुंचते निगम के सफाईकर्मी
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राकेश गांधी
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। स्वच्छ सर्वेक्षण 2022 चल रहा है। नगर निगम के अधिकारियों ने सर्वेक्षण में देश में पहला स्थान लाने का लक्ष्य रखा है, लेकिन शहर के कई क्षेत्रों के हालात सफाई व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं। महानगर की महत्वपूर्ण कॉलोनी में से एक हकीकतनगर के एस ब्लॉक में सफाईकर्मी नियमित रूप से नहीं पहुंच रहे हैं, जिसकी वजह से स्थानीय लोग परेशान हैं। जो प्राइवेट सफाईकर्मियों को पैसा देकर गली-मोहल्लों की सफाई कराने को मजबूर हैं।
महानगर की सफाई व्यवस्था पर हर माह दो करोड़ रुपये से अधिक खर्च होते हैं, लेकिन यह सफाई कुछ खास कॉलोनियों और मार्गों तक ही सीमित है। हकीकतनगर के एस ब्लॉक के लोगों ने अमर उजाला से क्षेत्र की सफाई से जुड़ी समस्या की शिकायत की। पूरे ब्लॉक में 65 से अधिक मकान हैं। अमर उजाला की टीम ने क्षेत्र में जाकर लोगों से घर घर जाकर बात की। लोगों ने सफाईकर्मियों के नियमित रूप से नहीं आने का आरोप लगाया। कुछ लोगों का कहना था कि सफाईकर्मी काम करने का पैसा मांगते हैं। गली और मोहल्लों की सफाई वह प्राइवेट सफाईकर्मियों को हर महीने पैसा देकर कराते हैं। चौराहों पर कचरा जमा रहता है, जिसे कई बार वह खुद उठाकर कचरा लेने के लिए आने वाली टीम को देते हैं। घर घर से कचरा लेने वाले कर्मी भी चार से पांच दिन में आते हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि जब वह पार्षद अमित त्यागी से शिकायत करते हैं तभी सफाईकर्मी आकर औपचारिकता निभाकर चले जाते हैं। इसी तरह हर बार पार्षद को फोन करना पड़ता है।
स्थानीय लोगों की बात
एस ब्लॉक निवासी राकेश कुमार गांधी का आरोप है कि पूरे ब्लॉक में गंदगी है। सफाईकर्मी साफ करने के बदले पैसा मांगते हैं। घर से कचरा लेने के लिए आने वाली गाड़ी भी चार से पांच दिन में आती है। इतने दिन तक सभी घरों में कचरा जमा रहता है।
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समीर चौधरी का आरोप है कि सफाईकर्मी कभी कभी आते हैं वह भी मुख्य मार्गों पर खानापूर्ति कर चले जाते हैं। यदि उनको ठीक से साफ करने को कहो तो वह किसी की सुनते नहीं हैं। ऐसे में प्राइवेट सफाईकर्मियों को पैसा देकर मोहल्लों में सफाई कराई जाती है।
75 वर्षीय श्रवण कुमार ने बताया कि उन्होंने मोहल्ले में सफाई के लिए प्राइवेट सफाईकर्मी रखा हुआ है। सभी घर उसको हर माह पैसा देते हैं। ऐसी स्थिति में सहारनपुर को स्वच्छ सर्वेक्षण में टॉप पर नहीं लाया जा सकता है यह अधिकारियों को समझना होगा।
सुनील कुमार का कहना है कि सफाईकर्मी कभी नहीं आते हैं। जब भी पार्षद को फोन करो तो ही सफाईकर्मी आते हैं। ऐसे में सवाल यह है कि क्या प्रतिदिन सफाई के लिए पार्षद को ही फोन करना होगा।
