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राजनीति ने की जुड़वा भाइयों की राहें अलग
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नोमान मसूद
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। राजनीति ने काजी परिवार के जुड़वा भाइयों इमरान मसूद और नोमान मसूद की राजनीतिक राहें अलग कर दीं। एक ही दिन जहां इमरान मसूद ने कांग्रेस छोड़ कर सपा में जाने की घोषणा की वहीं नोमान मसूद बसपा में शामिल हो गए। दोनों भाइयों की अलग राजनीतिक राहें विधानसभा चुनाव में नए समीकरण बनाएंगी।
इमरान मसूद जिले के कद्दावर नेता हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इमरान के सपा में शामिल होने से विधानसभा चुनाव में नए समीकरण बनेंगे। सपा जिलाध्यक्ष चौधरी रुद्रसेन का भी कहना है कि इससे पार्टी को लाभ होगा।
नोमान मसूद भी कांग्रेसी रहे हैं। गंगोह के पूर्व चेयरमैन नोमान ने कांग्रेस के टिकट पर 2017 में गंगोह विधानसभा का चुनाव लड़ा था। यहां से विधायक बने भाजपा के प्रदीप चौधरी के 2019 के लोकसभा चुनाव में एमपी बनने पर इसी साल गंगोह सीट पर उप चुनाव हुआ। कांग्रेस ने उप चुनाव में भी नोमान को यहां से चुनाव लड़ाया था, हालांकि वो दोनों बार हार गए। कुछ माह पहले वो कांग्रेस छोड़ कर रालोद में शामिल हुए थे। सोमवार को वो बसपा में चले गए। माना जा रहा है कि इस बार वो गंगोह सीट पर ही बसपा से चुनाव लड़ेेंगे। इमरान का कहना है कि उनका टारगेट अखिलेश यादव के नेतृत्व में सरकार बनवाना है। भाई के बसपा में जाने पर उन्होंने कहा, मेरे समर्थक ही मेरा राजनीतिक परिवार हैं, यदि कोई साथ नहीं चलना चाहता वह उसकी मर्जी है।
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आठ साल बाद हुई सपा में फिर वापसी
सहारनपुर। इमरान मसूद ने आठ साल बाद सपा में वापसी की है। इमरान वर्ष 2007 में मुजफ्फराबाद विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ विधायक बने थे। उन्होंने जगदीश राणा को हराया था। वर्ष 2012 में सपा के टिकट पर नकुड़ विधानसभा से चुनाव लड़े थे, मगर बसपा के डॉक्टर धर्म सिंह सैनी से चुनाव हार गए थे। वर्ष 2014 का लोकसभा चुनाव सहारनपुर सीट पर सपा से लड़ना चाहते थे, लेकिन टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन भाजपा के राघव लखनपाल से हार गए थे। इसके बाद 2017 में उन्होंने नकुड विधानसभा से फिर चुनाव लड़ा, मगर इस बार भी भाजपा के डॉक्टर धर्म सिंह सैनी से पराजित हुए थे। आठ साल बाद इमरान मसूद ने फिर से सपा में वापसी की है।
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इमरान मसूद जिले के कद्दावर नेता हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इमरान के सपा में शामिल होने से विधानसभा चुनाव में नए समीकरण बनेंगे। सपा जिलाध्यक्ष चौधरी रुद्रसेन का भी कहना है कि इससे पार्टी को लाभ होगा।
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नोमान मसूद भी कांग्रेसी रहे हैं। गंगोह के पूर्व चेयरमैन नोमान ने कांग्रेस के टिकट पर 2017 में गंगोह विधानसभा का चुनाव लड़ा था। यहां से विधायक बने भाजपा के प्रदीप चौधरी के 2019 के लोकसभा चुनाव में एमपी बनने पर इसी साल गंगोह सीट पर उप चुनाव हुआ। कांग्रेस ने उप चुनाव में भी नोमान को यहां से चुनाव लड़ाया था, हालांकि वो दोनों बार हार गए। कुछ माह पहले वो कांग्रेस छोड़ कर रालोद में शामिल हुए थे। सोमवार को वो बसपा में चले गए। माना जा रहा है कि इस बार वो गंगोह सीट पर ही बसपा से चुनाव लड़ेेंगे। इमरान का कहना है कि उनका टारगेट अखिलेश यादव के नेतृत्व में सरकार बनवाना है। भाई के बसपा में जाने पर उन्होंने कहा, मेरे समर्थक ही मेरा राजनीतिक परिवार हैं, यदि कोई साथ नहीं चलना चाहता वह उसकी मर्जी है।
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आठ साल बाद हुई सपा में फिर वापसी
सहारनपुर। इमरान मसूद ने आठ साल बाद सपा में वापसी की है। इमरान वर्ष 2007 में मुजफ्फराबाद विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ विधायक बने थे। उन्होंने जगदीश राणा को हराया था। वर्ष 2012 में सपा के टिकट पर नकुड़ विधानसभा से चुनाव लड़े थे, मगर बसपा के डॉक्टर धर्म सिंह सैनी से चुनाव हार गए थे। वर्ष 2014 का लोकसभा चुनाव सहारनपुर सीट पर सपा से लड़ना चाहते थे, लेकिन टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन भाजपा के राघव लखनपाल से हार गए थे। इसके बाद 2017 में उन्होंने नकुड विधानसभा से फिर चुनाव लड़ा, मगर इस बार भी भाजपा के डॉक्टर धर्म सिंह सैनी से पराजित हुए थे। आठ साल बाद इमरान मसूद ने फिर से सपा में वापसी की है।

अंबाला रोड़ स्थित आवास पर पत्रकारो से वार्ता कर सपा में जाने की घोषणा करते इमरान मसूद- फोटो : SAHARANPUR