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रैक आई, समितियों में डीएपी पहुंचना शुरू
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सहारनपुर। जनपद में आई तीन हजार मीट्रिक टन डाई अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) उर्वरक से रबी फसलों की बुवाई में जुटे किसानों को राहत मिल गई है। डीएपी को सभी सहकारी समितियों में उनकी मांग के अनुसार पहुंचाया जा रहा है। इससे डीएपी की किल्लत झेल रहे किसानों को न सिर्फ राहत मिलेगी बल्कि बुवाई में भी तेजी आएगी।
जनपद में 1.16 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में रबी फसलों की बुवाई का लक्ष्य है। किसानों ने धान कटने के बाद से ही गेहूं, सरसों, जौ, मसूर, चना एवं मटर की बुवाई शुरू कर रखी है। इसके साथ ही गन्ना कटने के बाद खाली हुए खेत में भी गेहूं आदि रबी फसलों की बुआई की जा रही है। इन फसलों की बुवाई में अधिकांश किसान डीएपी उर्वरक का ही प्रयोग करते हैं। हालांकि कुछ किसान इसके स्थान पर एनपीके का भी उपयोग बुवाई के समय करते हैं। कई सरकारी समितियों में डाई अमोनियम फॉस्फेट उर्वरक की किल्लत का रबी फसलों की बुवाई पर विपरीत असर पड रहा था। जिससे फसल की बुवाई पिछड़ रही थी। इसके चलते सोमवार शाम को तीन हजार मीट्रिक टन की डीएपी की रैक जनपद में पहुंच गई। डीएपी को सभी सहकारी समितियों को भिजवाना शुरू हो गया है। -
-- वर्जन --
पर्याप्त है डीएपी एवं एनपीके
जनपद में तीन हजार मीट्रिक टन डीएपी की रैक आ गई है। इसे सभी सहकारी समितियों में मांग के अनुसार भिजवाया जा रहा है। इसके साथ ही जनपद में 2500 मीट्रिक टन एनपीके और करीब 10 हजार मीट्रिक टन यूरिया भी उपलब्ध है। जनपद में अब उर्वरकों की किल्लत नहीं है। --- धीरज कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी।
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रबी फसलों की बुआई का लक्ष्य
फसल -------------- रकबा
गेहूं ------------ 1.12 लाख हेक्टेयर
सरसों ----------- 1500 हेक्टेयर
मसूर ------------ 2400 हेक्टेयर
चना/ मटर --------- 30 हेक्टेयर
जौं -------------- 66 हेक्टेयर
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नोट: कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार।
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जनपद में 1.16 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में रबी फसलों की बुवाई का लक्ष्य है। किसानों ने धान कटने के बाद से ही गेहूं, सरसों, जौ, मसूर, चना एवं मटर की बुवाई शुरू कर रखी है। इसके साथ ही गन्ना कटने के बाद खाली हुए खेत में भी गेहूं आदि रबी फसलों की बुआई की जा रही है। इन फसलों की बुवाई में अधिकांश किसान डीएपी उर्वरक का ही प्रयोग करते हैं। हालांकि कुछ किसान इसके स्थान पर एनपीके का भी उपयोग बुवाई के समय करते हैं। कई सरकारी समितियों में डाई अमोनियम फॉस्फेट उर्वरक की किल्लत का रबी फसलों की बुवाई पर विपरीत असर पड रहा था। जिससे फसल की बुवाई पिछड़ रही थी। इसके चलते सोमवार शाम को तीन हजार मीट्रिक टन की डीएपी की रैक जनपद में पहुंच गई। डीएपी को सभी सहकारी समितियों को भिजवाना शुरू हो गया है। -
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पर्याप्त है डीएपी एवं एनपीके
जनपद में तीन हजार मीट्रिक टन डीएपी की रैक आ गई है। इसे सभी सहकारी समितियों में मांग के अनुसार भिजवाया जा रहा है। इसके साथ ही जनपद में 2500 मीट्रिक टन एनपीके और करीब 10 हजार मीट्रिक टन यूरिया भी उपलब्ध है। जनपद में अब उर्वरकों की किल्लत नहीं है। --- धीरज कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी।
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रबी फसलों की बुआई का लक्ष्य
फसल -------------- रकबा
गेहूं ------------ 1.12 लाख हेक्टेयर
सरसों ----------- 1500 हेक्टेयर
मसूर ------------ 2400 हेक्टेयर
चना/ मटर --------- 30 हेक्टेयर
जौं -------------- 66 हेक्टेयर
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नोट: कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार।