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पंचायत चुनाव: दावेदारों में आरक्षण जानने के लिए बढी बेचैनी
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सहारनपुर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में आरक्षण के शासनादेश के बाद गांवों में प्रधानी चुनाव की तैयारी करने वालों और उनके समर्थकों में बेचैनी बढ़ गई है। जिला पंचायतराज कार्यालय से लेकर जिला निर्वाचन (पंचायत) कार्यालय के अधिकारियों और नेताओं से अपने-अपने गांव में प्रधान पद के आरक्षण की स्थिति को लेकर संपर्क कर रहे हैं। सब एक ही बात जानना चाहते हैं कि उनके गांव में प्रधानी का पद किस श्रेणी में है।
राजनीति और गांव में प्रतिष्ठा के हिसाब से प्रधान का पद बेहद महत्वपूर्ण होता है। क्षेत्रीय राजनीति में भी इसकी बड़ी भूमिका होती है। इसके चलते सभी दलों के नेता क्षेत्र में अपने अधिक से अधिक प्रधानों को जिताना चाहते हैं। जिससे वे विधानसभा से लेकर लोकसभा चुनाव तक में अपनी पार्टी के लिए जनसमर्थन जुटा सकें। पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण का शासनादेश जारी होने के बाद प्रधानी का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे लोगों और उनके समर्थकों में अपने गांव का आरक्षण जानने की बेचैनी है। राजनीतिक दलों के नेता यह जानने को उत्सुक हैं कि उनके क्षेत्र में आरक्षण की तस्वीर क्या है।
म्हारे गांव का आरक्षण क्या रहेगा, भाई
गांव हलगोआ के दो बार से प्रधान रहे और इस बार भी चुनाव की तैयारी में लगे आरिफ ने प्रशासन में अपने जानकारों को फोन कर आरक्षण का फार्मूला समझने का प्रयास किया। उन्होंने पूछा कि म्हारे गांव में आरक्षण की स्थिति क्या है। गांव नन्दी फिरोजपुर में प्रधानी का चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे प्रदीप नंबरदार भी दिन भर प्रधानी के आरक्षण जानने को उत्सुक रहे। गांव नल्हेड़ा गुर्जर, नया गांव, उमरी, अहमदपुर आदि ग्रामसभाओं के दावेदार भी यह कयास लगाने में जुटे रहे कि उनके यहां प्रधानी का क्या आरक्षण रहेगा।
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यह रहेगी रूपरेखा
- आरक्षण का प्रस्ताव 20 फरवरी से एक मार्च के बीच तय होगा।
- आरक्षण की विस्तृत सूची का प्रकाशन दो से तीन मार्च में होगा।
- आरक्षण प्रस्ताव पर आपत्तियां चार से आठ मार्च तक ली जाएगी।
- आपत्तियों का संकलन डीपीआरओ कार्यालय में नौ मार्च को होगा।
- आपत्तियों का निस्तारण 10 से 12 मार्च तक किया जाएगा।
- आरक्षण की अंतिम सूची का प्रकाशन 13 से 14 मार्च तक किया जाएगा।
- आरक्षण की अंतिम सूची को 15 मार्च को पंचायतीराज निदेशालय को भेजा जाएगा।
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राजनीति और गांव में प्रतिष्ठा के हिसाब से प्रधान का पद बेहद महत्वपूर्ण होता है। क्षेत्रीय राजनीति में भी इसकी बड़ी भूमिका होती है। इसके चलते सभी दलों के नेता क्षेत्र में अपने अधिक से अधिक प्रधानों को जिताना चाहते हैं। जिससे वे विधानसभा से लेकर लोकसभा चुनाव तक में अपनी पार्टी के लिए जनसमर्थन जुटा सकें। पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण का शासनादेश जारी होने के बाद प्रधानी का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे लोगों और उनके समर्थकों में अपने गांव का आरक्षण जानने की बेचैनी है। राजनीतिक दलों के नेता यह जानने को उत्सुक हैं कि उनके क्षेत्र में आरक्षण की तस्वीर क्या है।
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म्हारे गांव का आरक्षण क्या रहेगा, भाई
गांव हलगोआ के दो बार से प्रधान रहे और इस बार भी चुनाव की तैयारी में लगे आरिफ ने प्रशासन में अपने जानकारों को फोन कर आरक्षण का फार्मूला समझने का प्रयास किया। उन्होंने पूछा कि म्हारे गांव में आरक्षण की स्थिति क्या है। गांव नन्दी फिरोजपुर में प्रधानी का चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे प्रदीप नंबरदार भी दिन भर प्रधानी के आरक्षण जानने को उत्सुक रहे। गांव नल्हेड़ा गुर्जर, नया गांव, उमरी, अहमदपुर आदि ग्रामसभाओं के दावेदार भी यह कयास लगाने में जुटे रहे कि उनके यहां प्रधानी का क्या आरक्षण रहेगा।
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यह रहेगी रूपरेखा
- आरक्षण का प्रस्ताव 20 फरवरी से एक मार्च के बीच तय होगा।
- आरक्षण की विस्तृत सूची का प्रकाशन दो से तीन मार्च में होगा।
- आरक्षण प्रस्ताव पर आपत्तियां चार से आठ मार्च तक ली जाएगी।
- आपत्तियों का संकलन डीपीआरओ कार्यालय में नौ मार्च को होगा।
- आपत्तियों का निस्तारण 10 से 12 मार्च तक किया जाएगा।
- आरक्षण की अंतिम सूची का प्रकाशन 13 से 14 मार्च तक किया जाएगा।
- आरक्षण की अंतिम सूची को 15 मार्च को पंचायतीराज निदेशालय को भेजा जाएगा।