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रमजान माह 11 महीने जिंदगी गुजारने की देता है सीख

Thu, 07 Apr 2022 11:48 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 07 Apr 2022 11:48 PM IST
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Ramadan month gives lessons to spend 11 months of life
सहारनपुर। जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने हेल्पलाइन के जरिए रोजेदारों के सवालों के जवाब दिए। उन्होंने कहा कि रहमतों और बरकतों का महीना रमजान मुबारक 11 महीने जिंदगी गुजारने की सीख देता है।
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सवाल- खानआलमपुरा निवासी फैसल ने पूछा कि वह रोजे की हालत में आंख में सुरमा या काजल लगा सकते हैं। यदि उसका असर हलक में महसूस हो रहा हो तो क्या रोजा टूटेगा।
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जवाब- रोजे की हालत में सुरमा व काजल लगाया जा सकता है। इससे रोजे पर कोई असर नहीं आता। अगर सुरमे का असर हलक में महसूस हो रहा हो तब भी रोजा सलामत रहेगा।
सवाल- मुजफ्फरनगर निवासी रेश्मा ने पूछा कि वह सहरी में उठ नहीं पाई और पूरे दिन रोजे की नीयत भी नहीं कर सकी, लेकिन पूरे दिन भूखी-प्यासी रही हैं। अब ऐसी सूरत में शरीयत के अनुसार उनका रोजा होगा या नहीं।
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जवाब- शरीयत के मुताबिक़ रोजा रखने के लिए नीयत करना शर्त है। अगर किसी ने रोजे का इरादा नहीं किया और तमाम दिन कुछ खाया-पिया भी नहीं तो रोजा नहीं होगा।
सवाल-- खाताखेड़ी निवासी अदनान ने पूछा कि क्या जकात की रकम से किसी गरीब को दवा दिला सकते हैं।
जवाब-- जी हां, जकात की रकम से किसी गरीब को दवा दिलाई जा सकती है। बशर्ते दवा देते समय जकात की नीयत की गई हो।
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