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यूपी: मस्जिद ध्वस्तीकरण पर भड़के इमरान मसूद, बोले-मस्जिद तोड़ी नहीं शहीद की गई, संविधान पर चल रहा हथाैड़ा

Sat, 05 Sep 2026 11:16 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: Dimple Sirohi Updated Sat, 05 Sep 2026 11:16 AM IST
सार

सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्तीकरण के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने प्रशासन पर कानूनी प्रक्रिया और संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि मामले में कानून के दायरे में लड़ाई जारी रहेगी।

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Saharanpur Mosque Demolition: Leader Alleges Violation of Constitution, Says Legal Battle Will Continue
इमरान मसूद, कांग्रेस सांसद - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्तीकरण का मामला अब सियासी और कानूनी विवाद में बदलता नजर आ रहा है। मस्जिद गिराए जाने के बाद कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि तमाम दस्तावेज और जानकारी उपलब्ध कराने के बावजूद मस्जिद को गिरा दिया गया। उनके मुताबिक यह सिर्फ मस्जिद का मामला नहीं, बल्कि संविधान में दिए गए अधिकारों का सवाल है।

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मस्जिद की मिल्कियत को लेकर किया दावा
इमरान मसूद ने दावा किया कि संबंधित मस्जिद 1911 से पहले की है और आज भी इसके मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि मस्जिद की मिल्कियत वहीद खान और याकूब खान के नाम बताई गई है। उनका आरोप है कि प्रशासन को तमाम जानकारी और दस्तावेज उपलब्ध कराने के बावजूद कार्रवाई की गई।

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सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश पर उठाए सवाल
बयान में सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश का भी जिक्र किया गया। नेता के मुताबिक आदेश में 30 दिन का समय दिया गया था, लेकिन 24 तारीख को इस मामले में स्टे हो गया था और करीब 22 दिन की अवधि अभी बाकी थी। इसके बावजूद मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया।

वक्फ को पार्टी नहीं बनाने का आरोप
उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान वक्फ से जुड़े कानूनी प्रावधानों का भी ध्यान नहीं रखा गया। उनका कहना है कि वक्फ को मामले में पार्टी नहीं बनाया गया। उन्होंने वक्फ-ए-यूजर समेत अन्य कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए दावा किया कि इन पहलुओं की भी अनदेखी की गई।

यह भी पढ़ें: सहारनपुर में मस्जिद पर चला बुलडोजर: कलेक्ट्रेट के पांचों गेट सील, आरएएफ समेत भारी पुलिस बल तैनात; पूरी कहानी

'खसरा मौजूदा स्थिति बताता है'
इमरान मसूद के बयान में जमीन के खसरा रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठाया गया। नेता ने कहा कि खसरा केवल जमीन की मौजूदा स्थिति बताता है और उसके आधार पर मालिकाना हक पूरी तरह साबित नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी आधार पर जमीन को लेकर प्रशासनिक निष्कर्ष निकाला गया।

रात में कार्रवाई का आरोप
नेता ने आरोप लगाया कि रातों-रात पूरे इलाके को चारों तरफ से घेर लिया गया। उनका दावा है कि लोगों को घरों में रहने के लिए मजबूर किया गया और इसी दौरान मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया। उन्होंने कहा कि मौके पर पार्टी के नेता और एमएलसी भी मौजूद थे और पूरी रात इलाके में स्थिति पर नजर रखते रहे।

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'हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेंगे'
उन्होंने कहा कि इस मामले में कानूनी लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जहां तक जरूरत होगी, वहां तक कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी। उन्होंने कार्रवाई को संविधान और संवैधानिक अधिकारों से जोड़ते हुए कहा कि यह केवल एक धार्मिक स्थल का मामला नहीं है।

'आज हमारे लिए, कल दूसरों के लिए'
बयान में उन्होंने कहा कि किसी धार्मिक स्थल के गिराए जाने से किसी भी समुदाय के व्यक्ति को खुश नहीं होना चाहिए। उन्होंने इसे सहारनपुर के लोगों के लिए 'काला दिन' बताते हुए कहा कि अगर आज किसी एक समुदाय के धार्मिक स्थल के साथ ऐसा होता है तो भविष्य में यही कार्रवाई दूसरों के खिलाफ भी हो सकती है।

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