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स्टेम सेल को प्रभावी बनाने में लगातार चल रहा अनुसंधान
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सरसावा (सहारनपुर)। विजिटर प्रोफेसर डॉ. एलिजा चक्रवर्ती ने कहा स्टेम सेल को प्रभावी बनाने के लिए लगातार अनुसंधान चल रहे हैं। उन्होंने फैकेल्टी को विश्व एवं भारत में स्टेम सेल के क्षेत्र में हो रहे कार्यों के विषय में जानकारी उपलब्ध कराई।
सोमवार को राजकीय मेडिकल कॉलेज के सभागार में स्टेम सेल को लेकर आहूत गोष्ठी में विजिटर्स प्रोफेसर के रूप में मेरठ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोफेसर डॉ. एलिजा चक्रवर्ती ने फैकल्टी और सीनियर एमबीबीएस छात्रों के साथ जानकारी साझा की। डॉ. चक्रवर्ती ने बताया स्टेम सेल शारीरिक विकास में योगदान देता है। कुछ जीव जंतुओं में स्टेम सेल की ऐसी क्षमता होती है कि यदि उनके शरीर का कोई अंग भंग हो जाए तो वो स्वयं विकसित हो जाता है। उन्होंने बताया यदि छिपकली की पूंछ कट जाती है तो कुछ समय पश्चात स्वयं विकसित हो जाती है। ये स्टेम सेल के कारण ही संभव होता है। इसी प्रकार मानव शरीर के प्रत्येक अंग में स्टेम सेल होता है परंतु इतना प्रभावी नहीं होता कि वो स्वयं विकसित हो जाए। हालांकि स्टेम सेल में विभाजन एवं विकास की अपार क्षमता होती है और इसी आधार पर जेनेटिक इंजीनियरिंग को समझने का व्यापक रूप से प्रयास किया जा रहा है। इसके विषय में भारत सहित पूरे विश्व में लगातार खोज एवं अनुसंधान चल रहा है कि मानव शरीर के लिए स्टेम सेल को किस प्रकार प्रभावी बनाया जा सके। इसमें प्राचार्य डॉ. अरविंद त्रिवेदी, डॉ. मनोज, डॉ. राकेश, डॉ. सुशील, डॉ. दुर्गेश तथा अन्य फैकल्टी एवं बड़ी संख्या में एमबीबीएस के सीनियर छात्र मौजूद रहे।
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सोमवार को राजकीय मेडिकल कॉलेज के सभागार में स्टेम सेल को लेकर आहूत गोष्ठी में विजिटर्स प्रोफेसर के रूप में मेरठ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोफेसर डॉ. एलिजा चक्रवर्ती ने फैकल्टी और सीनियर एमबीबीएस छात्रों के साथ जानकारी साझा की। डॉ. चक्रवर्ती ने बताया स्टेम सेल शारीरिक विकास में योगदान देता है। कुछ जीव जंतुओं में स्टेम सेल की ऐसी क्षमता होती है कि यदि उनके शरीर का कोई अंग भंग हो जाए तो वो स्वयं विकसित हो जाता है। उन्होंने बताया यदि छिपकली की पूंछ कट जाती है तो कुछ समय पश्चात स्वयं विकसित हो जाती है। ये स्टेम सेल के कारण ही संभव होता है। इसी प्रकार मानव शरीर के प्रत्येक अंग में स्टेम सेल होता है परंतु इतना प्रभावी नहीं होता कि वो स्वयं विकसित हो जाए। हालांकि स्टेम सेल में विभाजन एवं विकास की अपार क्षमता होती है और इसी आधार पर जेनेटिक इंजीनियरिंग को समझने का व्यापक रूप से प्रयास किया जा रहा है। इसके विषय में भारत सहित पूरे विश्व में लगातार खोज एवं अनुसंधान चल रहा है कि मानव शरीर के लिए स्टेम सेल को किस प्रकार प्रभावी बनाया जा सके। इसमें प्राचार्य डॉ. अरविंद त्रिवेदी, डॉ. मनोज, डॉ. राकेश, डॉ. सुशील, डॉ. दुर्गेश तथा अन्य फैकल्टी एवं बड़ी संख्या में एमबीबीएस के सीनियर छात्र मौजूद रहे।
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