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रूस-यूक्रेन युद्ध से बढ़ी वुड कार्विंग निर्यातकों की परेशानी
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निर्यातक मौहम्मद अरसद सैफी
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद से जनपद के दुनिया भर में विख्यात वुड कार्विंग उत्पादकों के निर्यातक टेंशन में हैं। उनका मानना है कि यदि युद्ध लंबा चला या फिर इसमें नाटो सेनाओं की भागीदारी हुई तो काष्ठ हस्तशिल्प का निर्यात प्रभावित होना तय है। इसमें सबसे अधिक झटका यूरोपीय देशों को होने वाले निर्यात पर पड़ने की संभावना है। यहां से होने वाले कुल निर्यात का 20 से 25 प्रतिशत यूरोपीय देशों में होता है। निर्यातकों का कहना है कि यूरोपीय देशों में होने वाले निर्यात का बीमा कवर करने से भी कंपनियां हाथ खींच रही है।
जनपद के काष्ठ हस्तशिल्प उत्पादों को पूरी दुनिया में धूम है। यहां पर साढ़े पांच सौ से अधिक काष्ठ हस्तशिल्प उत्पाद तैयार करने की इकाइयां हैं। इस कारोबार से करीब डेढ़ लाख लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर जुड़े हैं। जनपद के काष्ठ हस्तशिल्प उत्पादों का सालाना कारोबार करीब 1400 से 1500 करोड़ रुपये से अधिक है। यहां से निर्यात 900 से 1000 करोड़ रुपये का होता है। यूक्रेन युद्ध से निर्यातक टेंशन में हैं। क्योंकि विदेशी ग्राहकों में वुड कार्विंग उत्पादों का ऑर्डर देने में उत्साह दिखायी नहीं दे रहा है।
यूरोप व अमेरिका में होता है अधिक निर्यात
-- वुड कार्विंग उत्पादों का निर्यात दुनिया भर के कई देशों में होता है। इसमें करीब 50 प्रतिशत अमेरिका, 20 से 25 फीसदी यूरोपीय देशों और 10 से 15 प्रतिशत मध्य पूर्व के कई देशों की हिस्सेदारी है। इनमें फ्रांस, जर्मनी, इटली, फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम, स्वीडन, आस्ट्रेलिया, डेनमार्क, नीदरलैंड, दक्षिणी अफ्रीका, दुबई, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब आदि देश शामिल हैं। रूस और यूक्रेन में भी 60 से 100 करोड़ रुपये के उत्पादों का निर्यात होता है।
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निर्यातक बोले
कंपनी ने बीमा कवर से हाथ खींचे
बीमा कंपनी ने भी यूरोप में निर्यात होने वाले काष्ठ हस्तशिल्प का बीमा कवर करने से हाथ खड़े कर दिए हैं, जबकि यह दुर्घटनाओं से लेकर निर्यातकों को हर हाल में पूंजी दिलाने तक की गारंटी देती है। उसने अब यह सुविधा स्थगित कर दी है। इससे यूक्रेन युद्ध से पैदा हुई स्थिति की गंभीरता स्पष्ट हो रही है। - आरिफ खान, महासचिव, हैंडीक्राफ्ट्स आर्टिजन एंड एक्सपोर्टस एसोसिएशन।
यूक्रेन युद्ध से निर्यात पर विपरीत असर
रूस के यूक्रेन पर हुए हमले से काष्ठ हस्तशिल्प उत्पादों के निर्यात पर विपरीत असर पड़ रहा है। सहारनपुर से अमेरिका और यूरोपीय देशों में वुड कार्विंग उत्पादों का अधिकतर निर्यात होता है। यूक्रेन युद्ध से वहां से मिलने वाले निर्यात आर्डर प्रभावित हो रहे हैं। युद्ध किस करवट बैठेगा विदेशी ग्राहकों की नजर इस पर लगी है। - साबिर अली, निर्यातक।
ट्रेड फेयर के बाद स्थिति होगी स्पष्ट
ग्रेटर नोएडा में अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले का आयोजन 30 मार्च से तीन अप्रैल तक होगा। इसमें कितने विदेशी ग्राहक शामिल होते और वे ऑर्डर कितना देते हैं, इससे वुड कार्विंग उत्पादों के निर्यात की स्थिति स्पष्ट होगी, लेकिन युद्ध के चलते कच्चे माल के महंगा होने की आशंका है। जिसका वुड कार्विंग उद्योग पर विपरीत असर पड़ेगा। - प्रमोद सडाना, चैप्टर चेयरमैन आईआईए एवं निर्यातक।
नए ऑर्डर हो रहे प्रभावित
