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बेटियां पढ़ाने में पीछे रह गया सहारनपुर

Sun, 19 Jun 2016 01:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर Updated Sun, 19 Jun 2016 01:39 AM IST
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बेटी बचाओ, बेटी बचाओ योजना फेल हो गई। सहारनपुर में न तो बेटियां बचाने में लोग जागरूक हो सके और न ही बेटियों को पढ़ाने में ही आगे आए। अफसरशाही बेशक कागजों में बेटियों को पढ़ाने के लिए पूरे प्रयास के दावे कर रही हो, लेकिन आज भी जिले के लोग बेटियों को पढ़ाने के लिए तैयार नहीं हैं। शिक्षा विभाग के सर्व शिक्षा अभियान की आंगनबाड़ी के ताजा सर्वे ने पोल खोल कर रख दी हैं। 
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मई माह के में 11 से 14 वर्ष की 35466 बेटियां हैं जो स्कूल नहीं जा रहीं हैं। यह सर्वे आंगनबाड़ी ने अनुपूरक पुष्टाहार वितरण के लिए किया है। इतनी अधिक संख्या में बालिकाएं स्कूल नहीं जा रही हैं। इससे यह साबित हो रहा है कि या तो सर्वे में कहीं न कहीं चूक हुई है या फिर शिक्षा विभाग के अधिकारी कागजों में ही सर्वे करा रहे हैं। 
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स्कूल न जाने वाली बेटियां
ब्लाक                   संख्या 
सरसावा                 4022
नकुड़                   1340
मुजफ्फराबाद            4208
नागल                   2595 
बलियाखेड़ी              1909
देवबंद                   1347
रामपुर मनिहारन          500
पुंवारका                 3367
नानौता                   904
साढ़ौली कदीम           4288
गंगोह                   8889 
नगर निगम क्षेत्र         2097
 कुल                  35466
(आंकड़े जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय के अनुसार) 

कौन सा सर्वे? 
जिले में 6 से 14 साल के आउट ऑफ स्कूल सर्वे में बच्चों की संख्या सिर्फ 199 ही आई है। जबकि कुछ बच्चे बीच में भी स्कूल छोड़ देते हैं। उनकी संख्या भी सैकड़ों में ही है लेकिन सिर्फ बालिकाएं ही इतनी अधिक संख्या में स्कूल नहीं जा रही हैं, यह कौन सा सर्वे है, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना में सहारनपुर इसी वर्ष शामिल हुआ है। 
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- बीपी सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी 

आंगनबाड़ी ने घर-घर जाकर किया सर्वे
आंगनबाड़ी एक-एक घर से जुड़ी हैं। उन्होंने सर्वे कर सूची तैयार की है। उनका हर माह सत्यापन करके पुष्टाहार वितरित कर रही हैं। यह संख्या पूरी तरह से सही है।

- आशा त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम अधिकारी 

दोनों विभागों के आंकड़ों की होगी समीक्षा
जिले में लगभग चार लाख बच्चे हैं। शिक्षा विभाग के आंकड़ों पर संदेह है, लेकिन आंगनबाड़ी के आंकड़ों पर भी पूरा विश्वास नहीं है। दोनों विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर समीक्षा कराई जाएगी। 
- पवन कुमार, जिलाधिकारी 
 
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