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अभिभावकों को सर्वाइकल कैंसर के प्रति जागरूक किया
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सहारनपुर। सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए एचपीवी (ह्यूमन पापीलोमा वायरस) टीकाकरण को लेकर सोफिया गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें चिकित्सा विभाग के अधिकारियों ने अभिभावकों को सर्वाइकल कैंसर के प्रति जागरूक किया।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. संजीव मांगलिक एवं एनसीडी की नोडल अधिकारी शिवांका गौड़ के द्वारा अभिभावकों, शिक्षकों और छात्राओं को सर्वाइकल कैंसर होने के कारण, लक्षण और निवारण की जानकारी दी। सर्वाइकल कैंसर के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए एचपीवी टीकाकरण को जरूरी बताया। शिवाका गौड़ ने अभिभावकों, शिक्षकों और छात्राओं को बताया कि गर्भाश्य ग्रीवा का कैंसर दुनिया भर की महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे आम प्रकार का कैंसर है, क्योंकि यह धीरे-धीरे बढ़ता है। इसलिए इसके बचाव के तरीके उपलब्ध हैं, जिसमें से एचपीवी टीका प्रमुख है। यह टीका नौ से 14 की उम्र की बालिकाओं को लगाया जाता है। साथ ही उनके द्वारा एचपीवी टीकाकरण की खुराकों के बारे में भी विस्तार से समझाया गया। उन्होंने बताया कि बालिकाओं को वैक्सीन की दो खुराक पर्याप्त रहती हैं, जबकि व्यस्क महिलाओं को इसकी तीन खुराक दी जाती हैं। पहली और दूसरी खुराक के बीच सप्ताह का अंतर तथा दूसरी और तीसरी खुराक के बीच 12 सप्ताह का अंतर रहता है। प्रधानाचार्य सिस्टर जोसेन ने भी अभिभावकों को जागरूक किया। कार्यक्रम में जिला मलेरिया विभाग से डॉ. पंकज, एनसीडी टीम से लोहित भारती, राखी, चेतन मदान आदि मौजूद रहे।
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मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. संजीव मांगलिक एवं एनसीडी की नोडल अधिकारी शिवांका गौड़ के द्वारा अभिभावकों, शिक्षकों और छात्राओं को सर्वाइकल कैंसर होने के कारण, लक्षण और निवारण की जानकारी दी। सर्वाइकल कैंसर के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए एचपीवी टीकाकरण को जरूरी बताया। शिवाका गौड़ ने अभिभावकों, शिक्षकों और छात्राओं को बताया कि गर्भाश्य ग्रीवा का कैंसर दुनिया भर की महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे आम प्रकार का कैंसर है, क्योंकि यह धीरे-धीरे बढ़ता है। इसलिए इसके बचाव के तरीके उपलब्ध हैं, जिसमें से एचपीवी टीका प्रमुख है। यह टीका नौ से 14 की उम्र की बालिकाओं को लगाया जाता है। साथ ही उनके द्वारा एचपीवी टीकाकरण की खुराकों के बारे में भी विस्तार से समझाया गया। उन्होंने बताया कि बालिकाओं को वैक्सीन की दो खुराक पर्याप्त रहती हैं, जबकि व्यस्क महिलाओं को इसकी तीन खुराक दी जाती हैं। पहली और दूसरी खुराक के बीच सप्ताह का अंतर तथा दूसरी और तीसरी खुराक के बीच 12 सप्ताह का अंतर रहता है। प्रधानाचार्य सिस्टर जोसेन ने भी अभिभावकों को जागरूक किया। कार्यक्रम में जिला मलेरिया विभाग से डॉ. पंकज, एनसीडी टीम से लोहित भारती, राखी, चेतन मदान आदि मौजूद रहे।
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