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राधा स्वामी ब्यास डेरा प्रमुख ने प्रवचन से संगत को किया निहाल
Wed, 06 Mar 2019 11:33 PM IST
Prag Gupta
ब्यूरो, सहारनपुर
ब्यूरो, सहारनपुर
Published by: Prag Gupta
Updated Wed, 06 Mar 2019 11:33 PM IST
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सहारनपुर में राधा स्वामी सत्संग में उमड़ा सैलाब।
- फोटो : अमर उजाला
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सहारनपुर में राधा स्वामी ब्यास डेरा प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह महाराज ने कहा कि परमात्मा और आत्मा हमारे अंदर विद्यमान है, लेकिन अहंकार रूपी दीवार हमें उन तक नहीं पहुंचने देती है। इस दीवार को हटाएंगे तो परमात्मा के दर्शन होंगे। इसके लिए हमें प्रभु का सिमरन करना होगा।
सरसावा के पिलखनी स्थित राधा स्वामी सत्संग के प्रमुख केंद्र पर बुधवार को ब्यास डेरा प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह महाराज ने खुली जीप में घूमकर संगत को दर्शन दिए। इसके पश्चात लुधियाना से आए आरके कालरा ने पाठ कर संगत को निहाल कर दिया।
सत्संग के दौरान डेरा प्रमुख गुरिंदर सिंह महाराज ने कहा कि अहंकार को समाप्त करने के लिए हमें प्रभु का सिमरन करना चाहिए। शरीर पर बाहर की बीमारी को तो हम स्वयं ढूंढ लेंगे, लेकिन अंदर की बीमारी को ढूंढने के लिए हमें चिकित्सक के पास जाना होगा और स्वयं प्रयत्न करना होगा।
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जिस प्रकार अंधेरे वाले कमरे में बत्ती जगाने से प्रकाश हो जाता है, उसी तरह मन की बत्ती को जगाने से परमात्मा की प्राप्ति होती है। इसके लिए हमें स्वयं प्रयत्न करना होगा। उन्होंने कहा कि सबका मालिक एक है, लेकिन हम मनुष्यों ने उस मालिक को अलग-अलग धर्मों में बांट दिया। मालिक ने इंसान को बनाया है, लेकिन इंसान ने अपने - अपने रास्ते अलग अलग बना लिए।
सत्संग का अर्थ सत्य का संग है। संत और महापुरुष मनुष्य को भक्ति के मार्ग पर चलना सिखाते हैं। सेवा प्रभु को पाने के लिए वातावरण बनाना है, जिससे मन में नम्रता आती है और भक्ति से जुड़ने में आसानी होती है। गुरु की महिमा के बारे में कहा कि गुरु ज्ञान देने वाला होता है और अंधकार से उजाले की ओर ले जाता है।
शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि शरीर की हद शमशान घाट तक है। वह इससे आगे नहीं जा सकता। मगर शब्द वह धुन है, जो परमात्मा की ओर ले जाती है। जानवर और मनुष्य में सिर्फ विवेक अर्थात बुद्धि का अंतर है। मानव योनि में ही मुक्ति को हासिल की जा सकती है। इसके लिए हमें सदा प्रभु का सिमरन करना चाहिए। तभी मानव जाति का कल्याण हो सकेगा।
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सरसावा के पिलखनी स्थित राधा स्वामी सत्संग के प्रमुख केंद्र पर बुधवार को ब्यास डेरा प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह महाराज ने खुली जीप में घूमकर संगत को दर्शन दिए। इसके पश्चात लुधियाना से आए आरके कालरा ने पाठ कर संगत को निहाल कर दिया।
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सत्संग के दौरान डेरा प्रमुख गुरिंदर सिंह महाराज ने कहा कि अहंकार को समाप्त करने के लिए हमें प्रभु का सिमरन करना चाहिए। शरीर पर बाहर की बीमारी को तो हम स्वयं ढूंढ लेंगे, लेकिन अंदर की बीमारी को ढूंढने के लिए हमें चिकित्सक के पास जाना होगा और स्वयं प्रयत्न करना होगा।
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जिस प्रकार अंधेरे वाले कमरे में बत्ती जगाने से प्रकाश हो जाता है, उसी तरह मन की बत्ती को जगाने से परमात्मा की प्राप्ति होती है। इसके लिए हमें स्वयं प्रयत्न करना होगा। उन्होंने कहा कि सबका मालिक एक है, लेकिन हम मनुष्यों ने उस मालिक को अलग-अलग धर्मों में बांट दिया। मालिक ने इंसान को बनाया है, लेकिन इंसान ने अपने - अपने रास्ते अलग अलग बना लिए।
सत्संग का अर्थ सत्य का संग है। संत और महापुरुष मनुष्य को भक्ति के मार्ग पर चलना सिखाते हैं। सेवा प्रभु को पाने के लिए वातावरण बनाना है, जिससे मन में नम्रता आती है और भक्ति से जुड़ने में आसानी होती है। गुरु की महिमा के बारे में कहा कि गुरु ज्ञान देने वाला होता है और अंधकार से उजाले की ओर ले जाता है।
शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि शरीर की हद शमशान घाट तक है। वह इससे आगे नहीं जा सकता। मगर शब्द वह धुन है, जो परमात्मा की ओर ले जाती है। जानवर और मनुष्य में सिर्फ विवेक अर्थात बुद्धि का अंतर है। मानव योनि में ही मुक्ति को हासिल की जा सकती है। इसके लिए हमें सदा प्रभु का सिमरन करना चाहिए। तभी मानव जाति का कल्याण हो सकेगा।