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खादर में विकास के दावों को मुंह चिढ़ा रहीं समस्याएं
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कुंडा कलां में बदहाल पड़ा रास्ता और उस पर भरा पानी
- फोटो : SAHARANPUR
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गंगोह (सहारनपुर)। विकास के तमाम दावों के बीच गंगोह खादर के गांवों में आज भी ग्रामीण नारकीय जिंदगी जीने को मजबूर हैं। अधिकांश गांवों में जल निकासी बड़ी समस्या है। इसके चलते सड़कों ने गंदे पानी के तालाब का रूप ले रखा है। ग्रामीणों को इसी गंदगी के बीच होकर गुजरना पड़ता है। पेश है गंगोह खादर के गांवों पर एक रिपोर्ट...
कुंडा कलां से होती है संक्रामक रोगों की शुरुआत
हरियाणा की सीमा से सटे 20 हजार की आबादी वाले गांव कुंडा कला में हर तरफ गंदगी के अंबार लगे हैं। जल निकासी की व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त है। ज्यादातर सड़कों पर जलभराव और कीचड़ की समस्या है। इनमें मच्छर पनपते रहते हैं। जनपद में संक्रामक रोगों के फैलने की शुरुआत सबसे पहले इसी गांव से होती है। हर साल बुखार और अन्य बीमारियों से कई लोग अकाल मौत का शिकार हो जाते हैं। गांव के मसरुर राणा, इलियास अहमद, इमरान, गुल्लू, इकबाल आदि का कहना है कि चुनाव में सफाई और जल निकासी बड़ा मुद्दा होता है। सभी प्रत्याशी जी का जंजाल बन चुकी इस समस्या से निजात दिलाने के वादे करते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद कोई सुध नहीं लेता।
भेदभाव के शिकार हैं शाहपुरवासी
आठ हजार की आबादी वाली शाहपुर ग्राम पंचायत में उमरपुर मजरा भी जुड़ा है। ज्यादातर प्रधान उमरपुर से ही बनते हैं। शाहपुर वासियों की पीड़ा है कि उमरपुर से बनने वाला प्रधान उनके गांव की अनदेखी करता है। इसी कारण उनके गांव में आज तक कोई भी विकास कार्य नहीं हो सका। अधिकतर नालियां कच्ची हैं। आधा दर्जन गांवों सहित हरियाणा राज्य को जोड़ने वाले गांव से गुजर रहे मुख्य रास्ते पर बारह महीने पानी भरा रहता है। गांव में सफाई व्यवस्था भी पटरी से उतरी है। गांव के अनीश मल्लाह, इंतजार, मुंतजिर, इशाक आदि ने बताया कि उनके गांव में प्रधानी न आने के चलते भेदभाव बरता जाता है। गांव में जूनियर हाईस्कूल, बरातघर भी नहीं है जिसकी लंबे समय से मांग चली आ रही है।
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आलमपुर की सभी सड़कें पड़ी हैं खस्ताहाल
नदी के किनारे बसे 10 हजार की मिश्रित आबादी वाली ग्राम पंचायत आलमपुर में सड़क सबसे बड़ा मुद्दा है। गांव की अधिकांश खस्ताहाल सड़कों में बड़े-बड़े गड्ढे बने हैं। हैंडपंपों का पानी दूषित हो चुका है। ऐसे में स्वच्छ पेयजल की भी बड़ी किल्लत है। स्ट्रीट लाइटें भी आज तक गांव में नहीं लगाई गई। ग्रामीण मांगेराम, सुनील सिंह, इकराम, आबिद आदि का कहना है कि पिछली बार भी इस उम्मीद के साथ वोट दिया था कि सड़कें सुधर जाएंगी लेकिन हालात जस के तस हैं।
ग्राम बिलासपुर की आबादी करीब 10 हजार है। इसके मुख्य मार्ग पर नालियों का गंदा पानी भरा है। इसी पर इंटर कॉलेज भी स्थित है। इसी रास्ते सैकड़ों छात्र-छात्राओं को गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है। अनुज कुमार, रोबिन सिंह, चौ. छत्रपाल सिंह, पंकज, रोबिन आदि ने बताया कि गांव में तालाब नहीं है जिस कारण गंदे पानी की निकासी नहीं हो पाती है। हैंडपंपों का पानी दूषित हो चुका है। लंबे समय से पानी की टंकी की मांग की जा रही है। गांव में स्ट्रीट लाइटें न होने से रात भर गलियों में अंधेरा पसरा रहता है।
