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बढ़ रहा प्रदूषण, कम नहीं हो रहे पराली जलाने के मामले
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- मंडल के तीनों जिले में अब तक 94 मामले पकड़े गए
- सेटेलाइट से पकड़े जा रहे हैं पराली जलाने के मामले
अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर। प्रदूषण बढ़ने से रोकने के लिए फसल अवशेष जलाने से रोकने को खूब कवायद हो रही है। बावजूद पराली जलाने के मामले कम नहीं हो रहे हैं। अभी तक मंडल के तीनों जिलों में फसल अवशेष जलाने के 94 मामले पकड़े जा चुके हैं। सहारनपुर जिले में पराली जलाने के 63 मामले पकड़े जा चुके हैं, जो बीते तीन साल के आंकड़ों में सबसे ज्यादा हैं।
फसल अवशेष जलाने वालों की धरपकड़ के लिए इस बार सेटेलाइट की भी मदद ली जा रही है। पराली जलाने के अधिकांश मामले सेटेलाइट से ही पकड़ में आए हैं। संयुक्त कृषि निदेशक दर्शन सिंह राजपूत के मुताबिक सेटेलाइट से जितने भी मामले पराली जलाने के पकड़ में आए हैं, उनमें आरोपियों के खिलाफ जुर्माना लगाने सहित विधिक कार्रवाई भी कराई गई है।
इसलिए पकड़ में नहीं आती छोटी घटनाएं
सेटेलाइट से अभी तक पराली जलाने के ऐसे ही मामले पकड़ में आए, जहां किसान द्वारा कई बीघा खेत में फसल अवशेष को जलाया गया। कृषि विभाग के अधिकारियों की मानें तो, सेटेलाइट के जरिये बड़े क्षेत्रफल में आग और उससे उठने वाला धुआं ही पकड़ में आता है।
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दो मामले उत्तराखंड सीमा के भी पकड़े
गत छह नवंबर को कृषि विभाग को मिली रिपोर्ट के मुताबिक दो मामले उत्तराखंड सीमा के भी पकड़ में आए। चूंकि सहारनपुर जिले की सीमा उत्तराखंड से लगती है। इसलिए उत्तराखंड की सीमा में हुई पराली जलाने की घटनाओं के संबंध में स्थानीय स्तर पर कार्रवाई नहीं हो सकी।
पांच साल में फसल अवशेष जलाने के मामले
जनपद ---- वर्ष 2016 -- 2017 ---- 2018 --- 2019 --- 2020
सहारनपुर --- 70 ------ 79---------45 -------59 ----- 63
मुजफ्फरनगर -- 89 --- 82 ------ 26 --------20------ 10
शामली -------- 00------00------00----------19------21
योग ----------159------161-----71----------98------94
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- सेटेलाइट से पकड़े जा रहे हैं पराली जलाने के मामले
अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर। प्रदूषण बढ़ने से रोकने के लिए फसल अवशेष जलाने से रोकने को खूब कवायद हो रही है। बावजूद पराली जलाने के मामले कम नहीं हो रहे हैं। अभी तक मंडल के तीनों जिलों में फसल अवशेष जलाने के 94 मामले पकड़े जा चुके हैं। सहारनपुर जिले में पराली जलाने के 63 मामले पकड़े जा चुके हैं, जो बीते तीन साल के आंकड़ों में सबसे ज्यादा हैं।
फसल अवशेष जलाने वालों की धरपकड़ के लिए इस बार सेटेलाइट की भी मदद ली जा रही है। पराली जलाने के अधिकांश मामले सेटेलाइट से ही पकड़ में आए हैं। संयुक्त कृषि निदेशक दर्शन सिंह राजपूत के मुताबिक सेटेलाइट से जितने भी मामले पराली जलाने के पकड़ में आए हैं, उनमें आरोपियों के खिलाफ जुर्माना लगाने सहित विधिक कार्रवाई भी कराई गई है।
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इसलिए पकड़ में नहीं आती छोटी घटनाएं
सेटेलाइट से अभी तक पराली जलाने के ऐसे ही मामले पकड़ में आए, जहां किसान द्वारा कई बीघा खेत में फसल अवशेष को जलाया गया। कृषि विभाग के अधिकारियों की मानें तो, सेटेलाइट के जरिये बड़े क्षेत्रफल में आग और उससे उठने वाला धुआं ही पकड़ में आता है।
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दो मामले उत्तराखंड सीमा के भी पकड़े
गत छह नवंबर को कृषि विभाग को मिली रिपोर्ट के मुताबिक दो मामले उत्तराखंड सीमा के भी पकड़ में आए। चूंकि सहारनपुर जिले की सीमा उत्तराखंड से लगती है। इसलिए उत्तराखंड की सीमा में हुई पराली जलाने की घटनाओं के संबंध में स्थानीय स्तर पर कार्रवाई नहीं हो सकी।
पांच साल में फसल अवशेष जलाने के मामले
जनपद ---- वर्ष 2016 -- 2017 ---- 2018 --- 2019 --- 2020
सहारनपुर --- 70 ------ 79---------45 -------59 ----- 63
मुजफ्फरनगर -- 89 --- 82 ------ 26 --------20------ 10
शामली -------- 00------00------00----------19------21
योग ----------159------161-----71----------98------94