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पहाड़ों पर बारिश, उफान पर बरसाती नदियां
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हथनी कुंड बैराज से छोड़ा गया पानी
- फोटो : SAHARANPUR
बेहट (सहारनपुर)। पहाड़ी क्षेत्र में बारिश के चलते शुक्रवार सुबह यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने लगा, तो बरसाती नदियां भी उफान पर आ गईं। जिससे नदियों से घिरे कई गांवों का बाहरी क्षेत्रों से संपर्क पूरे दिन कटा रहा। शाकंभरी देवी मंदिर की खोल में पानी का तेज बहाव होने के कारण श्रद्धालु भी दर्शन करने के लिए मंदिर तक नहीं पहुंच सके। इसके अलावा बेहट- बिहारीगढ़ मार्ग पर यात्री बसों का संचालन पांच घंटे बंद रहा।
इस सीजन में पहाड़ी क्षेत्र में बारिश के बाद पहली बार यमुना नदी का जलस्तर बढ़ा। शुक्रवार सुबह 5 बजे हथिनीकुंड बैराज से यमुना नदी में 18022 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इसके बाद छोड़े गए पानी में लगातार वृद्धि हुई और पूर्वाह्न 11 बजे तक जलस्तर 51740 क्यूसेक हो गया था। दोपहर 12 बजे जलस्तर 30844 क्यूसेक हुआ, लेकिन फिर जलस्तर बढ़ना शुरू हो गया। दोपहर 2 बजे जलस्तर 52684 क्यूसेक दर्ज किया गया, लेकिन चार बजे 31118 क्यूसेक रह गया था।
उधर, शिवालिक पहाड़ियों से निकलने वाली बरसाती नदियां भी दिन भर उफान पर रही। नदियों में सुबह करीब 9 बजे पानी आया। बादशाहीबाग से होकर निकली पजना नदी में जबरदस्त पानी था, जिससे खारा जल विद्युत परियोजना की कॉलोनी, मगनपुरा, समेत कई गांवों का दिल्ली-यमनोत्री हाईवे से संपर्क कटा रहा। इसके अलावा खैरोवाली, शाकंभरी देवी नदियों में पानी आने से शाहपुर, रामपुर बड़कलां, सिद्धपीठ शाकंभरी देवी आदि का संपर्क बाहरी क्षेत्रों से कटा रहा। वहीं, खैरोवाली और शाकंभरी देवी बरसाती नदियों से घिरे शाहपुर और हुसैन मलकपुर गांव का शुक्रवार को पहाड़ियों पर बारिश होने के बाद नदियों में पानी आने के कारण बाहरी क्षेत्रों से संपर्क कटा रहा। दोनों गांव के लोग शाकंभरी देवी नदी पर पुल निर्माण की मांग को लेकर नदी किनारे धरना दे रहे हैं।
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पांच घंटे नहीं चली यात्री बसें
नागादेव और गुलरिया नदियों में पानी आने से शुक्रवार पूर्वाह्न 10 बजे से दोपहर तीन बजे तक बेहट-बिहारीगढ़ रूट पर यात्री बसों का संचालन पूरी तरह से बंद रहा। इस कारण बेहट से बिहारीगढ़ जाने वाले यात्रियों को परेशानियां झेलनी पड़ीं। हालांकि तीन बजे के बाद पानी कम होने के बाद इस रूट पर यातायात सुचारु हो सका। बेहट बिहारीगढ़ बस यूनियन के मुंशी राजपाल सिंह चौहान ने बताया कि तीन बजे के बाद ही बसों का संचालन शुरू हो सका।
यमुना नदी में हथिनीकुंड बैराज से छोड़े पानी की स्थिति
-- समय ----------- (जलस्तर क्यूसेक में)
सुबह 5 बजे ---- 18022
6 बजे ----- 22055
7 बजे ----- 20756
8 बजे ---- 23190
9 बजे ----- 39644