रूस-यूक्रेन जंग के बाद से विदेशी ग्राहकों में उत्साह नहीं दिख रहा है। इसका असर यूरोपीय देशों से आने वाले ऑर्डरों पर पड़ रहा है। ग्राहकों की निगाह अभी युद्ध पर लगी है। युद्ध नहीं रुका या फिर इसमें नाटो की सेनाओं में भागीदारी की तो वुड कार्विंग निर्यात पर इसका सीधा असर पडे़गा।
- मोहम्मद अरशद सैफी, निर्यातक।
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जनपद के काष्ठ हस्तशिल्प उत्पादों को पूरी दुनिया में धूम है। यहां पर साढ़े पांच सौ से अधिक काष्ठ हस्तशिल्प उत्पाद तैयार करने की इकाइयां हैं। इस कारोबार से करीब डेढ़ लाख लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर जुड़े हैं। जनपद के काष्ठ हस्तशिल्प उत्पादों का सालाना कारोबार करीब 1400 से 1500 करोड़ रुपये से अधिक है। यहां से निर्यात 900 से 1000 करोड़ रुपये का होता है। यूक्रेन युद्ध से निर्यातक टेंशन में हैं। क्योंकि विदेशी ग्राहकों में वुड कार्विंग उत्पादों का ऑर्डर देने में उत्साह दिखायी नहीं दे रहा है।
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यूरोप व अमेरिका में होता है अधिक निर्यात
-- वुड कार्विंग उत्पादों का निर्यात दुनिया भर के कई देशों में होता है। इसमें करीब 50 प्रतिशत अमेरिका, 20 से 25 फीसदी यूरोपीय देशों और 10 से 15 प्रतिशत मध्य पूर्व के कई देशों की हिस्सेदारी है। इनमें फ्रांस, जर्मनी, इटली, फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम, स्वीडन, आस्ट्रेलिया, डेनमार्क, नीदरलैंड, दक्षिणी अफ्रीका, दुबई, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब आदि देश शामिल हैं। रूस और यूक्रेन में भी 60 से 100 करोड़ रुपये के उत्पादों का निर्यात होता है।
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निर्यातक बोले
कंपनी ने बीमा कवर से हाथ खींचे
बीमा कंपनी ने भी यूरोप में निर्यात होने वाले काष्ठ हस्तशिल्प का बीमा कवर करने से हाथ खड़े कर दिए हैं, जबकि यह दुर्घटनाओं से लेकर निर्यातकों को हर हाल में पूंजी दिलाने तक की गारंटी देती है। उसने अब यह सुविधा स्थगित कर दी है। इससे यूक्रेन युद्ध से पैदा हुई स्थिति की गंभीरता स्पष्ट हो रही है। - आरिफ खान, महासचिव, हैंडीक्राफ्ट्स आर्टिजन एंड एक्सपोर्टस एसोसिएशन।
यूक्रेन युद्ध से निर्यात पर विपरीत असर
रूस के यूक्रेन पर हुए हमले से काष्ठ हस्तशिल्प उत्पादों के निर्यात पर विपरीत असर पड़ रहा है। सहारनपुर से अमेरिका और यूरोपीय देशों में वुड कार्विंग उत्पादों का अधिकतर निर्यात होता है। यूक्रेन युद्ध से वहां से मिलने वाले निर्यात आर्डर प्रभावित हो रहे हैं। युद्ध किस करवट बैठेगा विदेशी ग्राहकों की नजर इस पर लगी है। - साबिर अली, निर्यातक।
ट्रेड फेयर के बाद स्थिति होगी स्पष्ट
ग्रेटर नोएडा में अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले का आयोजन 30 मार्च से तीन अप्रैल तक होगा। इसमें कितने विदेशी ग्राहक शामिल होते और वे ऑर्डर कितना देते हैं, इससे वुड कार्विंग उत्पादों के निर्यात की स्थिति स्पष्ट होगी, लेकिन युद्ध के चलते कच्चे माल के महंगा होने की आशंका है। जिसका वुड कार्विंग उद्योग पर विपरीत असर पड़ेगा। - प्रमोद सडाना, चैप्टर चेयरमैन आईआईए एवं निर्यातक।
नए ऑर्डर हो रहे प्रभावित
रूस-यूक्रेन जंग के बाद से विदेशी ग्राहकों में उत्साह नहीं दिख रहा है। इसका असर यूरोपीय देशों से आने वाले ऑर्डरों पर पड़ रहा है। ग्राहकों की निगाह अभी युद्ध पर लगी है। युद्ध नहीं रुका या फिर इसमें नाटो की सेनाओं में भागीदारी की तो वुड कार्विंग निर्यात पर इसका सीधा असर पडे़गा।
- मोहम्मद अरशद सैफी, निर्यातक।

निर्यातक साबिर अली- फोटो : SAHARANPUR

निर्यातक प्रमोद सड़ाना- फोटो : SAHARANPUR

वुड कार्विंग का झूला- फोटो : SAHARANPUR

निर्यातक आरिफ खान- फोटो : SAHARANPUR