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लीकेज मरम्मत के टेंडर पर फिर उठे सवाल

Tue, 01 Mar 2022 11:32 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 01 Mar 2022 11:32 PM IST
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Questions arose again on the tender for leak repair
सहारनपुर। नगर निगम के जल कल विभाग में लीकेज मरम्मत के नाम पर हुए टेंडर फिर सवालों के घेरे में है। पार्षदों के बाद एक जिम्मेदार नागरिक ने मंडलायुक्त को शिकायती पत्र भेजकर प्रकरण की जांच कराने तथा दोषी पाए जाने पर संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
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पार्षद मंसूर बदर के नेतृत्व में पार्षदों का प्रतिनिधिमंडल 11 जनवरी 2022 को मंडलायुक्त लोकेश एम से मिला था। पार्षदों ने आरोप लगाया था कि जलकल विभाग में ढाई वर्ष से एक ही दर पर टेंडर किए जा रहे हैं, जबकि अलग-अलग वित्तीय वर्ष में अलग-अलग कार्यों के लिए अलग निविदाएं आमंत्रित की जानी चाहिए थी, लेकिन नहीं की गई। पार्षद का यह भी आरोप था कि जलकल विभाग में ढाई साल से ठेकेदारों को 150 मदों जैसे पाइप पीवीसी, पाइप लोहा, सलूसवाल, बैंड-रेड्यूसर, फ्लैंच आदि यूनिट दर से जिनमें एक-एक यूनिट दर 12,000 से 13,000 रुपये की दर से ठेकेदारों को भुगतान किया गया है, चाहे वह सामान लगाया गया हो या नहीं। एक लीकेज जो कि सर्फ पाइप मरम्मत कराकर ठीक हो सकती थी उसे ठीक करने में एक से दो मीटर की पीवीसी या सीआई का पाइप लगाना दर्शाया गया है, जबकि मौके पर उक्त सामान लगा ही नहीं है। उन्होंने इस खेल में विभाग के लोगों के मिले होने की आशंका जताई थी। उनकी शिकायत के बाद मंडलायुक्त ने नगरायुक्त को पत्र लिखकर मामले की जांच कराकर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए थे, लेकिन उसके बाद आचार संहिता लगने और अधिकारियों के चुनावों में व्यस्त होने की वजह से मामला दब गया। अब खानालमपुरा निवासी आसिफ ने डाक द्वारा एक शिकायती पत्र मंडलायुक्त को भेजते हुए मामले की जांच कराने की मांग की है। आसिफ का कहना है कि जनता नगर निगम को कर जमा करती है जो इसलिए नहीं करती है कि वह पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाए। उन्होंने सवाल किया है कि सहारनपुर जल कल विभाग में लीकेज के टेंडर के नाम पर पिछले ढाई सालों से ज्यादा समय से टेंडर क्यों नहीं हो रहा है। क्यों केवल 11 ठेकेदारों को ही इसमें शामिल किया गया है। उनका यह भी सवाल है कि आचार संहिता के बीच यदि सफाई/बिजली/स्ट्रीट लाइट के काम बाधित नहीं हुए हैं तो पानी के कार्य क्यों रोके गए। उन्होंने यह भी सवाल किया है कि क्यों नहीं जलकल के अवर अभियंता मौके पर जाकर लीकेज का बिल सत्यापन नहीं करते। उनका दावा है कि है यदि ढाई सालों की लीकेज का मौके पर किसी अन्य विभाग से भौतिक सत्यापन कराया जाए तो करीब 25 करोड़ रुपये के भुगतान का खुलासा हो सकता है। उन्होंने प्रकरण की जांच कराने की मांग की है।
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