10 बजे ----- 45994
11 बजे ----- 51740
दोपहर 12 बजे ---- 30844
1 बजे ---- 47974
2 बजे ---- 52684
3 बजे ---- 34174
शाम 4 बजे ---- 31118
------------- बारिश की स्थिति
पांवटा साहिब ------ 75 मिमी
ताजेवाला --------- 18.2 मिमी
(नोट-हथनीकुंड़ बैराज से मिली जानकारी के अनुसार)
सिद्धपीठ में आया पानी
शाकंभरी। शिवालिक पहाड़ियों में हुई बारिश के बाद सिद्धपीठ शाकंभरी देवी में खोल (बरसाती नदी) में आए तेज पानी के बहाव से अफरा तफरी का माहौल बन गया। सिद्धपीठ का मार्ग अवरुद्ध हो गया, जिसके चलते श्रद्धालुओं को भूरादेव मंदिर से ही लौटना पड़ा।
शुक्रवार की सुबह लगभग 9 बजे शिवालिक पहाड़ियों में अचानक भारी बारिश होने लगी और सिद्धपीठ शाकंभरी देवी खोल में तेज पानी का बहाव आ गया। अचानक आए पानी से श्रद्धालु इधर-उधर भागने लगे। दुकानदारों ने भी अपना सामान समेटना शुरू कर दिया था। सिद्धपीठ में बारिश का मौसम तो बना हुआ था, परंतु बारिश नहीं हो रही थी, जो श्रद्धालु 9 बजे से पूर्व सिद्धपीठ पहुंच चुके थे, उन्होंने तो मां भगवती के दर्शन किए, लेकिन वह भी कई घंटे तक मंदिर परिसर में ही रुके रहे। क्योंकि वहां से लौटने में भी दिक्कत थी। उसके बाद मां शाकंभरी देवी मंदिर के लिए श्रद्धालु पहुंच ही नहीं पाए, बल्कि बाबा भूरादेव के दर्शन कर लौटना पड़ा। काफी श्रद्धालु तो कई घंटे तक इंतजार करते रहे कि पानी आना बंद हो जाए, तो वह माता के दर्शन करने जाएं, लेकिन पानी आना बंद नहीं हुआ।
यमुना में पानी आने से पांच घंटे तक टापू पर फंसे रहे ग्रामीण
यमुना नदी में अचानक छोडे़ गए पानी से जोधेबांस व तिड़फुआ के लगभग 20 से ज्यादा ग्रामीण पांच घंटे तक यमुना के टापू पर फंसे रहे। बाद में पानी कम होने पर तैराक ग्रामीणों ने उन्हें बाहर निकाला।
शुक्रवार को विकास खंड साढ़ौली कदीम के गांव जोधेबांस व तिड़फुआ के किसान व मजदूर प्रतिदिन की भांति सुबह के समय अपने खेतों में काम करने के लिए यमुना के दूसरे किनारे पर गए थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अचानक यमुना का जलस्तर बढ़ने लगा। कुछ ग्रामीणों ने तो आनन-फानन में पानी का बहाव पार कर लिया, लेकिन महिलाओं सहित लगभग 20 ग्रामीण यमुना के बीच बने टापू पर फंस गए। किसान इलियास, राशिद, सोपाल, शिवकुमार, पंकज, इस्लाम, गफूर अपनी भैंसा बुग्गी सहित लगभग पांच घंटे टापू पर फंसे रहे। पीड़ितों के अनुसार, सुबह लगभग 10 बजे वह यमुना के बीच बने टापू पर पहुंचे थे तथा दोपहर बाद तीन बजे पानी कम होने पर तैराक ग्रामीणों ने उन्हें बाहर निकाला। पीड़ितों का कहना है कि अचानक पानी छोडे़ जाने से पहले आसपास के गांवों में मुनादी कराई जानी चाहिए थी। पहले बाढ़ चौकी से उन्हे सूचना मिल जाया करती थी, लेकिन इस बार बाढ़ चौकियां ही नहीं बनाई गई हैं। उधर, पुरानी यमुना नदी में भी अचानक पानी छोडे़ जाने से गांव मंझाड़ी, शेखपुरा, मिल्को, नुनयारी, टटोहल आदि सहित कई गांवों के स्कूली बच्चे घंटों पानी कम होने का इंतजार करते रहे। उधर, एसडीएम बेहट ने बताया कि इस बार बाढ़ की स्थिति नहीं बनी है। ऐसे में चौकियां नहीं बनाई गई हैं।
