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सर्दियों में बढ़ रही टांसिलाइटिस की समस्या
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सहारनपुर। सर्दियां शुरू हो चुकी है, जिसके साथ ही बच्चों में टांसिलाइटिस की समस्या शुरू हो चुकी है। चिकित्सक इसको बच्चों में मिलने वाली कॉमन समस्या बताते हैं, मगर यह बीमारी बच्चों के लिए काफी तकलीफ वाली है, जो रात में बच्चों को ठीक से सोने तक नहीं देती।
जिला अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में प्रतिदिन 70 से 80 मरीज पहुंचते हैं, जिनमें टांसिलाइटिस के मरीजों की संख्या 10 से 15 प्रतिशत यानी 10 मरीज रोजाना पहुंच रहे हैं। एसबीडी जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एके चौधरी ने बताया कि 05 से 15 साल के बच्चों में यह बीमारी सामान्य तौर पर हो जाती है। बच्चों में टांसिलाइटिस की शुरूआत गले के दर्द और कई तरह के इंफेक्शन के साथ होती है, जो बीमारी के शुरूआती लक्षण हैं। समय पर इलाज ना कराया जाए तो इसका दर्द बढ़ सकता है, जिसके साथ बुखार भी आ सकता है। उनकी सलाह है कि जब भी किसी बच्चे को टांसिल की समस्या हो तो तुरंत विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए।
क्या होता है टांसिलाइटिस
गले के दोनों तरफ अंग हैं, जिन्हें टांसिल्स कहा जाता है। किसी तरह के बैक्टीरिया या इंफेक्शन के संपर्क में आने पर इनमें सूजन आ जाती है, जिससे कुछ भी खाते-पीते समय दर्द होता है। इनका रंग गुलाबी होता है। इंफेक्शन होने पर यह सुर्ख लाल हो जाते हैं और इन पर सफेद स्पॉट भी दिखाई देने लगते हैं। टांसिल होना इस बात का संकेत होता है कि आपका शरीर संक्रमण की चपेट में आ चुका है।
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ऐसे होते हैं लक्षण
- गले में दर्द और खराश होना।
- गले से लेकर कानों तक दर्द होना।
- निगलने में दिक्कत होना।
- बुखार आना।
- आवाज प्रभावित होना।
- गले में दर्द के साथ सिरदर्द होना।
- टांसिल्स में दर्द होना और गला सूजना।
- छोटे बच्चों में इसके कारण पेट में दर्द जैसे लक्षण भी होते हैं।
- गर्दन में दर्द
बचाव को यह करें
- विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह से इलाज लें।
- साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें।
- ठंडी चीजें जैसे आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक, पेस्ट्री, केक के सेवन से बचें।
- खट्टा जैसे नींबू, शिकंजी, संतरा, अचार खाने से बचें।
- फास्ट फूड खाने से परहेज करें।
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जिला अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में प्रतिदिन 70 से 80 मरीज पहुंचते हैं, जिनमें टांसिलाइटिस के मरीजों की संख्या 10 से 15 प्रतिशत यानी 10 मरीज रोजाना पहुंच रहे हैं। एसबीडी जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एके चौधरी ने बताया कि 05 से 15 साल के बच्चों में यह बीमारी सामान्य तौर पर हो जाती है। बच्चों में टांसिलाइटिस की शुरूआत गले के दर्द और कई तरह के इंफेक्शन के साथ होती है, जो बीमारी के शुरूआती लक्षण हैं। समय पर इलाज ना कराया जाए तो इसका दर्द बढ़ सकता है, जिसके साथ बुखार भी आ सकता है। उनकी सलाह है कि जब भी किसी बच्चे को टांसिल की समस्या हो तो तुरंत विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए।
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क्या होता है टांसिलाइटिस
गले के दोनों तरफ अंग हैं, जिन्हें टांसिल्स कहा जाता है। किसी तरह के बैक्टीरिया या इंफेक्शन के संपर्क में आने पर इनमें सूजन आ जाती है, जिससे कुछ भी खाते-पीते समय दर्द होता है। इनका रंग गुलाबी होता है। इंफेक्शन होने पर यह सुर्ख लाल हो जाते हैं और इन पर सफेद स्पॉट भी दिखाई देने लगते हैं। टांसिल होना इस बात का संकेत होता है कि आपका शरीर संक्रमण की चपेट में आ चुका है।
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ऐसे होते हैं लक्षण
- गले में दर्द और खराश होना।
- गले से लेकर कानों तक दर्द होना।
- निगलने में दिक्कत होना।
- बुखार आना।
- आवाज प्रभावित होना।
- गले में दर्द के साथ सिरदर्द होना।
- टांसिल्स में दर्द होना और गला सूजना।
- छोटे बच्चों में इसके कारण पेट में दर्द जैसे लक्षण भी होते हैं।
- गर्दन में दर्द
बचाव को यह करें
- विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह से इलाज लें।
- साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें।
- ठंडी चीजें जैसे आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक, पेस्ट्री, केक के सेवन से बचें।
- खट्टा जैसे नींबू, शिकंजी, संतरा, अचार खाने से बचें।
- फास्ट फूड खाने से परहेज करें।