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Saharanpur: जमीन पर कब्जा दिलाने गई पुलिस और राजस्व टीम पर हमला, सिपाही और महिला सहित चार घायल

Sat, 16 May 2026 12:13 AM IST
Mohd Mustakim अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर
अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर Published by: Mohd Mustakim Updated Sat, 16 May 2026 12:13 AM IST
सार

बानुखेड़ी गांव में अनुसूचित जाति के लोगों और जाट समाज के लोगों के बीच जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। पुलिस और राजस्व विभाग की टीम 45 बीघा जमीन पर कब्जा दिलाने गई थी, तभी विवाद भड़क उठा।

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Saharanpur: Attack on police and revenue team that had gone to take possession of the land, four injured
गांव में संघर्ष। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सहारनपुर के बानुखेड़ी गांव में करीब 45 बीघा जमीन पर कब्जा दिलाने गई राजस्व और पुलिस टीम को ग्रामीणों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने खेत की जुताई करा रही टीम पर पथराव कर दिया, जिस पर पुलिस ने लाठियां चलाकर ग्रामीणों की भीड़ को दौड़ाया। संघर्ष में एक सिपाही और ग्रामीणों की तरफ से महिला सहित चार लोग घायल हुए हैं। घायल सिपाही को उपचार के लिए सीएचसी में भर्ती कराया गया है।
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Saharanpur: Attack on police and revenue team that had gone to take possession of the land, four injured
लाठी फटकारती पुलिस। - फोटो : अमर उजाला
गंगोह कोतवाली क्षेत्र के गांव बानुखेड़ी में जमीन को लेकर काफी समय से विवाद चल रहा है। अनुसूचित जाति के लोगों के अनुसार 1987 में 152 लोगों को पट्टे आवंटित किए गए थे। इसी जमीन को लेकर दूसरे पक्ष जाट समाज के लोगों ने अपना दावा कर दिया। इसके चलते इस जमीन को हरियाणा के किसानों को बेच दिया गया।
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शुक्रवार को जमीन पर कब्जा दिलवाने के लिए प्रशासन भारी पुलिस बल और राजस्व टीम के साथ मौके पर पहुंचा। उन्होंने खेत में जमीन की ट्रैक्टर से जुताई शुरू कर दी। इसकी खबर गांव में अनुसूचित समाज के लोगों को लगी तो बड़ी संख्या में ग्रामीण लाठी-डंडों लेकर मौके पर पहुंच गए। उन्होंने जमीन पर कब्जे का विरोध किया। मामला बढ़ने पर ग्रामीणों ने पुलिस टीम पर पथराव कर दिया। इसे बाद पुलिस ने लाठियां लेकर ग्रामीणों को दौड़ाया।
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संघर्ष में एक सिपाही रविश कुमार सिर में ईट लगने पर घायल हो गया, जबकि ग्रामीणों में श्याम कुमार, उसकी पत्नी रीता, दीपक और संदीप आदि को चोटें आई हैं। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल भर्ती कराया गया। काफी देर तक गांव में अफरा तफरी का माहौल रहा। इसके बाद पुलिस और राजस्व टीम बिना कब्जा दिलाए लौट गई।

संघर्ष की घटना के बाद आजाद समाज पार्टी जिलाध्यक्ष सचिन खुराना, टिंकू राजा, रवि गौतम, नौशाद भाटी, एडवोकेट मेहताब अली, कादिर अली आदि मौके पर पहुंचे। उन्होंने पुलिस प्रशासन पर दमनकारी नीति अपनाने का आरोप लगाया है। अनुसूचित जाति के लोगों का कहना था कि उनके साथ एक माह में कई बार मारपीट हो चुकी है लेकिन पुलिस उनकी सुनवाई करने की बजाए दूसरे पक्ष की तरफदारी कर रही है।
 

ये बोले सीओ
ग्रामीणों का आरोप गलत है। नायब तहसीलदार ने उनसे फोर्स मांगा था। मौके पर जमीन को कब्जा मुक्त कराने के दौरान कुछ लोगों ने विरोध किया जिन्हें पुलिस ने भगा दिया। लाठीचार्ज की बात गलत है।
- अशोक सिसौदिया, सीओ
 
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