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Saharanpur News: सर्किट हाउस प्रकरण में अधिकारियों के खिलाफ दायर की गई अपील खारिज

Fri, 02 Oct 2026 01:09 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 02 Oct 2026 01:09 AM IST
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Appeal filed against officials in the Circuit House case dismissed.
सहारनपुर। सर्किट हाउस रोड के बहुचर्चित मामले में बृहस्पतिवार को विशेष न्यायाधीश एससी एसटी एक्ट विकास गुप्ता की अदालत ने कथित रूप से अनुसूचित जाति के लोगों के आवासों को तोड़ने के मामले में दायर 12 अपीलों को खारिज कर दिया। वादी पक्ष की तरफ से पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए प्रार्थना पत्र दायर किया था। वहीं, अब वादी पक्ष का कहना है कि वह हाईकोर्ट में अपील दायर करेंगे।
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पीड़ित करण सिंह, अरविंद, अजय कुमार, अनिल कुमार, जोगेंद्र कुमार, प्रवीण कुमार, राज सिंह, नरेश, नरेश कुमार, हंसराज सिंह, पिंकी और अनीता ने अलग-अलग अपील दायर की थी। बताया कि वह सभी अनुसूचित जाति से हैं। विपक्षीगण गैर अनुसूचित जाति के अधिकारी हैं। परिवार कई वर्षों से जमीन पर काबिज हैं। उनके घर हसनपुर सर्किट हाउस रोड रजबहे की कच्ची पटरी पर स्थित हैं। सिंचाई विभाग की पटरी रजबहे के मध्य से 20 फीट चौड़ी कच्ची पटरी है।
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अधिशासी अभियंता अपर खंड पूर्वी यमुना नहर प्रवीण जौशिया ने 28 मार्च 2026 को अपने कार्यालय के माध्यम से पत्र जारी कर सिंचाई विभाग की भूमि पर किए गए अनधिकृत कब्जा हटाने के संबंध में नोटिस दिया था। इसमें चार अप्रैल 2026 तक सिंचाई विभाग की जमीन को कब्जा मुक्त करने की समय सीमा दी गई। आरोप लगाया कि अधिकारियों ने समय से पहले ही एक अप्रैल को कब्जा हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी। इससे उनके मकान क्षतिग्रस्त हो गए थे। इस संबंध में जब अधिकारियों से बात की गई तो पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों ने अभद्र व्यवहार किया।
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इनके खिलाफ दाखिल किया था प्रार्थनापत्र
पीड़ितों ने एसडीएम सदर सुबोध कुमार, नगर आयुक्त शिपू गिरि, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण खंड धर्मेंद्र सिंह, हल्का लेखपाल सचिन प्रजापति, थाना सदर बाजार प्रभारी कपिल देव, थाना कुतुबशेर प्रभारी एचएन सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप कुमार समेत पुलिस एवं प्रशासन के 50 अज्ञात के खिलाफ प्रार्थनापत्र अदालत में दाखिल किया था। आरोप लगाया था कि अधिकारियों ने आपराधिक षड्यंत्र करके यह संगठित अपराध किया है। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद दायर सभी अपील निरस्त की है।


इलाहाबाद हाईकोर्ट में जाएंगे पीड़ित
पीड़ितों के अधिवक्ता राजकुमार ने बताया कि मामले में हाईकोर्ट का रुख किया जाएगा। उन्होंने निर्णय को विधि सम्मत नहीं बताया। कहा कि एससी एसटी एक्ट के तहत पहले प्राथमिकी दर्ज होती है। इसके बाद जांच की जाती है। उन्होंने बताया कि 18 (क), 15 (क) 4 , 4(2)ए,बी,सी एससी, एसटी एक्ट एवं नियमावली 1995 के नियम 5(1) का उल्लंघन हुआ है। इसके अलावा तीन अन्य मामलों में सुनवाई जारी है। इसमें प्राथमिकी दर्ज न करने का मामला भी है। मामले को हाईकोर्ट में और भी मजबूती से रखा जाएगा।
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