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गरीब बच्चों का कांवेंट स्कूलों में पढ़ने का रास्ता साफ

Thu, 13 Oct 2016 12:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर Updated Thu, 13 Oct 2016 12:52 AM IST
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Paving the way for poor children studying in convent schools
स्कूल - फोटो : अमर उजाला
सहारनपुर में कांवेंट स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब बच्चों के पढ़ने का रास्ता साफ हो गया है। निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम के अंतर्गत गैर सहायता वाले मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले अलाभित समूह एवं दुर्बल वर्ग के बच्चों को  वित्तीय सहायता दिये जाने के लिए  
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राज्यपाल ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। प्रत्येक छात्र को यूनिफार्म और पुस्तकों के लिए पांच हजार रुपये की धनराशि प्रदान की जाएगी। आरटीई के तहत 25 फीसदी गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला देने का प्रावधान है।
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लेकिन स्कूलों के मनमाने रवैये और शिक्षा विभाग की लापरवाही के चलते नाममात्र के बच्चों को ही कांवेंट स्कूलों में दाखिला मिल पाता है। स्कूल प्रबंधन गरीब बच्चों का दाखिला करने में आनाकानी करते हैं।
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इस स्थिति से निपटने के लिए शासन स्तर पर नई योजना बनाई गई है। बेसिक शिक्षा अधिकारी बुद्धप्रिय सिंह ने बताया कि शासन स्तर पर अलाभित समूह एवं दुर्बल वर्ग के बच्चों को पाठ्य पुस्तकें, अभ्यास पुस्तिकाएं और यूनिफार्म के लिए वित्तीय सहायता देने का निर्णय लिया गया है

ताकि उनके अभिभावकों को उक्त व्यवस्था करने में आने वाले व्यय भार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। वे अपने पाल्यों को सुगमता से विद्यालय भेज सके। जिससे अलाभित समूह एवं दुर्बल वर्ग के बच्चे समावेश परिवेश में गुणवत्ता युक्त शिक्षा प्राप्त कर सके। 

    बीएसए ने बताया कि शैक्षिक सत्र 2013-14 से अब तक प्रवेश पाये अलाभित समूह एवं दुर्बल वर्ग के अध्ययनरत लगभग 16,000 छात्र-छात्राओं को पाठ्य पुस्तकों, अभ्यास पुस्तिकाओं और यूनिफार्म के लिए शैक्षिक सत्र 2016-17 में प्रति छात्र 5,000 रुपये की दर से कुल आठ करोड़ रुपये की


धनराशि स्वीकृत की गई है। बजट की व्यवस्था चालू वित्तीय वर्ष 2016-17 में कराई जाएगी। इस योजना के अंतर्गत व्यय की जाने वाली समस्त धनराशि राज्य सरकार द्वारा अपने स्रोतों से वहन की जाएगी। छात्र-छात्राओं को यह धनराशि बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा प्रदान की जाएगी। 
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