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आज का शब्द: प्रवाल और धर्मवीर भारती की कविता- दो अनजान नदी की नावें

आज का शब्द
                
                                                         
                            'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- प्रवाल, जिसका अर्थ है- मूँगा, वृक्ष के नए व कोमल पत्ते। प्रस्तुत है धर्मवीर भारती की कविता- दो अनजान नदी की नावें 
                                                                 
                            

ये अनजान नदी की नावें
जादू के से पाल
उड़ातीं
आतीं
मन्थर चाल ।

नीलम पर किरणों
की साँझी
एक न डोरी
एक न माँझी,
फिर भी लाद निरन्तर लातीं
सेन्दूर और प्रवाल !

कुछ समीप की
कुछ सुदूर की,
कुछ चन्दन की
कुछ कपूर की,
कुछ में गेरू
कुछ में रेशम
कुछ में केवल जाल ।

ये अनजान नदी की नावें
जादू के से पाल
उड़ातीं
आतीं
मन्थर चाल ।

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5 hours ago

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