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सहारनपुर से दो राजेन्द्रों ने दी थी रामजन्म भूमि के आंदोलन को धार
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राजेंद्र पंकज और राजेंद्र अटल ने दी थी राम मंदिर आंदोलन को धार
सहारनपुर। सहारनपुर से कई लोगों ने राम मंदिर आंदोलन से जुड़कर उसे धार दी। कुछ सक्रिय राजनीति करते हुए बड़े ओहदे पर पहुंच गये, जबकि कुछ को दात्यिव नहीं मिला तो उन्होंने खुद को समेट लिया। राजेंद्र पंकज और राजेंद्र अटल ऐसे ही दो बड़े नाम हैं।
विश्व हिंदू परिषद के केेंद्रीय मंत्री के तौर पर राजेंद्र पंकज बड़े नाम के रूप में जाने जाते हैं। राम मंदिर को लेकर सहारनपुर में जागरूकता फैलाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। देवबंद के भायला गांव के रहने वाले राजेंद्र पंकज हालांकि कुछ समय बाद दिल्ली, अयोध्या, मथुरा, काशी की दौड़ लगाने लगे और अपनी जड़ें गहरी करते गए। इसकी वजह से वह संघ और संगठन के करीब आ गए। उनकी राम मंदिर को लेकर राजनीति दिल्ली स्तर पर होने लगी। वे सहारनपुर को कुछ साल पहले छोड़कर राजनीति के सफर में आगे निकल गए और अब विहिप के केन्द्रीय मंत्री के पद पर हैं। हालांकि उनके पारिवारिक सदस्य अब भी देवबंद में हैं।
वहीं, इसी शहर के उनके साथ के ही राजेंद्र अटल दिल्ली रोड पर रहते हैं और अब गौसेवा व प्राकृतिक चिकित्सा को लेकर जनसेवा कर रहे हैं। एक वक्त था जब राम जन्म भूमि आंदोलन के वे जिला सहारनपुर के जिलाध्यक्ष थे। उस दौर में उन्होंने रामजन्म भूमि को लेकर आंदोलन चलाया था। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की सरकार में वे मंडी समिति के चेयरमैन भी बने। उसके बाद चीजें बदलती गईं और सक्रिय राजनीति से राजेंद्र अटल ने खुद को दूर कर लिया। हालांकि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, भाजपा, बजरंग दल और विहिप के सभी पदाधिकारियों से उनके अच्छे ताल्लुकात हैं। उनकी मानें तो वे 15 साल से गौसेवा और प्राकृतिक चिकित्सालय, योग का कार्य कर रहे हैं। फिलहाल उनके पास कोई दायित्व नहीं है।
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सहारनपुर। सहारनपुर से कई लोगों ने राम मंदिर आंदोलन से जुड़कर उसे धार दी। कुछ सक्रिय राजनीति करते हुए बड़े ओहदे पर पहुंच गये, जबकि कुछ को दात्यिव नहीं मिला तो उन्होंने खुद को समेट लिया। राजेंद्र पंकज और राजेंद्र अटल ऐसे ही दो बड़े नाम हैं।
विश्व हिंदू परिषद के केेंद्रीय मंत्री के तौर पर राजेंद्र पंकज बड़े नाम के रूप में जाने जाते हैं। राम मंदिर को लेकर सहारनपुर में जागरूकता फैलाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। देवबंद के भायला गांव के रहने वाले राजेंद्र पंकज हालांकि कुछ समय बाद दिल्ली, अयोध्या, मथुरा, काशी की दौड़ लगाने लगे और अपनी जड़ें गहरी करते गए। इसकी वजह से वह संघ और संगठन के करीब आ गए। उनकी राम मंदिर को लेकर राजनीति दिल्ली स्तर पर होने लगी। वे सहारनपुर को कुछ साल पहले छोड़कर राजनीति के सफर में आगे निकल गए और अब विहिप के केन्द्रीय मंत्री के पद पर हैं। हालांकि उनके पारिवारिक सदस्य अब भी देवबंद में हैं।
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वहीं, इसी शहर के उनके साथ के ही राजेंद्र अटल दिल्ली रोड पर रहते हैं और अब गौसेवा व प्राकृतिक चिकित्सा को लेकर जनसेवा कर रहे हैं। एक वक्त था जब राम जन्म भूमि आंदोलन के वे जिला सहारनपुर के जिलाध्यक्ष थे। उस दौर में उन्होंने रामजन्म भूमि को लेकर आंदोलन चलाया था। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की सरकार में वे मंडी समिति के चेयरमैन भी बने। उसके बाद चीजें बदलती गईं और सक्रिय राजनीति से राजेंद्र अटल ने खुद को दूर कर लिया। हालांकि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, भाजपा, बजरंग दल और विहिप के सभी पदाधिकारियों से उनके अच्छे ताल्लुकात हैं। उनकी मानें तो वे 15 साल से गौसेवा और प्राकृतिक चिकित्सालय, योग का कार्य कर रहे हैं। फिलहाल उनके पास कोई दायित्व नहीं है।
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