स्वच्छ सर्वेक्षण चल रहा है। ऐसे में पूरे महानगर में विशेष सफाई अभियान चलाया जा रहा है। एस ब्लॉक से कभी इस तरह की शिकायत नहीं मिली है कि सफाईकर्मी नहीं पहुंच रहे हैं। यदि ऐसा है तो यह गंभीर मामला है। संबंधित सफाई निरीक्षक को मौके पर भेजकर दिखवाया जाएगा और नियमित सफाई की व्यवस्था कराई जाएगी।
डॉ. कुनाल जैन, नगर स्वास्थ्य अधिकारी।
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महानगर की सफाई व्यवस्था पर हर माह दो करोड़ रुपये से अधिक खर्च होते हैं, लेकिन यह सफाई कुछ खास कॉलोनियों और मार्गों तक ही सीमित है। हकीकतनगर के एस ब्लॉक के लोगों ने अमर उजाला से क्षेत्र की सफाई से जुड़ी समस्या की शिकायत की। पूरे ब्लॉक में 65 से अधिक मकान हैं। अमर उजाला की टीम ने क्षेत्र में जाकर लोगों से घर घर जाकर बात की। लोगों ने सफाईकर्मियों के नियमित रूप से नहीं आने का आरोप लगाया। कुछ लोगों का कहना था कि सफाईकर्मी काम करने का पैसा मांगते हैं। गली और मोहल्लों की सफाई वह प्राइवेट सफाईकर्मियों को हर महीने पैसा देकर कराते हैं। चौराहों पर कचरा जमा रहता है, जिसे कई बार वह खुद उठाकर कचरा लेने के लिए आने वाली टीम को देते हैं। घर घर से कचरा लेने वाले कर्मी भी चार से पांच दिन में आते हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि जब वह पार्षद अमित त्यागी से शिकायत करते हैं तभी सफाईकर्मी आकर औपचारिकता निभाकर चले जाते हैं। इसी तरह हर बार पार्षद को फोन करना पड़ता है।
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स्थानीय लोगों की बात
एस ब्लॉक निवासी राकेश कुमार गांधी का आरोप है कि पूरे ब्लॉक में गंदगी है। सफाईकर्मी साफ करने के बदले पैसा मांगते हैं। घर से कचरा लेने के लिए आने वाली गाड़ी भी चार से पांच दिन में आती है। इतने दिन तक सभी घरों में कचरा जमा रहता है।
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समीर चौधरी का आरोप है कि सफाईकर्मी कभी कभी आते हैं वह भी मुख्य मार्गों पर खानापूर्ति कर चले जाते हैं। यदि उनको ठीक से साफ करने को कहो तो वह किसी की सुनते नहीं हैं। ऐसे में प्राइवेट सफाईकर्मियों को पैसा देकर मोहल्लों में सफाई कराई जाती है।
75 वर्षीय श्रवण कुमार ने बताया कि उन्होंने मोहल्ले में सफाई के लिए प्राइवेट सफाईकर्मी रखा हुआ है। सभी घर उसको हर माह पैसा देते हैं। ऐसी स्थिति में सहारनपुर को स्वच्छ सर्वेक्षण में टॉप पर नहीं लाया जा सकता है यह अधिकारियों को समझना होगा।
सुनील कुमार का कहना है कि सफाईकर्मी कभी नहीं आते हैं। जब भी पार्षद को फोन करो तो ही सफाईकर्मी आते हैं। ऐसे में सवाल यह है कि क्या प्रतिदिन सफाई के लिए पार्षद को ही फोन करना होगा।
स्वच्छ सर्वेक्षण चल रहा है। ऐसे में पूरे महानगर में विशेष सफाई अभियान चलाया जा रहा है। एस ब्लॉक से कभी इस तरह की शिकायत नहीं मिली है कि सफाईकर्मी नहीं पहुंच रहे हैं। यदि ऐसा है तो यह गंभीर मामला है। संबंधित सफाई निरीक्षक को मौके पर भेजकर दिखवाया जाएगा और नियमित सफाई की व्यवस्था कराई जाएगी।
डॉ. कुनाल जैन, नगर स्वास्थ्य अधिकारी।

समीर चौधरी- फोटो : SAHARANPUR

श्ररण कुमार- फोटो : SAHARANPUR

सुनिल कुमार- फोटो : SAHARANPUR