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Saharanpur News: स्वाभिमान रैली के बहाने रालोद का पश्चिमी यूपी में शक्ति प्रदर्शन

Fri, 04 Sep 2026 01:20 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर Updated Fri, 04 Sep 2026 01:20 AM IST
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RLD's show of strength in Western UP via the 'Swabhiman Rally'
सहारनपुर। प्रदेश में अभी विधानसभा चुनाव दूर हैं, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी जमीन तलाशनी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में रामपुर मनिहारान के गोचर कृषि इंटर कॉलेज मैदान में आयोजित स्वाभिमान रैली से रालोद ने सियासी हलचल बढ़ा दी। रैली में उमड़ी भीड़ के जरिए रालोद ने सिर्फ अपनी ताकत नहीं दिखाई, बल्कि सहारनपुर से पश्चिमी यूपी की राजनीति में अपनी हिस्सेदारी का दावा भी पेश किया। मंच से सपा पर हमले और अखिलेश यादव के बयान का पलटवार इस शक्ति प्रदर्शन को और राजनीतिक बना गया। इस रैली को 2027 के चुनाव का आगाज भी माना जा रहा है।
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रालोद अध्यक्ष व केंद्रीय राज्यमंत्री जयंत चौधरी के लिए भी यह रैली कई मायनों में महत्वपूर्ण रही। मैदान में जुटी भीड़ ने पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह भरा तो जयंत चौधरी भी इससे गदगद नजर आए। रैली के लिए सहारनपुर के साथ पश्चिमी यूपी के कई जिलों से पदाधिकारी और कार्यकर्ता पहुंचे। इससे पार्टी ने कार्यक्रम को स्थानीय आयोजन के बजाय शक्ति प्रदर्शन का रूप देने की कोशिश की।
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इस रैली की पटकथा कहीं न कहीं सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के बयान को जोड़कर भी देखी जा रही है। अखिलेश यादव के बयान के बाद सपा नेताओं की ओर से रालोद को बड़ौत-बागपत तक सीमित बताने की चर्चा सामने आई थी। सहारनपुर में रालोद के प्रभाव पर भी सवाल उठाए गए। इसके जवाब में रामपुर मनिहारान में बड़ी भीड़ जुटाकर जयंत चौधरी के नेतृत्व में रालोद ने अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराई। मंच से सपा पर निशाना साधते हुए रालोद नेताओं ने छह सितंबर को प्रस्तावित अखिलेश यादव की रैली स्थगित होने पर भी चुटकी ली। राजनीतिक संदेश साफ था कि रालोद को पश्चिमी यूपी के एक सीमित इलाके की पार्टी मानना सही नहीं होगा।
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-- रैली से गुर्जर समीकरण पर भी नजर
गोचर कृषि इंटर कॉलेज प्रबंध समिति की तरफ से बुलाई गई इस रैली में गुर्जर समाज को साधने की कोशिश भी रही। रालोद ने किसान, सामाजिक सम्मान और चौधरी अजित सिंह की विरासत को प्रमुखता देकर इस वर्ग तक पहुंच बनाने का प्रयास किया। दरअसल, 2027 में रालोद के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने प्रभाव का विस्तार करने की होगी। पार्टी यदि जाट-किसान आधार के साथ गुर्जर और अन्य ग्रामीण वर्गों को जोड़ने में सफल होती है तो पश्चिमी यूपी में उसका राजनीतिक प्रभाव बढ़ सकता है।

आने वाले समय में दिखेगा चुनावी समीकरण
इस रैली से रालोद ने शक्ति प्रदर्शन कर अपनी राजनीतिक क्षमता का संकेत जरूर दिया है, लेकिन चुनावी राजनीति में असली परीक्षा आने वाले दिनों में होगी। रैली में जुटी भीड़ को बूथ स्तर के संगठन और वोट में बदलना पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। अब यह शक्ति प्रदर्शन 2027 के चुनावी समीकरण में कितना असर डालता है, इसकी दिशा आने वाले महीनों की राजनीति तय करेगी।
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