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सुप्रीम कोर्ट के आदेश से ऋण लेने वालों को राहत
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खाताधारक जितेंद्र कश्यप
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। जिले में पांच लाख से ज्यादा लोगों ने बैंक से ऋण लिया है, जिनमें करीब 50 हजार ऐसे हैं जो किस्त जमा नहीं करा पाए हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का ऐसे लोगों को लाभ मिलेगा। क्योंकि, कोरोना काल में कामकाज ठप होने की वजह से लोगों के सामने आर्थिक संकट आ गया और बैंकों की किस्त नहीं दे पा रहे हैं।
जिले में विभिन्न बैंकों से करीब पांच लाख 25 हजार लोगों ने होम लोन और अन्य प्रकार का ऋण लिया हुआ है। इन लोगों पर बैंकों का 10 हजार 725 करोड़ रुपये बकाया है। कोरोना संक्रमण को लेकर 22 मार्च से हुए लॉकडाउन के बाद से लोगों के रोजगार पर असर पड़ा है। लोगों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने 31 अगस्त किस्त जमा न कराने की छूट दी थी, लेकिन उसके बाद से ऋण लेने वालों पर किस्त जमा कराने को बैंकों की ओर नोटिस दिए गए। ऐसे में लोगों को अपना खाता एनपीए होने का भी डर सता रहा था। अब सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि किस्त जमा न होने की दशा में खाता एनपीए नहीं किया जाएगा। इस आदेश से ऋण लेने वाले लोगों को राहत मिली है।
अभी नहीं है रोजगार तो कैसे चुकाएं ऋण
- मोहल्ला शारदानगर निवासी जितेंद्र कश्यप का कहना है कि उन्होंने होम लोन लिया था, लेकिन कोरोना काल और लॉकडाउन की वजह से रोजगार बहुत कम हो गया है, जिस कारण किस्त देने में दिक्कत आई है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश सराहनीय है। जब तक कोरोना से निजात नहीं मिलती और रोजगार पहले की तरह स्थापित नहीं होते, तब छूट मिलनी चाहिए।
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- मोहल्ला गोटेशाह निवासी होजरी कारोबारी हसीब सिद्दीकी ने कहा कि उन्होंने भी ऋण ले रखा है। इन दिनों काम बहुत कम है, जिस वजह से किस्त जमा कराने में परेशानी आई है। सरकार को कम से कम एक साल तक छूट देनी चाहिए।
हर माह किस्त जमा कराने में है फायदा : एलडीएम
सहारनपुर। लीड बैंक मैनेजर राजेश चौधरी ने बताया कि जिले में 50 हजार से कम वाले ऋण धारकों को छोड़कर पांच लाख 25 हजार लोगों पर विभिन्न बैंकों का 10 हजार 725 करोड़ रुपये बकाया है। अधिकांश लोग किस्त जमा करा रहे हैं, जो नहीं करा रहे हैं, उन्हें भी हर माह किस्त जमा करनी चाहिए। ताकि 31 मार्च 2021 तक एक साथ छह माह की किस्त देने का बोझ न पड़े। सरकार के निर्देशानुसार कोरोना काल में किसी भी ऋण धारक का खाता एनपीए नहीं किया गया है।
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जिले में विभिन्न बैंकों से करीब पांच लाख 25 हजार लोगों ने होम लोन और अन्य प्रकार का ऋण लिया हुआ है। इन लोगों पर बैंकों का 10 हजार 725 करोड़ रुपये बकाया है। कोरोना संक्रमण को लेकर 22 मार्च से हुए लॉकडाउन के बाद से लोगों के रोजगार पर असर पड़ा है। लोगों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने 31 अगस्त किस्त जमा न कराने की छूट दी थी, लेकिन उसके बाद से ऋण लेने वालों पर किस्त जमा कराने को बैंकों की ओर नोटिस दिए गए। ऐसे में लोगों को अपना खाता एनपीए होने का भी डर सता रहा था। अब सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि किस्त जमा न होने की दशा में खाता एनपीए नहीं किया जाएगा। इस आदेश से ऋण लेने वाले लोगों को राहत मिली है।
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अभी नहीं है रोजगार तो कैसे चुकाएं ऋण
- मोहल्ला शारदानगर निवासी जितेंद्र कश्यप का कहना है कि उन्होंने होम लोन लिया था, लेकिन कोरोना काल और लॉकडाउन की वजह से रोजगार बहुत कम हो गया है, जिस कारण किस्त देने में दिक्कत आई है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश सराहनीय है। जब तक कोरोना से निजात नहीं मिलती और रोजगार पहले की तरह स्थापित नहीं होते, तब छूट मिलनी चाहिए।
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- मोहल्ला गोटेशाह निवासी होजरी कारोबारी हसीब सिद्दीकी ने कहा कि उन्होंने भी ऋण ले रखा है। इन दिनों काम बहुत कम है, जिस वजह से किस्त जमा कराने में परेशानी आई है। सरकार को कम से कम एक साल तक छूट देनी चाहिए।
हर माह किस्त जमा कराने में है फायदा : एलडीएम
सहारनपुर। लीड बैंक मैनेजर राजेश चौधरी ने बताया कि जिले में 50 हजार से कम वाले ऋण धारकों को छोड़कर पांच लाख 25 हजार लोगों पर विभिन्न बैंकों का 10 हजार 725 करोड़ रुपये बकाया है। अधिकांश लोग किस्त जमा करा रहे हैं, जो नहीं करा रहे हैं, उन्हें भी हर माह किस्त जमा करनी चाहिए। ताकि 31 मार्च 2021 तक एक साथ छह माह की किस्त देने का बोझ न पड़े। सरकार के निर्देशानुसार कोरोना काल में किसी भी ऋण धारक का खाता एनपीए नहीं किया गया है।

लीड बैंक मैनेजर राजेश चौधरी।- फोटो : SAHARANPUR