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इस सीजन में पहाड़ी क्षेत्र में बारिश के बाद पहली बार यमुना नदी का जलस्तर बढ़ा। शुक्रवार सुबह 5 बजे हथिनीकुंड बैराज से यमुना नदी में 18022 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इसके बाद छोड़े गए पानी में लगातार वृद्धि हुई और पूर्वाह्न 11 बजे तक जलस्तर 51740 क्यूसेक हो गया था। दोपहर 12 बजे जलस्तर 30844 क्यूसेक हुआ, लेकिन फिर जलस्तर बढ़ना शुरू हो गया। दोपहर 2 बजे जलस्तर 52684 क्यूसेक दर्ज किया गया, लेकिन चार बजे 31118 क्यूसेक रह गया था।
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उधर, शिवालिक पहाड़ियों से निकलने वाली बरसाती नदियां भी दिन भर उफान पर रही। नदियों में सुबह करीब 9 बजे पानी आया। बादशाहीबाग से होकर निकली पजना नदी में जबरदस्त पानी था, जिससे खारा जल विद्युत परियोजना की कॉलोनी, मगनपुरा, समेत कई गांवों का दिल्ली-यमनोत्री हाईवे से संपर्क कटा रहा। इसके अलावा खैरोवाली, शाकंभरी देवी नदियों में पानी आने से शाहपुर, रामपुर बड़कलां, सिद्धपीठ शाकंभरी देवी आदि का संपर्क बाहरी क्षेत्रों से कटा रहा। वहीं, खैरोवाली और शाकंभरी देवी बरसाती नदियों से घिरे शाहपुर और हुसैन मलकपुर गांव का शुक्रवार को पहाड़ियों पर बारिश होने के बाद नदियों में पानी आने के कारण बाहरी क्षेत्रों से संपर्क कटा रहा। दोनों गांव के लोग शाकंभरी देवी नदी पर पुल निर्माण की मांग को लेकर नदी किनारे धरना दे रहे हैं।
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पांच घंटे नहीं चली यात्री बसें
नागादेव और गुलरिया नदियों में पानी आने से शुक्रवार पूर्वाह्न 10 बजे से दोपहर तीन बजे तक बेहट-बिहारीगढ़ रूट पर यात्री बसों का संचालन पूरी तरह से बंद रहा। इस कारण बेहट से बिहारीगढ़ जाने वाले यात्रियों को परेशानियां झेलनी पड़ीं। हालांकि तीन बजे के बाद पानी कम होने के बाद इस रूट पर यातायात सुचारु हो सका। बेहट बिहारीगढ़ बस यूनियन के मुंशी राजपाल सिंह चौहान ने बताया कि तीन बजे के बाद ही बसों का संचालन शुरू हो सका।
यमुना नदी में हथिनीकुंड बैराज से छोड़े पानी की स्थिति
-- समय ----------- (जलस्तर क्यूसेक में)
सुबह 5 बजे ---- 18022
6 बजे ----- 22055
7 बजे ----- 20756
8 बजे ---- 23190
9 बजे ----- 39644
10 बजे ----- 45994
11 बजे ----- 51740
दोपहर 12 बजे ---- 30844
1 बजे ---- 47974
2 बजे ---- 52684
3 बजे ---- 34174
शाम 4 बजे ---- 31118
------------- बारिश की स्थिति
पांवटा साहिब ------ 75 मिमी
ताजेवाला --------- 18.2 मिमी
(नोट-हथनीकुंड़ बैराज से मिली जानकारी के अनुसार)
सिद्धपीठ में आया पानी
