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सहारनपुर: 'भारत में मुसलमानों का अस्तित्व किसी की मेहरबानी पर निर्भर नहीं', महमूद मदनी ने क्यों कही ये बात

Tue, 03 Nov 2026 01:33 PM IST
Mohd Mustakim अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर
अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर Published by: Mohd Mustakim Updated Tue, 03 Nov 2026 01:33 PM IST
सार

हरियाणा में आयोजित जमीयत उलमा-ए-हिंद की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने मुसलमानों के खिलाफ बढ़ती घटनाओं पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि क्या भारत में मुसलमान होना अपराध हो गया है।

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Saharanpur: 'The existence of Muslims in India does not depend on anyone's benevolence'
मौलान महमूद मदनी - फोटो : एएनआई

विस्तार

जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष एवं पूर्व राज्यसभा सदस्य मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि भारत में मुसलमानों का अस्तित्व किसी की कृपा या मेहरबानी पर निर्भर नहीं है। देश की आजादी में उनके पूर्वजों ने अहम योगदान दिया और बड़े बलिदान दिए हैं। ऐसे में मुसलमानों को अपने ही देश में बाहरी या दूसरे दर्जे का नागरिक बनाने की कोशिश सफल नहीं होगी।
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हरियाणा के नूंह जिला स्थित गांव पिपाका में आयोजित जमीयत उलमा-ए-हिंद की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में मौलाना मदनी ने देश में बढ़ती नफरत की घटनाओं पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि एक साल में नफरत फैलाने वाले भाषणों की 1600 से अधिक घटनाएं सामने आईं, लेकिन इनमें 87 प्रतिशत मामलों में एफआईआर तक दर्ज नहीं हुई। उन्होंने सवाल किया कि क्या भारत में मुसलमान होना अपराध हो गया है।
 
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उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक परंपराओं और संवैधानिक मूल्यों को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। धर्म के नाम पर एक समुदाय के खिलाफ होने वाले अत्याचार को राष्ट्रीय गौरव के रूप में पेश किया जाना चिंताजनक है। इसका असर केवल अल्पसंख्यकों तक सीमित नहीं है, बल्कि दलितों, वंचितों और कानून के शासन की व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि खतरे में बहुसंख्यक समुदाय नहीं, बल्कि सत्ता और राजनीतिक पदों की भूख है।
 
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वक्फ संपत्तियों के लिए स्वतंत्र संस्था की मांग
गवर्निंग काउंसिल की बैठक में वक्फ (संशोधन) अधिनियम-2025 के मौजूदा स्वरूप पर आपत्ति जताते हुए केंद्र सरकार से इस पर पुनर्विचार करने की मांग की गई। काउंसिल ने वक्फ संपत्तियों के संरक्षण और बेहतर प्रबंधन के लिए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की तर्ज पर स्वतंत्र एवं अधिकार संपन्न संस्था गठित करने का प्रस्ताव पारित किया। इसके अलावा नफरत से जुड़े अपराधों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित करने और प्रत्येक जिले में एसपी स्तर का नोडल अधिकारी नियुक्त करने की मांग की गई।

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