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Saharanpur News: गर्भवती का गर्भाशय फटा, मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने बचाई जान
Sat, 04 Oct 2025 06:10 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sat, 04 Oct 2025 06:10 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
सरसावा। राजकीय मेडिकल कॉलेज पिलखनी में नौ माह की गर्भवती एक महिला की कठिन परिस्थितियों में जान बचाई गई। महिला के गर्भाशय फटने के कारण शिशु भी अंदर ही मर गया था। डॉक्टरों ने कई घंटे की सर्जरी के बाद महिला को सुरक्षित किया।
शनिवार को मेडिकल कॉलेज पिलखनी में स्त्री रोग एवं प्रसूति विभाग ने महिला की कठिन सर्जरी को अंजाम दिया। गाइनी विभागध्यक्ष डॉ. रश्मि ने बताया कि सहारनपुर क्षेत्र की एक 32 वर्षीय महिला को बेहद गंभीर परिस्थितियों में परिजन लाए। जांच करने पर पाया कि महिला नौ माह की गर्भवती है जिसका गर्भाशय काफी समय पहले फट चुका था। बच्चे की धड़कन भी नहीं चल रहीं थी। खून की कमी के कारण महिला का हीमोग्लोबिन घटकर जान का खतरा बढ़ा चुका था।
प्राचार्य डॉ. सुधीर राठी के नेतृत्व में डॉक्टरों की एक टीम तैयार हुई। जिसने कई घंटे की सर्जरी के बाद मृत शिशु को निकालकर महिला की सर्जरी करते हुए सुरक्षित किया गया। महिला खतरे से बाहर है। बताया कि यह बिल्कुल अलग तरह का हाई रिस्क केस था जिसमें गर्भावस्था का समय पूर्ण होने के बाद ऐसी स्थिति सामने आई है। डॉ. आयशा रहमान, डॉ. मोनिका, डॉ. आस्था, डॉ. संदीप, डॉ. दिव्या आदि के अलावा पैरामेडिकल स्टाफ ने भी अहम भूमिका निभाई।
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सरसावा। राजकीय मेडिकल कॉलेज पिलखनी में नौ माह की गर्भवती एक महिला की कठिन परिस्थितियों में जान बचाई गई। महिला के गर्भाशय फटने के कारण शिशु भी अंदर ही मर गया था। डॉक्टरों ने कई घंटे की सर्जरी के बाद महिला को सुरक्षित किया।
शनिवार को मेडिकल कॉलेज पिलखनी में स्त्री रोग एवं प्रसूति विभाग ने महिला की कठिन सर्जरी को अंजाम दिया। गाइनी विभागध्यक्ष डॉ. रश्मि ने बताया कि सहारनपुर क्षेत्र की एक 32 वर्षीय महिला को बेहद गंभीर परिस्थितियों में परिजन लाए। जांच करने पर पाया कि महिला नौ माह की गर्भवती है जिसका गर्भाशय काफी समय पहले फट चुका था। बच्चे की धड़कन भी नहीं चल रहीं थी। खून की कमी के कारण महिला का हीमोग्लोबिन घटकर जान का खतरा बढ़ा चुका था।
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प्राचार्य डॉ. सुधीर राठी के नेतृत्व में डॉक्टरों की एक टीम तैयार हुई। जिसने कई घंटे की सर्जरी के बाद मृत शिशु को निकालकर महिला की सर्जरी करते हुए सुरक्षित किया गया। महिला खतरे से बाहर है। बताया कि यह बिल्कुल अलग तरह का हाई रिस्क केस था जिसमें गर्भावस्था का समय पूर्ण होने के बाद ऐसी स्थिति सामने आई है। डॉ. आयशा रहमान, डॉ. मोनिका, डॉ. आस्था, डॉ. संदीप, डॉ. दिव्या आदि के अलावा पैरामेडिकल स्टाफ ने भी अहम भूमिका निभाई।
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