शाकंभरी। शिवालिक पहाड़ियों में हुई बारिश के बाद सिद्धपीठ शाकंभरी देवी में खोल (बरसाती नदी) में आए तेज पानी के बहाव से अफरा तफरी का माहौल बन गया। सिद्धपीठ का मार्ग अवरुद्ध हो गया, जिसके चलते श्रद्धालुओं को भूरादेव मंदिर से ही लौटना पड़ा।
शुक्रवार की सुबह लगभग 9 बजे शिवालिक पहाड़ियों में अचानक भारी बारिश होने लगी और सिद्धपीठ शाकंभरी देवी खोल में तेज पानी का बहाव आ गया। अचानक आए पानी से श्रद्धालु इधर-उधर भागने लगे। दुकानदारों ने भी अपना सामान समेटना शुरू कर दिया था। सिद्धपीठ में बारिश का मौसम तो बना हुआ था, परंतु बारिश नहीं हो रही थी, जो श्रद्धालु 9 बजे से पूर्व सिद्धपीठ पहुंच चुके थे, उन्होंने तो मां भगवती के दर्शन किए, लेकिन वह भी कई घंटे तक मंदिर परिसर में ही रुके रहे। क्योंकि वहां से लौटने में भी दिक्कत थी। उसके बाद मां शाकंभरी देवी मंदिर के लिए श्रद्धालु पहुंच ही नहीं पाए, बल्कि बाबा भूरादेव के दर्शन कर लौटना पड़ा। काफी श्रद्धालु तो कई घंटे तक इंतजार करते रहे कि पानी आना बंद हो जाए, तो वह माता के दर्शन करने जाएं, लेकिन पानी आना बंद नहीं हुआ।
यमुना में पानी आने से पांच घंटे तक टापू पर फंसे रहे ग्रामीण
यमुना नदी में अचानक छोडे़ गए पानी से जोधेबांस व तिड़फुआ के लगभग 20 से ज्यादा ग्रामीण पांच घंटे तक यमुना के टापू पर फंसे रहे। बाद में पानी कम होने पर तैराक ग्रामीणों ने उन्हें बाहर निकाला।
शुक्रवार को विकास खंड साढ़ौली कदीम के गांव जोधेबांस व तिड़फुआ के किसान व मजदूर प्रतिदिन की भांति सुबह के समय अपने खेतों में काम करने के लिए यमुना के दूसरे किनारे पर गए थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अचानक यमुना का जलस्तर बढ़ने लगा। कुछ ग्रामीणों ने तो आनन-फानन में पानी का बहाव पार कर लिया, लेकिन महिलाओं सहित लगभग 20 ग्रामीण यमुना के बीच बने टापू पर फंस गए। किसान इलियास, राशिद, सोपाल, शिवकुमार, पंकज, इस्लाम, गफूर अपनी भैंसा बुग्गी सहित लगभग पांच घंटे टापू पर फंसे रहे। पीड़ितों के अनुसार, सुबह लगभग 10 बजे वह यमुना के बीच बने टापू पर पहुंचे थे तथा दोपहर बाद तीन बजे पानी कम होने पर तैराक ग्रामीणों ने उन्हें बाहर निकाला। पीड़ितों का कहना है कि अचानक पानी छोडे़ जाने से पहले आसपास के गांवों में मुनादी कराई जानी चाहिए थी। पहले बाढ़ चौकी से उन्हे सूचना मिल जाया करती थी, लेकिन इस बार बाढ़ चौकियां ही नहीं बनाई गई हैं। उधर, पुरानी यमुना नदी में भी अचानक पानी छोडे़ जाने से गांव मंझाड़ी, शेखपुरा, मिल्को, नुनयारी, टटोहल आदि सहित कई गांवों के स्कूली बच्चे घंटों पानी कम होने का इंतजार करते रहे। उधर, एसडीएम बेहट ने बताया कि इस बार बाढ़ की स्थिति नहीं बनी है। ऐसे में चौकियां नहीं बनाई गई हैं।

बादशाही बाग के पजना नदी मे आया पानी- फोटो : SAHARANPUR

बिहारीगढ़ में शाकंभरी सुंदरपुर मार्ग पर नदी में बहाव आने पर किनारे खडे लोग- फोटो : SAHARANPUR

पहाड़ियों पर बारिश के बाद शाकंभरी देवी खोल में आया पानी का तेज बहाव- फोटो : SAHARANPUR