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कुंडा कलां से होती है संक्रामक रोगों की शुरुआत
हरियाणा की सीमा से सटे 20 हजार की आबादी वाले गांव कुंडा कला में हर तरफ गंदगी के अंबार लगे हैं। जल निकासी की व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त है। ज्यादातर सड़कों पर जलभराव और कीचड़ की समस्या है। इनमें मच्छर पनपते रहते हैं। जनपद में संक्रामक रोगों के फैलने की शुरुआत सबसे पहले इसी गांव से होती है। हर साल बुखार और अन्य बीमारियों से कई लोग अकाल मौत का शिकार हो जाते हैं। गांव के मसरुर राणा, इलियास अहमद, इमरान, गुल्लू, इकबाल आदि का कहना है कि चुनाव में सफाई और जल निकासी बड़ा मुद्दा होता है। सभी प्रत्याशी जी का जंजाल बन चुकी इस समस्या से निजात दिलाने के वादे करते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद कोई सुध नहीं लेता।
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भेदभाव के शिकार हैं शाहपुरवासी
आठ हजार की आबादी वाली शाहपुर ग्राम पंचायत में उमरपुर मजरा भी जुड़ा है। ज्यादातर प्रधान उमरपुर से ही बनते हैं। शाहपुर वासियों की पीड़ा है कि उमरपुर से बनने वाला प्रधान उनके गांव की अनदेखी करता है। इसी कारण उनके गांव में आज तक कोई भी विकास कार्य नहीं हो सका। अधिकतर नालियां कच्ची हैं। आधा दर्जन गांवों सहित हरियाणा राज्य को जोड़ने वाले गांव से गुजर रहे मुख्य रास्ते पर बारह महीने पानी भरा रहता है। गांव में सफाई व्यवस्था भी पटरी से उतरी है। गांव के अनीश मल्लाह, इंतजार, मुंतजिर, इशाक आदि ने बताया कि उनके गांव में प्रधानी न आने के चलते भेदभाव बरता जाता है। गांव में जूनियर हाईस्कूल, बरातघर भी नहीं है जिसकी लंबे समय से मांग चली आ रही है।
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आलमपुर की सभी सड़कें पड़ी हैं खस्ताहाल
नदी के किनारे बसे 10 हजार की मिश्रित आबादी वाली ग्राम पंचायत आलमपुर में सड़क सबसे बड़ा मुद्दा है। गांव की अधिकांश खस्ताहाल सड़कों में बड़े-बड़े गड्ढे बने हैं। हैंडपंपों का पानी दूषित हो चुका है। ऐसे में स्वच्छ पेयजल की भी बड़ी किल्लत है। स्ट्रीट लाइटें भी आज तक गांव में नहीं लगाई गई। ग्रामीण मांगेराम, सुनील सिंह, इकराम, आबिद आदि का कहना है कि पिछली बार भी इस उम्मीद के साथ वोट दिया था कि सड़कें सुधर जाएंगी लेकिन हालात जस के तस हैं।
ग्राम बिलासपुर की आबादी करीब 10 हजार है। इसके मुख्य मार्ग पर नालियों का गंदा पानी भरा है। इसी पर इंटर कॉलेज भी स्थित है। इसी रास्ते सैकड़ों छात्र-छात्राओं को गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है। अनुज कुमार, रोबिन सिंह, चौ. छत्रपाल सिंह, पंकज, रोबिन आदि ने बताया कि गांव में तालाब नहीं है जिस कारण गंदे पानी की निकासी नहीं हो पाती है। हैंडपंपों का पानी दूषित हो चुका है। लंबे समय से पानी की टंकी की मांग की जा रही है। गांव में स्ट्रीट लाइटें न होने से रात भर गलियों में अंधेरा पसरा रहता है।

शाहपुर गांव के मुख्य रास्ते परे भरा गंदा पानी- फोटो : SAHARANPUR

शाहपुर में गंदगी से अटा पड़ा तालाब- फोटो : SAHARANPUR