{"_id":"6102f2648ebc3e58680a96b5","slug":"pledge-to-save-tigers-on-international-tiger-day-saharanpur-news-mrt549620273","type":"story","status":"publish","title_hn":"अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस पर लिया बाघों को बचाने का संकल्प","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस पर लिया बाघों को बचाने का संकल्प
विज्ञापन
छुटमलपुर में इंटरनेशनल टाईगर डे पर जागरुक करते प्राथमिक स्कूल के बच्चें
- फोटो : SAHARANPUR
छुटमलपुर (सहारनपुर)। प्राथमिक विद्यालय छुटमलपुर नंबर दो के ऑनलाइन शिक्षण तथा मोहल्ला पाठशाला के दौरान शिक्षिका अंजलि आर्य ने बच्चों को अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस की जानकारी दी।
बताया कि इसे मनाने का मुख्य उद्देश्य बाघों का संरक्षण करना है। बाघ भारत का राष्ट्रीय पशु है। इसे शक्ति, सतर्कता, बुद्धि और धैर्य का प्रतीक माना जाता है। बाघ को वन्यजीवों की लुप्त होती प्रजाति में रखा गया है परंतु राहत की बात यह है कि सेव टाइगर जैसे अभियानों के द्वारा बाघों की संख्या बढ़ रही है। बताया कि साल 2010 में रूस में आयोजित इस शिखर सम्मेलन में इंटरनेशनल डे मनाने का ऐलान किया गया था। तभी से सभी देशों ने 2022 तक बाघों की संख्या को दोगुना करने का उद्देश्य तय किया। उन्होंने बच्चों को बताया कि बाघ का संरक्षण करना बेहद जरूरी है।
देश के 20 राज्यों में कुल 2967 बाघ हैं। इनमें से 1492 बाघ मध्य प्रदेश, कर्नाटक और उत्तराखंड में हैं। यानी सिर्फ तीन राज्यों में ही देश में बाघों की कुल आबादी के 50 फीसदी से ज्यादा बाघ रहते हैं। इस दौरान सनाया, शान, फलक, नव्या, अल्तमस, अलीशा, जेनब, रिजा, असद आदि बच्चों ने बाघ बनकर सेव टाइगर का संदेश दिया। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
बताया कि इसे मनाने का मुख्य उद्देश्य बाघों का संरक्षण करना है। बाघ भारत का राष्ट्रीय पशु है। इसे शक्ति, सतर्कता, बुद्धि और धैर्य का प्रतीक माना जाता है। बाघ को वन्यजीवों की लुप्त होती प्रजाति में रखा गया है परंतु राहत की बात यह है कि सेव टाइगर जैसे अभियानों के द्वारा बाघों की संख्या बढ़ रही है। बताया कि साल 2010 में रूस में आयोजित इस शिखर सम्मेलन में इंटरनेशनल डे मनाने का ऐलान किया गया था। तभी से सभी देशों ने 2022 तक बाघों की संख्या को दोगुना करने का उद्देश्य तय किया। उन्होंने बच्चों को बताया कि बाघ का संरक्षण करना बेहद जरूरी है।
विज्ञापन
देश के 20 राज्यों में कुल 2967 बाघ हैं। इनमें से 1492 बाघ मध्य प्रदेश, कर्नाटक और उत्तराखंड में हैं। यानी सिर्फ तीन राज्यों में ही देश में बाघों की कुल आबादी के 50 फीसदी से ज्यादा बाघ रहते हैं। इस दौरान सनाया, शान, फलक, नव्या, अल्तमस, अलीशा, जेनब, रिजा, असद आदि बच्चों ने बाघ बनकर सेव टाइगर का संदेश दिया। संवाद
विज्ञापन