फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   Paibandi berries were once the identity of Deoband, but now they are extinct

Saharanpur News: पैबंदी बेर कभी होते थे देवबंद की पहचान, आज हो चुके विलुप्त

Tue, 09 Jul 2024 03:18 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर Updated Tue, 09 Jul 2024 03:18 AM IST
विज्ञापन
Paibandi berries were once the identity of Deoband, but now they are extinct
देवबंद में गंगोह बाईपास रोड पर ​स्थित बेर का बाग। -संवाद
देवबंद/तीतरों। किसी जमाने में देवबंद के पैबंदी बेर और तीतरों के फुलम की अलग पहचान थी। इन फलों की महक से ही लोग इनकी तरफ आकर्षित हो जाते थे। देश के कई राज्यों में इनकी मांग थी, लेकिन मौजूदा समय में यह विलुप्त होने की कगार पर है।
विज्ञापन


पुराने बाग कट गए, नए के प्रति नहीं दिखा रहे रुचि
देवबंद के कुलदीप छाबड़ा बताते हैं कि एक समय था जब देवबंद के मशहूर मीठे पैबंदी बेर की फसल आने के बाद नगर के बाजारों में आ जाओ लड्डू खा लो, पेड़े वाले बेर ले जाओ की आवाजें सुनने को मिलती थीं, लेकिन यह आवाज अब गुम हो गई।
विज्ञापन

शिक्षक सय्यद वजाहत शाह बताते हैं कि अठपेड़, मेहतरो वाली, जाकिर वाली, शीतलो वाली, साबिर वाली और दारुल उलूम की बेरी समेत सैकड़ों बेरी के बाग यहां थे। आबादी बढ़ने के साथ ही बेरी के बाग काॅलोनियों में तब्दील हो गए। हाल में इक्का दुक्का बाग ही यहां बचा है। यदि समय रहते उचित संरक्षण नहीं मिला तो देवबंद का मीठा पैबंदी बेर सिर्फ इतिहास बनकर रह जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


फुलम का नहीं मिलता उचित दाम, इसलिए हुआ मोहभंग
वहीं, तीतरों के बरसी गांव निवासी फुलम की खेती करने वाले किसान महावीर सिंह बताते हैं कि कच्ची गढ़ी मार्ग, सालियर रजबहे मार्ग, आसफगढ़ पापड़ी रजबहे आदि फुलम का क्षेत्र हुआ करता था। उनके गांव में ही करीब एक हजार बीघा जमीन पर फुलम के बाग थे, लेकिन बाजार में फुलम के उचित दाम नहीं मिलने के कारण किसानों का इससे मोहभंग हो गया।
किसान विकास चौधरी बताते हैं कि फुलम के पेड़ों की अत्यधिक देखरेख करनी पड़ती थी। दूसरा जलस्तर भी लगातार घटता चला गया। जिससे पेड़ सूखने लगे। इसे देखते हुए किसानों ने फुलम की खेती छोड़ना ही बेहतर समझा।

-----------
पुराने बाग धीरे-धीरे खत्म होते चले गए। नए बाग किसी ने लगाए नहीं, जिस वजह से यह स्थिति है। किसानों को जागरूक किया जा रहा है कि कोई भी फसल विलुप्त न होने दें और अधिक से अधिक बाग लगाएं।
- गमपाल सिंह, जिला उद्यान अधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed