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किसानों की दुखती रग पर रख गईं हाथ
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Mon, 12 Sep 2016 01:08 AM IST
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सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय रैली में बसपा सुप्रीमो मायावती किसानों की दुखती रग पर हाथ रख गई। बसपा सुप्रीमो ने वेस्ट यूपी की राजनीति में खास दखल रखने वाले गन्ना किसानों को साधने का पूरा प्रयास किया।
बकाया गन्ना मूल्य और गन्ने के वाजिब दाम का मुद्दे पर किसानों के मर्म को छेड़ते हुए उन्होंने भरोसा दिलाया कि बसपा के सत्ता में आने पर पहले की तरह वाजिब दाम दिलाया जाएगा।
रविवार को दिल्ली रोड स्थित कॉसमॉस मैदान में आयोजित रैली में भीड़ से गदगद बसपा सुप्रीमो ने विरोधी दलों पर जमकर निशाना साधा। भाजपा पर किसानों से वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए बोलीं कि केंद्र सरकार खेती की लागत घटाने और फसल का लाभकारी मूल्य दिलाने के अपने वादे से पीछे हट गई है। प्रदेश सरकार पर किसानों की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए कठघरे में खड़ा किया। बोलीं, केंद्र सरकार धन्ना सेठों का तो कर्ज माफ कर सकती है लेकिन किसानों को फसलों का लाभकारी मूल्य नहीं चाहती।
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उन्होंने भूमि अधिग्रहण, बकाया गन्ना मूल्य, फसलों का उचित दाम और कर्ज माफी जैसे मुद्दों पर विरोधियों को घेरा। पूंजीपतियों को औने पौने दाम में जमीन उपलब्ध कराने की कोशिश में लगी भाजपा नीत केंद्र सरकार का भूमि अधिग्रहण बिल में बदलाव का प्रयास हमारे दबाव में पूरा नहीं हो सका।
केंद्र सरकार धन्ना सेठों का लोन तो माफ कर सकती हैं, लेकिन आत्महत्या के लिए मजबूर गरीब किसान उसके एजेंडे में नहीं हैं। उन्होंने किसानों की दुखती रग पर हाथ रखते हुए भरोसा दिलाया कि बसपा के सत्ता में आने पर गरीब किसानों की मदद की जाएगी।
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बकाया गन्ना मूल्य और गन्ने के वाजिब दाम का मुद्दे पर किसानों के मर्म को छेड़ते हुए उन्होंने भरोसा दिलाया कि बसपा के सत्ता में आने पर पहले की तरह वाजिब दाम दिलाया जाएगा।
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रविवार को दिल्ली रोड स्थित कॉसमॉस मैदान में आयोजित रैली में भीड़ से गदगद बसपा सुप्रीमो ने विरोधी दलों पर जमकर निशाना साधा। भाजपा पर किसानों से वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए बोलीं कि केंद्र सरकार खेती की लागत घटाने और फसल का लाभकारी मूल्य दिलाने के अपने वादे से पीछे हट गई है। प्रदेश सरकार पर किसानों की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए कठघरे में खड़ा किया। बोलीं, केंद्र सरकार धन्ना सेठों का तो कर्ज माफ कर सकती है लेकिन किसानों को फसलों का लाभकारी मूल्य नहीं चाहती।
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उन्होंने भूमि अधिग्रहण, बकाया गन्ना मूल्य, फसलों का उचित दाम और कर्ज माफी जैसे मुद्दों पर विरोधियों को घेरा। पूंजीपतियों को औने पौने दाम में जमीन उपलब्ध कराने की कोशिश में लगी भाजपा नीत केंद्र सरकार का भूमि अधिग्रहण बिल में बदलाव का प्रयास हमारे दबाव में पूरा नहीं हो सका।
केंद्र सरकार धन्ना सेठों का लोन तो माफ कर सकती हैं, लेकिन आत्महत्या के लिए मजबूर गरीब किसान उसके एजेंडे में नहीं हैं। उन्होंने किसानों की दुखती रग पर हाथ रखते हुए भरोसा दिलाया कि बसपा के सत्ता में आने पर गरीब किसानों की मदद की जाएगी।