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नगर निगम के शौचालय को बना दिया भोजनालय
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Sun, 05 Mar 2017 11:59 PM IST
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वह शौचालय जो अब बन गया भोजनालय।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर को स्मार्ट सिटी बनाने के प्रयास में जुटे नगर निगम के अफसर खुद स्मार्ट बनने को तैयार नहीं हैं। जानकारी हैरानी होगी कि कोर्ट रोड पर दीवानी कचहरी के बाहर बना शौचालय भोजनालय के रूप में इस्तेमाल हो रहा है।
शौचालय पर कब्जा किया गया है या फिर निगम ने उसे किराये पर दिया है। यह जांच का विषय है। हैरान करने वाली बात यह है कि नगर निगम के अधिकारी इससे अनजान हैं। शौचालय चालू न हो पाने की स्थिति में लोग खुले में लघु शंका करने को मजबूर हैं।
स्मार्ट सिटी योजना के तहत सहारनपुर द्वारा पहले चरण में तैयार किए गए प्रस्ताव में नंबर बढ़ाने के लिए नगर निगम ने एक एनजीओ को शहर में कई जगहों पर आधुनिक सार्वजनिक शौचालय बनवाने की अनुमति दी थी।
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इनमें एक शौचालय दीवानी कचहरी के बाहर भी बनाया गया था। शर्त यह थी कि नगर निगम इस शौचालय पर शुल्क वसूलने के लिए अपना कर्मचारी रखेगा, जबकि शौचालय के बाहर की दीवारों पर लगने वाले फ्लैक्स और होर्डिंग्स का किराया एनजीओ वसूलेगा।
तब से नगर निगम शौचालयों को चालू नहीं करा सका है। हैरत की बात यह है कि वर्तमान में इस शौचालय का इस्तेमाल भोजनालय के रूप में हो रहा है।
यानी यह शौचालय किराये पर दे दिया गया है।
जो इसके बाहर रेहड़ी पर भोजन तैयार करता है और शौचालय का इस्तेमाल भी अपना कच्चा सामान और बर्तन रखने में करता है।
शौचालय का इस्तेमाल शौचालय के रूप में न होकर किसी अन्य काम के लिए होना गंभीर मामला है। इसमें नगरायुक्त से जवाब मांगा जाएगा। यदि शीघ्र ही शौचालय खाली कराकर चालू न कराया गया तो कार्रवाई भी की जाएगी।
- एमपी अग्रवाल, कमिश्नर।
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शौचालय पर कब्जा किया गया है या फिर निगम ने उसे किराये पर दिया है। यह जांच का विषय है। हैरान करने वाली बात यह है कि नगर निगम के अधिकारी इससे अनजान हैं। शौचालय चालू न हो पाने की स्थिति में लोग खुले में लघु शंका करने को मजबूर हैं।
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स्मार्ट सिटी योजना के तहत सहारनपुर द्वारा पहले चरण में तैयार किए गए प्रस्ताव में नंबर बढ़ाने के लिए नगर निगम ने एक एनजीओ को शहर में कई जगहों पर आधुनिक सार्वजनिक शौचालय बनवाने की अनुमति दी थी।
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इनमें एक शौचालय दीवानी कचहरी के बाहर भी बनाया गया था। शर्त यह थी कि नगर निगम इस शौचालय पर शुल्क वसूलने के लिए अपना कर्मचारी रखेगा, जबकि शौचालय के बाहर की दीवारों पर लगने वाले फ्लैक्स और होर्डिंग्स का किराया एनजीओ वसूलेगा।
तब से नगर निगम शौचालयों को चालू नहीं करा सका है। हैरत की बात यह है कि वर्तमान में इस शौचालय का इस्तेमाल भोजनालय के रूप में हो रहा है।
यानी यह शौचालय किराये पर दे दिया गया है।
जो इसके बाहर रेहड़ी पर भोजन तैयार करता है और शौचालय का इस्तेमाल भी अपना कच्चा सामान और बर्तन रखने में करता है।
शौचालय का इस्तेमाल शौचालय के रूप में न होकर किसी अन्य काम के लिए होना गंभीर मामला है। इसमें नगरायुक्त से जवाब मांगा जाएगा। यदि शीघ्र ही शौचालय खाली कराकर चालू न कराया गया तो कार्रवाई भी की जाएगी।
- एमपी अग्रवाल, कमिश्नर।