फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   Refugees shine in conflict, name in city

शरणार्थियों ने संघर्ष से चमकाया शहर में नाम

Sat, 20 Jun 2020 11:54 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 20 Jun 2020 11:54 PM IST
विज्ञापन
Refugees shine in conflict, name in city
नुमाईश कैंप जहां पाकिस्तान से आये थे शरणार्थी - फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। भारत पाक विभाजन के समय पाकिस्तान के विभिन्न शहरों से करीब 100 परिवार शहर में आए थे। ये परिवार सरकार की ओर से मिले आश्रय स्थल में रहे। एक बरामदा, एक शौचालय और सीमित जगह वाले मकान वाले आश्रय स्थल में कड़े संघर्ष में जिंदगी गुजारी। शरणार्थियों का यह सफर शुरू हुआ था शहर के नुमाईश कैंप क्षेत्र से। यहां रोजी-रोटी के संघर्ष के ये लोग न केवल आगे बढ़े बल्कि बड़े कारोबार और रोजगार से शहर की पहचान भी बन गए। कुछ ऐसे ही परिवारों के सदस्यों से की गई बातचीत। पेश है रिपोर्ट...।
विज्ञापन

20-30 कैंप से 20 हजार आबादी वाला हो गया नुमाईश कैंप
विभाजन के समय पाकिस्तान के सियाल कोट से सहारनपुर आए परिवार के 80 वर्षीय सदस्य पूरण चंद शर्मा बताते हैं कि जब वे यहां आए थे तो सरकारी कैंप महज 20 से 30 तक थे। बाकी खाली क्षेत्र था। शुरू में कुछ काम न मिला तो पंडिताई ही शुरू कर दी। इसके बाद पैसे जुटने शुरू हुए तो आसपास दुकानें खरीदीं। इस समय भी उनके पास 25 कमरों का अलग आवास है, लेकिन यहां तक आने के लिए भी बहुत संघर्ष झेला है। छोटा या बड़ा जो काम मिलता गया, करते चले गए। वे कहते है कि उम्र ज्यादा हो गई। अधिक याद नहीं है। मगर फिलहाल खुश हैं। आगे बच्चे भी ठीक हैं। कोई परेशानी नहीं।
विज्ञापन

पहले कोयला बेचकर पला परिवार, संघर्षों के बाद मिला रोजगार
नुमाईश कैंप निवासी और इसी क्षेत्र के पार्षद रमेश छाबड़ा बताते हैं कि पाकिस्तान के लायलपुर से उनका परिवार आया उस समय यहां 50-60 परिवार ही सरकार की ओर से दिए आश्रय स्थलों में रहते थे। उनके पिता देशराज छाबड़ा और मां करतार देवी ने लंबे समय तक संघर्ष किया। कभी सहारनपुर तो कभी बाहर के शहरों में रोजी रोटी के लिए भटकते रहे। यहां तक कि रेल पटरी और आसपास से कोयला चुन चुन कर उसे बेचकर परिवार पाला गया। आज प्रभु का शुक्र है कि न केवल खुद का कपड़ा और अन्य कारोबार है, बल्कि क्षेत्र की जनता ने पार्षद बनने तक का मौका दिया। अब उन्हें शरणार्थी होने का एहसास तक नहीं होता है। हालांकि संघर्ष के वे दिन भूल नहीं सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

कभी ताला तोड़कर लिया था आश्रय, आज खुद का बड़ा कारोबार
फल सब्जी मंडी आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष और बड़े कारोबारी इकबाल सिंह चावला बताते हैं कि उनका परिवार भी पाकिस्तान के सरगोदा से यहां आया। परिवार बड़ा था। उनके पिता अतर सिंह के साथ खानदान के 50 से भी अधिक लोग पाकिस्तान से चले थे। पहले अमृतसर में रुके। दो महीने तक स्टेशन पर बेहाल रहे। फिर सहारनपुर आ गए। यहां महीनों तक रोजी रोटी का संघर्ष चला। हाल यह था कि कम्बोह कटहरा में एक मकान का ताला तोड़कर आश्रय पाया। इसमें रिपोर्ट दर्ज हो गई थी। यहां आकर पहले कम स्तर पर फल सब्जी का कारोबार शुरू किया, अब बड़ी आढ़त है। उनके परिवार और खानदान से जुड़े लोग अहमद बाग सहित अन्य क्षेत्रों में रह रहे हैं।
कुछ ऐसे आगे बढ़ा शरणार्थियों का सफर
वर्ष 1947-48 में पाकिस्तान के सियाल कोट, लायलपुर, सरगोदा, सिंध सहित 20 से अधिक शहरों से यहां विस्थापित परिवार पहुंचे।
कभी जहां कैंप में छोटे-छोटे आश्रय स्थल थे, वहां अब बड़ी कालोनी और आवासीय के साथ ही वाणिज्यिक स्थल बन चुके हैं।
इनमें से कुछ परिवार अमृतसर, जालंधर सहित अन्य शहरों में ही रुक गए और बाकी रोजगार न मिलने पर सहारनपुर में आकर रहने लगे।
नुमाईश कैंप से हुई आश्रय की शुरूआत, रोजगार कारोबार बढ़ाते हुए हकीकत नगर, सुभाष नगर, पटेल नगर, अहमद बाग, शहीद गंज, नेहरू मार्केट, पंजाबी बाग सहित अन्य क्षेत्रों में फैल गए।
इन परिवारों के 90 फीसदी लोग कपड़ा, रेडिमेड गारमेंट्स, कास्मेटिक के सामान , क्राकरी, आयरन और ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े गए।
पहले नागरिक बने, फिर नेता भी
इन परिवारों से जुड़े सदस्यों और परिचितों में से ही 30 से ज्यादा लोग वर्तमान समय में पार्षद से लेकर अन्य जनप्रतिनिधि और राजनीतिक पार्टी के नेताओं के रूप में जाने जाते हैं।

शहर के अधिकतर व्यापारिक संगठनों, सामाजिक संगठनों, औद्योगिक संगठनों में भी इन्हीं परिवारों से जुड़ी पीढ़ियों की भागीदारी चली आ रही है।

सरदार इकबाल सिंह

सरदार इकबाल सिंह- फोटो : SAHARANPUR

पार्षद रमेश छाबड़ा

पार्षद रमेश छाबड़ा- फोटो : SAHARANPUR

पूर्ण चंद शर्मा

पूर्ण चंद शर्मा- फोटो : SAHARANPUR

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed