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दीन के मसलों पर बोलने से पहले सही इल्म होना जरूरी : उलमा
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवबंद। यूट्यूबर और सामाजिक कार्यकर्ता हुदा जरीवाला के एक पॉडकास्ट में कहा कि अगर मर्दों को जन्नत में 72 हूर मिलेंगी तो औरतों को 72 मर्द मिलेंगे। इसमें उन्होंने इस्लाम का हवाला भी किया।
हुदा जरीवाला के इस बयान पर उलमा ने कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि इस्लाम से जुड़े विषयों पर अधूरी जानकारी के साथ बयान देने से गलतफहमियां पैदा हो सकती हैं। कहा कि दीन के मसलों पर बात करने से पहले कुरआन और सुन्नत की सही जानकारी और विश्वसनीय दलीलों का होना जरूरी है।
जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक व प्रसिद्ध आलिम मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने कहा कि कुछ लोग बिना पर्याप्त इल्मी तैयारी के टीवी डिबेट और पॉडकास्ट में दीन से जुड़े सवालों के जवाब देने लगते हैं। इससे इस्लाम की शिक्षाओं के बारे में गलत धारणाएं बन सकती हैं।
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उन्होंने हुदा जरीवाला के पॉडकास्ट में जन्नत की हूरों से संबंधित दिए गए बयान पर कहा कि ऐसे संवेदनशील धार्मिक विषयों पर टिप्पणी करने से पहले सही जानकारी हासिल करनी चाहिए। दीन की नुमाइंदगी करना बड़ी जिम्मेदारी है।
मदरसा जामिया शेखुल हिंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती असद कासमी ने कहा कि धार्मिक विषयों को सनसनीखेज बहस का हिस्सा बनाने के बजाय इल्म, अदब और संजीदगी के साथ पेश किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस्लाम सवाल करने से नहीं रोकता, लेकिन जवाब देते समय सही जानकारी और ठोस दलील जरूरी है।
मुफ्ती असद कासमी ने कहा कि सोशल मीडिया और पॉडकास्ट पर दीन से जुड़े विषयों पर बोलने वालों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, ताकि अधूरी जानकारी से गलतफहमियां न फैलें।
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देवबंद। यूट्यूबर और सामाजिक कार्यकर्ता हुदा जरीवाला के एक पॉडकास्ट में कहा कि अगर मर्दों को जन्नत में 72 हूर मिलेंगी तो औरतों को 72 मर्द मिलेंगे। इसमें उन्होंने इस्लाम का हवाला भी किया।
हुदा जरीवाला के इस बयान पर उलमा ने कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि इस्लाम से जुड़े विषयों पर अधूरी जानकारी के साथ बयान देने से गलतफहमियां पैदा हो सकती हैं। कहा कि दीन के मसलों पर बात करने से पहले कुरआन और सुन्नत की सही जानकारी और विश्वसनीय दलीलों का होना जरूरी है।
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जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक व प्रसिद्ध आलिम मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने कहा कि कुछ लोग बिना पर्याप्त इल्मी तैयारी के टीवी डिबेट और पॉडकास्ट में दीन से जुड़े सवालों के जवाब देने लगते हैं। इससे इस्लाम की शिक्षाओं के बारे में गलत धारणाएं बन सकती हैं।
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उन्होंने हुदा जरीवाला के पॉडकास्ट में जन्नत की हूरों से संबंधित दिए गए बयान पर कहा कि ऐसे संवेदनशील धार्मिक विषयों पर टिप्पणी करने से पहले सही जानकारी हासिल करनी चाहिए। दीन की नुमाइंदगी करना बड़ी जिम्मेदारी है।
मदरसा जामिया शेखुल हिंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती असद कासमी ने कहा कि धार्मिक विषयों को सनसनीखेज बहस का हिस्सा बनाने के बजाय इल्म, अदब और संजीदगी के साथ पेश किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस्लाम सवाल करने से नहीं रोकता, लेकिन जवाब देते समय सही जानकारी और ठोस दलील जरूरी है।
मुफ्ती असद कासमी ने कहा कि सोशल मीडिया और पॉडकास्ट पर दीन से जुड़े विषयों पर बोलने वालों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, ताकि अधूरी जानकारी से गलतफहमियां न फैलें।