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कमजोर बच्चों के लिए चलेंगी उपचारात्मक कक्षाएं
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सहारनपुर। कोरोना काल में विद्यालयों से दूर रहे जिन बच्चों के शैक्षिक स्तर में गिरावट आई, उनके लिए उपचारात्मक कक्षाएं चलेंगी। इसके लिए शिक्षकों को शैक्षिक रूप से कमजोर बच्चों को चिह्नित करने को कहा गया है। ऐसे बच्चों के लिए 40 मिनट की उपचारात्मक कक्षाएं संचालित होंगी।
परिषदीय विद्यालयों के विद्यार्थी मार्च 2020 के बाद अब एक सितंबर 2021 से विद्यालयों में पहुंचे हैं। यानी पूरे डेढ़ साल बाद विद्यालयों में लौटे हैं। इस अंतराल में बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए ऑनलाइन और मोहल्ला क्लास चलाई गई। मगर 70 फीसदी से अधिक बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई और मोहल्ला क्लास से नहीं जुड़ सके हैं। ऐसे बच्चों खासकर छोटी कक्षाओं जैसे कक्षा एक से पांच के बच्चों का शैक्षिक स्तर काफी गिरा है। शिक्षकों की मानें तो अनेक बच्चे पहला पढ़ा हुआ भूल चुके हैं, जिनको शुरू से पढ़ाना पड़ रहा है। बेसिक शिक्षा परिषद ने भी शैक्षिक रूप से कमजोर हुए बच्चों को चिह्नित करने के आदेश दिए हैं। इतना ही नहीं, कोरोना काल में बच्चों ने क्या सीखा इसका भी आकलन किया जा रहा है। कमजोर बच्चों के लिए 40 मिनट की उपचारात्मक (रेमेडियल) कक्षाएं संचालित की जाएंगी।
समृद्ध पुस्तिका से होगा आकलन
समृद्ध पुस्तिकाएं शिक्षकों को मिली हैं। इसमें हिंदी और गणित दोनों विषय दिए गए हैं। यह पुस्तिका बच्चों को पढ़वाकर देखी जाएगी। उसी के आधार पर बच्चों का स्तर तय होगा। जिसके बाद उन पर उपचारात्मक कक्षाओं के माध्यम से मेहनत कर उनके स्तर में सुधार लाया जाएगा।
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परिषदीय विद्यालयों के बच्चे करीब डेढ़ साल बाद विद्यालयों में पहुंच रहे हैं। शिक्षकों के द्वारा शैक्षिक रूप से कमजोर बच्चों का आकलन किया जा रहा है। कमजोर बच्चों के लिए उपचारात्मक कक्षाएं चलाई जानी हैं। कुछ जगहों पर शिक्षकों के द्वारा कक्षाओं का संचालन शुरू भी कर दिया गया है।
- अंबरीष कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।
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परिषदीय विद्यालयों के विद्यार्थी मार्च 2020 के बाद अब एक सितंबर 2021 से विद्यालयों में पहुंचे हैं। यानी पूरे डेढ़ साल बाद विद्यालयों में लौटे हैं। इस अंतराल में बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए ऑनलाइन और मोहल्ला क्लास चलाई गई। मगर 70 फीसदी से अधिक बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई और मोहल्ला क्लास से नहीं जुड़ सके हैं। ऐसे बच्चों खासकर छोटी कक्षाओं जैसे कक्षा एक से पांच के बच्चों का शैक्षिक स्तर काफी गिरा है। शिक्षकों की मानें तो अनेक बच्चे पहला पढ़ा हुआ भूल चुके हैं, जिनको शुरू से पढ़ाना पड़ रहा है। बेसिक शिक्षा परिषद ने भी शैक्षिक रूप से कमजोर हुए बच्चों को चिह्नित करने के आदेश दिए हैं। इतना ही नहीं, कोरोना काल में बच्चों ने क्या सीखा इसका भी आकलन किया जा रहा है। कमजोर बच्चों के लिए 40 मिनट की उपचारात्मक (रेमेडियल) कक्षाएं संचालित की जाएंगी।
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समृद्ध पुस्तिका से होगा आकलन
समृद्ध पुस्तिकाएं शिक्षकों को मिली हैं। इसमें हिंदी और गणित दोनों विषय दिए गए हैं। यह पुस्तिका बच्चों को पढ़वाकर देखी जाएगी। उसी के आधार पर बच्चों का स्तर तय होगा। जिसके बाद उन पर उपचारात्मक कक्षाओं के माध्यम से मेहनत कर उनके स्तर में सुधार लाया जाएगा।
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परिषदीय विद्यालयों के बच्चे करीब डेढ़ साल बाद विद्यालयों में पहुंच रहे हैं। शिक्षकों के द्वारा शैक्षिक रूप से कमजोर बच्चों का आकलन किया जा रहा है। कमजोर बच्चों के लिए उपचारात्मक कक्षाएं चलाई जानी हैं। कुछ जगहों पर शिक्षकों के द्वारा कक्षाओं का संचालन शुरू भी कर दिया गया है।
- अंबरीष कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।