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दो पक्षों में हुए टकराव से आहत हैं अन्य अनुयायी
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सरसावा(सहारनपुर)। जीवन पर्यन्त बाबा बंशी वाले नर सेवा नारायण सेवा और प्रेम भाव से रहने का संदेश देते रहे, भंडारों के आयोजन का उद्देश्य भी हर व्यक्ति को अन्न वितरण कराना था। बावजूद इसके बाबा के अनुयायी उन संदेशों के विपरीत आचरण पर उतर आए हैं। सोराना गांव में बुधवार को जो हुआ, उससे बाबा अन्य अनुयायी भी आहत हैं।
बाबा बंशी वाले के अनुयायी सरसावा निवासी अशोक धीमान ने इस प्रकरण को खेदजनक बताया। उन्होंने कहा कि भविष्य में होने वाली ऐसे ही समस्याओं के कारण बाबा ने किसी को भी अपना उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया था, लेकिन कुछ लोगों की आपसी गलतफहमी के कारण बाबा की छवि पर आंच आ रही है।
नकुड़ क्षेत्र के ग्राम चढ़ाव निवासी मोहकम सिंह चौधरी ने कहा कि गांव के लोगों को अपनी राजनीतिक लड़ाई में मंदिर को नहीं घसीटना चाहिए, बाबा बंशी वाले केवल सोराना के ही नहीं देशभर के लाखों लोगों की आस्था का केंद्र हैं। अनावश्यक विवाद बेहद खेदजनक है।
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बाबा बंशी वाले के हरिद्वार स्थित अन्नपूर्णा आश्रम ट्रस्ट के अध्यक्ष सतीश गोयल का कहना है कि वे अपने निवास करनाल में हैं। ट्रस्ट का इस विवाद से कोई लेना-देना नहीं है। बाबा से ग्राम सोराना को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली, बाबा के आशीर्वाद से बना ट्रस्ट जनमानस के हित और सहयोग के लिए है, किसी विवाद के लिए नहीं। सोराना के लोग आपस में जो तय करेंगे ट्रस्ट के लोग उनके साथ हैं। ट्रस्ट बाबा के नाम पर किसी प्रकार की राजनीति अथवा विवाद से दूर है।
बाबा की अंतिम इच्छा का कर रहे पालन: रविंद्र
एक पक्ष से रविंद्र शर्मा ने कहा कि बाबा ने अपने प्रवचनों में कई बार कहा था कि उनकी समाधि उनके गुरु कुटी वाले बाबा की समाधि के बगल में ही बने। हम केवल बाबा की अंतिम इच्छा का पालन कर रहे हैं। बाबा की विरासत के सवाल पर रविंद्र ने कहा कि बाबा के ट्रस्ट आदि से उनका कोई लेना देना नहीं है, वो पहले भी बाबा की निस्वार्थ भक्ति करते थे और आज भी बाबा के ही भक्त हैं।
सोराना में समाधि बनने के हम भी पक्षधर : विनय
संयुक्त रूप से बाबा का अंतिम संस्कार करने वाले विनय चौधरी ने कहा कि मामला केवल गलतफहमी का है, वो तो हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार बाबा की अस्थियां गंगा में प्रवाहित करना चाहते थे। बाबा की समाधि ग्राम सोराना में ही बननी चाहिए, वे भी इसके पक्षधर हैं क्योंकि बाबा सोराना में ही रहे तथा सोराना की पहचान बाबा से ही है।
ग्राम प्रधान के चाचा को भी किया घायल
सरसावा। बुधवार सुबह हुए संघर्ष के दौरान सोराना के ग्राम प्रधान आकाश चौधरी के चाचा नरेश चौधरी के ऊपर भी उनके कार्यालय पर हमला किया। जिसमें नरेश चौधरी के हाथ में गहरी चोट आई। सहकारी समिति के पूर्व चेयरमैन राकेश चौधरी ने कहा कि नरेश चौधरी के ऊपर किया गया हमला पूरी तरह गलत है, उनका मंदिर प्रकरण से कोई लेना देना नहीं है।
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बाबा बंशी वाले के अनुयायी सरसावा निवासी अशोक धीमान ने इस प्रकरण को खेदजनक बताया। उन्होंने कहा कि भविष्य में होने वाली ऐसे ही समस्याओं के कारण बाबा ने किसी को भी अपना उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया था, लेकिन कुछ लोगों की आपसी गलतफहमी के कारण बाबा की छवि पर आंच आ रही है।
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नकुड़ क्षेत्र के ग्राम चढ़ाव निवासी मोहकम सिंह चौधरी ने कहा कि गांव के लोगों को अपनी राजनीतिक लड़ाई में मंदिर को नहीं घसीटना चाहिए, बाबा बंशी वाले केवल सोराना के ही नहीं देशभर के लाखों लोगों की आस्था का केंद्र हैं। अनावश्यक विवाद बेहद खेदजनक है।
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बाबा बंशी वाले के हरिद्वार स्थित अन्नपूर्णा आश्रम ट्रस्ट के अध्यक्ष सतीश गोयल का कहना है कि वे अपने निवास करनाल में हैं। ट्रस्ट का इस विवाद से कोई लेना-देना नहीं है। बाबा से ग्राम सोराना को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली, बाबा के आशीर्वाद से बना ट्रस्ट जनमानस के हित और सहयोग के लिए है, किसी विवाद के लिए नहीं। सोराना के लोग आपस में जो तय करेंगे ट्रस्ट के लोग उनके साथ हैं। ट्रस्ट बाबा के नाम पर किसी प्रकार की राजनीति अथवा विवाद से दूर है।
बाबा की अंतिम इच्छा का कर रहे पालन: रविंद्र
एक पक्ष से रविंद्र शर्मा ने कहा कि बाबा ने अपने प्रवचनों में कई बार कहा था कि उनकी समाधि उनके गुरु कुटी वाले बाबा की समाधि के बगल में ही बने। हम केवल बाबा की अंतिम इच्छा का पालन कर रहे हैं। बाबा की विरासत के सवाल पर रविंद्र ने कहा कि बाबा के ट्रस्ट आदि से उनका कोई लेना देना नहीं है, वो पहले भी बाबा की निस्वार्थ भक्ति करते थे और आज भी बाबा के ही भक्त हैं।
सोराना में समाधि बनने के हम भी पक्षधर : विनय
संयुक्त रूप से बाबा का अंतिम संस्कार करने वाले विनय चौधरी ने कहा कि मामला केवल गलतफहमी का है, वो तो हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार बाबा की अस्थियां गंगा में प्रवाहित करना चाहते थे। बाबा की समाधि ग्राम सोराना में ही बननी चाहिए, वे भी इसके पक्षधर हैं क्योंकि बाबा सोराना में ही रहे तथा सोराना की पहचान बाबा से ही है।
ग्राम प्रधान के चाचा को भी किया घायल
सरसावा। बुधवार सुबह हुए संघर्ष के दौरान सोराना के ग्राम प्रधान आकाश चौधरी के चाचा नरेश चौधरी के ऊपर भी उनके कार्यालय पर हमला किया। जिसमें नरेश चौधरी के हाथ में गहरी चोट आई। सहकारी समिति के पूर्व चेयरमैन राकेश चौधरी ने कहा कि नरेश चौधरी के ऊपर किया गया हमला पूरी तरह गलत है, उनका मंदिर प्रकरण से कोई लेना देना नहीं है।