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Saharanpur News: नगर आयुक्त सहित आठ अधिकारियों के खिलाफ एससी-एसटी कोर्ट में याचिका दायर
Sat, 09 May 2026 12:56 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sat, 09 May 2026 12:56 AM IST
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सहारनपुर। सर्किट हाउस रोड के चौड़ीकरण के लिए अनुसूचित जाति के लोगों के मकान तोड़ने का मामला अधिकारियों की गले की फांस बनता जा रहा है। मामले में नगर आयुक्त और सिटी मजिस्ट्रेट सहित नौ अधिकारियों के खिलाफ एससी-एसटी कोर्ट में दो याचिकाएं दायर की गई है। एक नरेश कुमार और दूसरी हंसराज सिंह की ओर से दायर कराई गई है।
पिछले दिनों शमशेर सिंह गौतम की ओर से संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। अब नरेश कुमार और हंसराज के द्वारा एससी-एसटी कोर्ट में दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई है। अधिवक्ता राजकुमार ने बताया कि नरेश कुमार और हंसराज ने नगर आयुक्त और सिटी मजिस्ट्रेट सहित आठ अधिकारियों तथा 50 अज्ञात लोक सेवकों को विपक्षी बनाया गया है। सभी अधिकारियों से जवाब तलब किया गया है।
इसके लिए 20 मई को पेश होने के लिए कहा गया है, साथ ही जिलाधिकारी को 15 दिन के भीतर जांच आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिवक्ता ने बताया कि जिस जमीन पर बने मकानों को क्षति पहुंचाई गई है। वह जमीन नरेश कुमार और हंसराज सिंह के पिता ने अंग्रेज व्यक्ति पीसी पॉल से 1934 में खरीदी थी, जिसके बैनामे उनके पास हैं। खतौनी में भी नाम दर्ज है। रजबहा उनकी जमीन की सीमा से लगा है। राजकुमार का कहना है कि यदि मुकदमा दर्ज होता है तो प्रत्येक पीड़ित, जिसका नाम मुकदमे में होगा उसे चार-चार लाख रुपये मुआवजे के तौर पर देने होंगे।
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यह है प्रकरण
वीवीआईपी के आगमन को देखते हुए जिला प्रशासन सर्किट हाउस रोड का चौड़ीकरण करा रहा है। चूंकि सड़क के बीचोबीच रजबहा है। ऐसे में इसकी दोनों पटरियों का स्वामित्व सिंचाई विभाग के पास है। सिंचाई विभाग ने ही चौड़ीकरण के लिए अतिक्रमण पर निशान लगाए थे। अतिक्रमणकारियों को खुद अतिक्रमण हटा लेने के लिए चार अप्रैल तक का समय दिया गया था, लेकिन प्रशासन ने चार अप्रैल तक का इंतजार नहीं किया और एक अप्रैल में ही जेसीबी ले जाकर अतिक्रमण बताते हुए दर्जनों लोगों के मकान के हिस्से तोड़ दिए थे। इसके बाद पीड़ित हाईकोर्ट चले गए थे। हाईकोर्ट ने पीड़ितों के पुनर्वास के आदेश दिए थे। इसके बावजूद प्रशासन सड़क पर नाला निर्माण में लग गया।
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इनके खिलाफ दायर की याचिका
जिन अधिकारियों के खिलाफ याचिका दायर की गई है। उनमें नगर आयुक्त शिपू गिरि, सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप कुमार, एसडीएम सदर सुबोध कुमार, अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग प्रवीण जोशिया, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग धर्मेंद्र सिंह, सदर कोतवाल कपिल देव, थाना प्रभारी कुतुबशेर एचएन सिंह, हलका लेखपाल सचिन प्रजापति और 50 अज्ञात लोक सेवक शामिल हैं।
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पिछले दिनों शमशेर सिंह गौतम की ओर से संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। अब नरेश कुमार और हंसराज के द्वारा एससी-एसटी कोर्ट में दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई है। अधिवक्ता राजकुमार ने बताया कि नरेश कुमार और हंसराज ने नगर आयुक्त और सिटी मजिस्ट्रेट सहित आठ अधिकारियों तथा 50 अज्ञात लोक सेवकों को विपक्षी बनाया गया है। सभी अधिकारियों से जवाब तलब किया गया है।
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इसके लिए 20 मई को पेश होने के लिए कहा गया है, साथ ही जिलाधिकारी को 15 दिन के भीतर जांच आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिवक्ता ने बताया कि जिस जमीन पर बने मकानों को क्षति पहुंचाई गई है। वह जमीन नरेश कुमार और हंसराज सिंह के पिता ने अंग्रेज व्यक्ति पीसी पॉल से 1934 में खरीदी थी, जिसके बैनामे उनके पास हैं। खतौनी में भी नाम दर्ज है। रजबहा उनकी जमीन की सीमा से लगा है। राजकुमार का कहना है कि यदि मुकदमा दर्ज होता है तो प्रत्येक पीड़ित, जिसका नाम मुकदमे में होगा उसे चार-चार लाख रुपये मुआवजे के तौर पर देने होंगे।
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यह है प्रकरण
वीवीआईपी के आगमन को देखते हुए जिला प्रशासन सर्किट हाउस रोड का चौड़ीकरण करा रहा है। चूंकि सड़क के बीचोबीच रजबहा है। ऐसे में इसकी दोनों पटरियों का स्वामित्व सिंचाई विभाग के पास है। सिंचाई विभाग ने ही चौड़ीकरण के लिए अतिक्रमण पर निशान लगाए थे। अतिक्रमणकारियों को खुद अतिक्रमण हटा लेने के लिए चार अप्रैल तक का समय दिया गया था, लेकिन प्रशासन ने चार अप्रैल तक का इंतजार नहीं किया और एक अप्रैल में ही जेसीबी ले जाकर अतिक्रमण बताते हुए दर्जनों लोगों के मकान के हिस्से तोड़ दिए थे। इसके बाद पीड़ित हाईकोर्ट चले गए थे। हाईकोर्ट ने पीड़ितों के पुनर्वास के आदेश दिए थे। इसके बावजूद प्रशासन सड़क पर नाला निर्माण में लग गया।
इनके खिलाफ दायर की याचिका
जिन अधिकारियों के खिलाफ याचिका दायर की गई है। उनमें नगर आयुक्त शिपू गिरि, सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप कुमार, एसडीएम सदर सुबोध कुमार, अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग प्रवीण जोशिया, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग धर्मेंद्र सिंह, सदर कोतवाल कपिल देव, थाना प्रभारी कुतुबशेर एचएन सिंह, हलका लेखपाल सचिन प्रजापति और 50 अज्ञात लोक सेवक शामिल हैं।