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Saharanpur News: कम छात्र संख्या वाले परिषदीय विद्यालयों को मर्ज करने की तैयारी
Sat, 17 Aug 2024 04:07 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sat, 17 Aug 2024 04:07 AM IST
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सहारनपुर। बेहद कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों को मर्ज करने की तैयारी है। जनपद में करीब 55 ऐसे विद्यालय हैं, जिनमें संख्या 20 और दस से कम है। ऐसे विद्यालयों के शिक्षकों और विद्यार्थियों को नजदीकी विद्यालयों से संबद्ध किया जाएगा।
परिषदीय विद्यालयों को पहले भी मर्ज किया जा चुका है। पहले एक ही परिसर में संचालित एक से अधिक विद्यालयों का विलय कर एक विद्यालय बनाया गया। एक परिसर के विद्यालयों को मर्ज करने के पीछे भी कारण छात्र संख्या कम होना था। दो या तीन की जगह एक विद्यालय करने से व्यवस्था एक जगह आई, जिससे विभाग की परेशानी भी कम हुई। अब बेसिक शिक्षा परिषद एक ही क्षेत्र में कम संख्या वाले विद्यालयों को एक विद्यालय में करने जा रही है। जनपद में बीते दिनों बेसिक शिक्षा विभाग ने 44 ऐसे विद्यालय चिह्नित किए थे, जिनमें छात्र संख्या 20 से कम थी, जबकि 11 विद्यालय ऐसे चिह्नित किए गए थे, जिनमें छात्र संख्या 10 से कम थी। इन 11 विद्यालयाें को छात्र संख्या नहीं बढ़ाने पर नोटिस भी जारी किए गए थे।
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1900 की जगह रह गए 1438 विद्यालय
जनपद में पांच वर्ष पहले 1900 से अधिक परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय थे। एक ही परिसर में संचालित विद्यालयों का विलय होने के बाद इनकी संख्या 1,438 रह गई। यानी 462 से अधिक विद्यालय कम हो गए। इस हिसाब से इतने ही विद्यालयों का विलय हुआ है। विद्यालयों की संख्या कम होने से विभाग को व्यवस्था संभालने में आसानी हुई है।
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करीब 30 हजार घटी है छात्र संख्या
वर्ष 2022-23 में जनपद के 1,438 परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में छात्र संख्या 2.42 लाख थी, लेकिन इस बार तमाम अभियान चलाने के बावजूद पंजीकृत छात्रों की संख्या 2.05 लाख के करीब ही रह गई है। परिषदीय विद्यालयों में लगातार छात्र संख्या घटने के कारण ही विद्यालयों की मर्ज करने की शुरुआत हुई है।
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कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों को नजदीकी बड़े विद्यालयों में मर्ज करने की तैयारी विभागीय स्तर से चल रही है। ऐसा जल्द ही होगा, लेकिन अभी तक कोई लिखित आदेश नहीं आया है।
- कोमल, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
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परिषदीय विद्यालयों को पहले भी मर्ज किया जा चुका है। पहले एक ही परिसर में संचालित एक से अधिक विद्यालयों का विलय कर एक विद्यालय बनाया गया। एक परिसर के विद्यालयों को मर्ज करने के पीछे भी कारण छात्र संख्या कम होना था। दो या तीन की जगह एक विद्यालय करने से व्यवस्था एक जगह आई, जिससे विभाग की परेशानी भी कम हुई। अब बेसिक शिक्षा परिषद एक ही क्षेत्र में कम संख्या वाले विद्यालयों को एक विद्यालय में करने जा रही है। जनपद में बीते दिनों बेसिक शिक्षा विभाग ने 44 ऐसे विद्यालय चिह्नित किए थे, जिनमें छात्र संख्या 20 से कम थी, जबकि 11 विद्यालय ऐसे चिह्नित किए गए थे, जिनमें छात्र संख्या 10 से कम थी। इन 11 विद्यालयाें को छात्र संख्या नहीं बढ़ाने पर नोटिस भी जारी किए गए थे।
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1900 की जगह रह गए 1438 विद्यालय
जनपद में पांच वर्ष पहले 1900 से अधिक परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय थे। एक ही परिसर में संचालित विद्यालयों का विलय होने के बाद इनकी संख्या 1,438 रह गई। यानी 462 से अधिक विद्यालय कम हो गए। इस हिसाब से इतने ही विद्यालयों का विलय हुआ है। विद्यालयों की संख्या कम होने से विभाग को व्यवस्था संभालने में आसानी हुई है।
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करीब 30 हजार घटी है छात्र संख्या
वर्ष 2022-23 में जनपद के 1,438 परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में छात्र संख्या 2.42 लाख थी, लेकिन इस बार तमाम अभियान चलाने के बावजूद पंजीकृत छात्रों की संख्या 2.05 लाख के करीब ही रह गई है। परिषदीय विद्यालयों में लगातार छात्र संख्या घटने के कारण ही विद्यालयों की मर्ज करने की शुरुआत हुई है।
कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों को नजदीकी बड़े विद्यालयों में मर्ज करने की तैयारी विभागीय स्तर से चल रही है। ऐसा जल्द ही होगा, लेकिन अभी तक कोई लिखित आदेश नहीं आया है।
- कोमल, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी