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Saharanpur News: यमुना के साथ नहीं खिसकेगी सीमा, यूपी-हरियाणा की पक्की होगी सरहद
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यूपी-हरियाणा सीमा विवाद की खबर का फोटोचिलकाना क्षेत्र में बहती यमुना नदी। संवाद
- फोटो : सड़क पर उतर यातायात व्यवस्था संभालती एनसीसी कैडे्टस। स्त्रोत: पुलिस
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। यमुना के बदलते बहाव के साथ यूपी-हरियाणा के बीच जमीन की सीमा को लेकर होने वाले विवाद पर अब विराम लगने की उम्मीद है। दशकों से चले आ रहे इस विवाद को खत्म करने के लिए सर्वे ऑफ इंडिया (एसओआई) ने सीमा निर्धारण शुरू किया है। करीब 25 प्रतिशत सर्वे पूरा हो चुका है। सहारनपुर से लगभग 50 किमी लंबी सीमा पर 330 पिलर लगाए जाने हैं। इनमें 164 पिलर यूपी और बाकी हरियाणा लगाएगा। पिलर जमीन के अंदर 55 फीट तक लगाए जाएंगे, ताकि नदी का बहाव बदलने पर भी सीमा की पहचान बनी रहे। जून 2027 तक यह काम पूरा करना है।
मान्यता है कि यमुना नदी प्रत्येक वर्ष अपना क्षेत्र बदलती है। एक बार वह हरियाणा तो अगली बार यूपी की तरफ बढ़ जाती है। इससे यमुना के तटीय खेतों के मालिक किसानों की जमीनें प्रभावित हो रही हैं। कहीं किसानों की सैकड़ों बीघा जमीन घट गई है तो कहीं बढ़ गई है। इसे लेकर दोनों राज्यों के किसानों में अक्सर टकराव रहता है। दोनों राज्य की सरकारों को भी इसमें कूदना पड़ता है।
हरियाणा की ओर से मामला उच्चतम न्यायालय तक उठाया गया। इसके बाद सर्वे ऑफ इंडिया से सर्वे कराकर सीमा तय करने का फैसला लिया गया है। सर्वे ऑफ इंडिया की टीम फिलहाल सीमा निर्धारित कर उसमें सीमेंट के खंभे लगा रही है। उसके बाद गड्ढे खोदवाकर उसमें सीमेंट के 55 फीट गहरे पिलर बनाए जाएंगे। कुल 21 मीटर यानी 68 फीट लंबे पिलर 55 फीट जमीन के अंदर और 13 फीट बाहर रहेंगे। पिलर की चौड़ाई एक मीटर रहेगी और वह गोल होगा।
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सहारनपुर में नसरुल्लागढ़ से शामली की सीमा तक पिलर बनाए जाएंगे। सर्वे ऑफ इंडिया की टीम जिन गन्ने के खेतों के बीच में जाकर निशान लगा रहे हैं। उन्हें यूपी के किसान जोत रहे हैं। आधे खेत हरियाणा के हिस्से में जा रहे हैं। यानी इन दिनों यमुना नदी हरियाणा की सीमा के अंदर बह रही है। इसमें हरियाणा की भूमि का बड़ा क्षेत्रफल यूपी में आ गया है। (संवाद)
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सहारनपुर। यमुना के बदलते बहाव के साथ यूपी-हरियाणा के बीच जमीन की सीमा को लेकर होने वाले विवाद पर अब विराम लगने की उम्मीद है। दशकों से चले आ रहे इस विवाद को खत्म करने के लिए सर्वे ऑफ इंडिया (एसओआई) ने सीमा निर्धारण शुरू किया है। करीब 25 प्रतिशत सर्वे पूरा हो चुका है। सहारनपुर से लगभग 50 किमी लंबी सीमा पर 330 पिलर लगाए जाने हैं। इनमें 164 पिलर यूपी और बाकी हरियाणा लगाएगा। पिलर जमीन के अंदर 55 फीट तक लगाए जाएंगे, ताकि नदी का बहाव बदलने पर भी सीमा की पहचान बनी रहे। जून 2027 तक यह काम पूरा करना है।
मान्यता है कि यमुना नदी प्रत्येक वर्ष अपना क्षेत्र बदलती है। एक बार वह हरियाणा तो अगली बार यूपी की तरफ बढ़ जाती है। इससे यमुना के तटीय खेतों के मालिक किसानों की जमीनें प्रभावित हो रही हैं। कहीं किसानों की सैकड़ों बीघा जमीन घट गई है तो कहीं बढ़ गई है। इसे लेकर दोनों राज्यों के किसानों में अक्सर टकराव रहता है। दोनों राज्य की सरकारों को भी इसमें कूदना पड़ता है।
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हरियाणा की ओर से मामला उच्चतम न्यायालय तक उठाया गया। इसके बाद सर्वे ऑफ इंडिया से सर्वे कराकर सीमा तय करने का फैसला लिया गया है। सर्वे ऑफ इंडिया की टीम फिलहाल सीमा निर्धारित कर उसमें सीमेंट के खंभे लगा रही है। उसके बाद गड्ढे खोदवाकर उसमें सीमेंट के 55 फीट गहरे पिलर बनाए जाएंगे। कुल 21 मीटर यानी 68 फीट लंबे पिलर 55 फीट जमीन के अंदर और 13 फीट बाहर रहेंगे। पिलर की चौड़ाई एक मीटर रहेगी और वह गोल होगा।
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सहारनपुर में नसरुल्लागढ़ से शामली की सीमा तक पिलर बनाए जाएंगे। सर्वे ऑफ इंडिया की टीम जिन गन्ने के खेतों के बीच में जाकर निशान लगा रहे हैं। उन्हें यूपी के किसान जोत रहे हैं। आधे खेत हरियाणा के हिस्से में जा रहे हैं। यानी इन दिनों यमुना नदी हरियाणा की सीमा के अंदर बह रही है। इसमें हरियाणा की भूमि का बड़ा क्षेत्रफल यूपी में आ गया है। (संवाद)